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कोरोना से खुद बचिये-सरकार फेल हो गयी है: पटना के अस्पतालों में ऑक्सीजन नहीं, कई अस्पतालों ने इलाज रोका

PATNA : कोरोना की दूसरी लहर आने के साथ ही बिहार की नीतीश सरकार के दावे रेत की दीवार की तरह ढ़ह गयी है. भीषण महामारी के बीच पटना में ऑक्सीजन का भारी संकट उत्पन्न हो गया है. कोर

कोरोना से खुद बचिये-सरकार फेल हो गयी है: पटना के अस्पतालों में ऑक्सीजन नहीं, कई अस्पतालों ने इलाज रोका
First Bihar
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PATNA : कोरोना की दूसरी लहर आने के साथ ही बिहार की नीतीश सरकार के दावे रेत की दीवार की तरह ढ़ह गयी है. भीषण महामारी के बीच पटना में ऑक्सीजन का भारी संकट उत्पन्न हो गया है. कोरोना के इलाज में सबसे पहली जरूरत ऑक्सीजन की होती है लेकिन पटना के ज्यादातर निजी अस्पतालों के पास ऑक्सीजन नहीं है, कई अस्पतालों ने मरीजों की भर्ती रोक दी है. सरकारी अस्पतालों के बेड फुल हैं और निजी अस्पताल मरीजों को एडमिट नहीं कर रहे हैं. यानि अगर कोई कोरोना का शिकार बन रहा है तो उसकी जान भगवान भरोसे ही हैं. बड़े बड़े दावे करने वाली सरकार ऑक्सीजन तक का इंतजाम नहीं कर पा रही है.


अस्पतालों में नो इंट्री का बोर्ड टंगा
कोरोना के भीषण त्रासदी के बीच पटना के तीनों बड़े सरकारी अस्पतालों के बेड पिछले कई दिनों से फुल हैं. वहां मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है. राज्य सरकार ने कुल 47 निजी अस्पतालों को कोरोना के इलाज की मंजूरी दी है लेकिन ऑक्सीजन के भारी संकट से निजी अस्पतालों में त्राहिमाम की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. FIRST BIHAR के पास ऐसे आधा दर्जन अस्पतालों की सूची है जिन्होंने मरीज को भर्ती करना बंद कर दिया है. उनके पास ऑक्सीजन नहीं है. 


कोरोना पीड़ित व्यक्ति को सबसे पहले ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है लेकिन पटना में अस्पतालों को ऑक्सीजन नहीं मिल रहा है. अस्पताल संचालकों ने बताया कि उन्हें जितने ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत है उसका 20 से 25 परसेंट भी नहीं मिल पा रहा है. वे मरीज का इलाज कहां से करेंगे.


सुनिये क्या कह रह हैं अस्पताल
कंकड़बाग के जगदीश मेमोरियल अस्पताल के निदेशक डॉ. आलोक ने मीडिया को बताया कि अब उनके पास कोई उपाय बचा ही नहीं है. जितने मरीज भर्ती हैं उनकी जान बचाने के लिए 40 सिलेंडर रोज चाहिये. लेकिन 8 ही सिलेंडर मिल पा रहे हैं. इसलिए मरीजों की भर्ती रोक दी गयी है. डॉ आलोक ने पटना के डीएम से बात कर ऑक्सीजन की व्यवस्था करने की गुहार लगायी है.


सगुना मोड़ स्थिति हाईटेक अस्पताल ने भी मरीजों की भर्ती रोक दी है. अस्पताल के मैनेजर ने बताया कि ऑक्सीजन मिल नहीं रहा है. मरीजों के लिए जितना ऑक्सीजन चाहिये उसका आधा भी नहीं मिल पा रहा है. फिर कहां से इलाज करेंगे. अस्पताल प्रबंधन ने चारो ओर हाथ पैर मार लिये लेकिन कहीं से कोई उपाय नहीं हो रहा है.


पटना के ऑक्सीजोन अस्पताल में भी मरीजों को भर्ती नहीं लिया जा रहा है. बाइपास के पल्स इमरजेंसी अस्पताल ने भी कोविड मरीजों को एडमिट करने से इंकार कर दिया है. सगुना मोड़ के समय हॉस्पिटल में ऑक्सीजन के लिए हंगामा हो चुका है.  इसलिए उसने भी भर्ती लेने से मना कर दिया है. अस्पताल के निदेशक ने बताया कि वे बहुत कोशिश करके भी ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं.


पारस-रूबन में नये मरीजों की भर्ती नहीं
पटना के दो बडे अस्पतालों पारस औऱ रूबन मेमोरियल में भी मरीजों की भर्ती नहीं की जा रही है. अस्पताल प्रबंधन कह रहा है कि उसके पास नये मरीजों के लिए संसाधन नहीं है. लिहाजा फिलहाल किसी को भर्ती करना संभव नहीं है.


कोरोना के इलाज में सबसे पहली जरूरत है ऑक्सीजन
कोविड का इलाज कर रहे डॉक्टर बताते हैं कि कोरोना पीड़ित मरीज को सबसे पहले ऑक्सीजन की जररूत होती है. जिस किसी को भी फेफड़ों में इंफेक्शन होता है उसे सांस लेने में परेशानी होती है. उसे ऑक्सीजन देकर ही जान बचायी जा सकती है. डॉक्टरों के मुताबिक एक ऑक्सीजन सिलेंडर तकरीबन 20 घंटे तक किसी एक मरीज को सांस दे सकता है. लेकिन अगर ऑक्सीजन ही नहीं मिले तो मरीज को कैसे बचाया जा सकता है.

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