ब्रेकिंग
2 करोड़ लोग ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ से जुड़े, बोले प्रशांत किशोर..जनता की नाराजगी सरकार को समझनी चाहिएपटना के होटल में पॉलिटेक्निक छात्रा से छेड़छाड़ का प्रयास, पिता के सामने अगवा करने की कोशिशजन्मदिन पर नितिन नवीन से मिलने पहुंचे खेसारी लाल यादव, भाजपा में शामिल होने के सवाल पर बोले- ‘मैं RJD के साथ था, हूं और रहूंगा’विजय बनकर इमरान शेख ने हिंदू युवती से किया निकाह, जबरन धर्म बदलने और गोमांस खिलाने का आरोप, मुख्य आरोपी दो भाईयों के साथ गिरफ्तार‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की वेबसाइट ठप, अभिजीत दिपके ने केंद्र पर लगाया तानाशाही का आरोप2 करोड़ लोग ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ से जुड़े, बोले प्रशांत किशोर..जनता की नाराजगी सरकार को समझनी चाहिएपटना के होटल में पॉलिटेक्निक छात्रा से छेड़छाड़ का प्रयास, पिता के सामने अगवा करने की कोशिशजन्मदिन पर नितिन नवीन से मिलने पहुंचे खेसारी लाल यादव, भाजपा में शामिल होने के सवाल पर बोले- ‘मैं RJD के साथ था, हूं और रहूंगा’विजय बनकर इमरान शेख ने हिंदू युवती से किया निकाह, जबरन धर्म बदलने और गोमांस खिलाने का आरोप, मुख्य आरोपी दो भाईयों के साथ गिरफ्तार‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की वेबसाइट ठप, अभिजीत दिपके ने केंद्र पर लगाया तानाशाही का आरोप

कोरोना ने किसानों की तकलीफ और बढ़ा दी, वंचित समाज पार्टी ने बताई हकीकत

PATNA : कोरोना ने किसानों की तकलीफ को और बढ़ा दिया है. वंचित समाज पार्टी के नेता और चुनाव अभियान समिति के प्रमुख ललित मोहन सिंह ने कहा कि किसानों के बही खाते में नफा-नुकसान क

FirstBihar
Anamika
2 मिनट

PATNA : कोरोना ने किसानों की तकलीफ को और बढ़ा दिया है. वंचित समाज पार्टी के नेता और चुनाव अभियान समिति के प्रमुख ललित मोहन सिंह ने कहा कि  किसानों के बही खाते में नफा-नुकसान का कोई कॉलम ही नहीं होता, आखिरकार ऑडिट करने कौन आएगा, उसके खाते में एक ही कॉलम है घाटे वाला क्योंकि उसके उत्पाद का न्यूनतम समर्थन मूल्य, तय करने वाले कभी खेतों की मेड़ों पर नहीं घूमे. ऐसे अधिकारी इसका मूल्य तय करते हैं जिन्हें न तो खेत से मतलब है और न ही उन्होंने किसानों की परेशानी और दर्द को सामने से देखा है.

उन्होंने कहा कि बिहार में, बहुतायत में, संतोष धन पाया जाता है, कोई किसान खुदकुशी नहीं करता, वह जानता है कि जो होता है अच्छा होता है. दिनकर की कविता की पंक्तियां को अपना भाग्य समझता है ,“सौभाग्य न सब दिन सोता है, देखें आगे क्या होता है।“ और “होहियें वही जे राम रुचि राखा।“ जैसी पंक्तियों को अपनी जीवन का आधार मानता है. 

सरकारी खरीद तो यहां  एक मज़ाक  बन कर रह गई है. जो भी अधिकारी को खरीदने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है वह मिल मालिकों से तथा पैक्स के सभापति की मिली भगत में कम-से-कम 3.00 से लेकर 3.50 प्रति किलो ग्राम या 300/- से 350/- प्रति क्विंटल चाहिए चाहिए. जिस फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1500/- प्रति क्विंटल रखा गया हो उस फसल का 20 से 25% तो सरकार के अधिकारियों को जाता है. और किसानों को तत्तकाल भुगतान के विपरीत कई महीने बाद पैसे मिलते हैं. किसानों की मजबूरी और मजबूती भी यही है कि हम हर साल उपजायेंगे और हर बार मुस्कराहट के साथ घाटा सहेंगे क्योंकि यही हमारा भाग्य है, यह ही हमारी नियति और यही हमारा प्रारब्ध.हम हैं तो खुदा भी है नहीं तो इबादत करेगा कौन?