Bihar Holding Tax : बिहार के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लाखों-करोड़ों परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आ रही है। गांव में अपना पक्का या अर्धपक्का मकान रखने वाले लोगों को अब उस घर के लिए सालाना होल्डिंग टैक्स नहीं देना पड़ सकता है। ग्रामीण परिवारों पर प्रस्तावित मकान कर के प्रावधान को हटाने की तैयारी राज्य सरकार की ओर से की जा रही है। हालांकि, इस पर अंतिम फैसला और आधिकारिक अधिसूचना अभी जारी होना बाकी है।
दरअसल, पंचायतों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-अलग तरह के टैक्स और शुल्क लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। इस प्रस्ताव में आवासीय मकानों को भी टैक्स के दायरे में लाने की व्यवस्था की गई थी। लेकिन गांवों में इस फैसले को लेकर असंतोष सामने आने के बाद सरकार अब इसमें बदलाव करने की तैयारी में है।
पक्के घर पर 100 और अर्धपक्के पर 50 रुपये का था प्रस्ताव
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बने पक्के मकानों से सालाना 100 रुपये और अर्धपक्के मकानों से 50 रुपये होल्डिंग टैक्स लेने का प्रावधान रखा गया था। वहीं कच्चे मकानों को इस टैक्स से बाहर रखा गया था। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए मकानों को लेकर भी सालाना 25 रुपये शुल्क लेने का प्रावधान प्रस्तावित था। यह राशि पंचायतों को उपलब्ध कराए जाने की योजना थी।
अब सरकार आवासीय मकानों से जुड़े इन प्रावधानों को ही हटाने या उनमें बदलाव करने पर विचार कर रही है। यदि संशोधन लागू हो जाता है तो गांव में रहने वाले सामान्य परिवारों को अपने घर पर हर साल किसी तरह का होल्डिंग टैक्स नहीं देना पड़ेगा।
8 करोड़ से ज्यादा लोगों को मिल सकती है राहत
बिहार की बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। ऐसे में आवासीय मकानों को टैक्स से बाहर करने का फैसला लागू होने पर राज्य के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले 8 करोड़ से अधिक लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर किसान, मजदूर, छोटे दुकानदार और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह राहत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ग्रामीण परिवारों का तर्क रहा है कि घर पर अलग से टैक्स लगाने से उनकी आर्थिक परेशानी बढ़ सकती है। इसी वजह से सरकार के स्तर पर प्रस्ताव की समीक्षा की जा रही है।
15 जुलाई को कैबिनेट से मिली थी मंजूरी
ग्रामीण क्षेत्रों में टैक्स और विभिन्न शुल्क वसूलने से संबंधित प्रस्ताव को 15 जुलाई को राज्य कैबिनेट की मंजूरी मिली थी। इसके बाद गजट प्रकाशन और पंचायती राज विभाग की अधिसूचना जारी होनी थी। लेकिन अधिसूचना जारी होने से पहले ही सरकार ने प्रस्ताव के कुछ प्रावधानों पर पुनर्विचार शुरू कर दिया है। यही वजह है कि फिलहाल ग्रामीण आवासीय मकानों से होल्डिंग टैक्स की वसूली को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। यानी अभी ग्रामीण परिवारों को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि टैक्स पूरी तरह खत्म हो गया है। अंतिम फैसला पंचायती राज विभाग की ओर से संशोधित अधिसूचना जारी होने के बाद ही साफ होगा।
पंचायतों की आय बढ़ाना है सरकार का मकसद
पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए अपनी आय के स्रोत बढ़ाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। 16वें केंद्रीय वित्त आयोग ने भी पंचायतों की अपनी आय बढ़ाने की दिशा में प्रयास करने की बात कही है। इसी के तहत बिहार में पंचायत स्तर पर विभिन्न कर और शुल्क लगाने की योजना बनाई गई थी। सरकार की कोशिश है कि पंचायतें विकास कार्यों के लिए सिर्फ सरकारी अनुदान और दूसरी मदों से मिलने वाली राशि पर निर्भर न रहें। उनके पास अपनी आय का भी मजबूत स्रोत हो।
लेकिन आवासीय मकानों पर टैक्स लगाने का प्रस्ताव ग्रामीण स्तर पर ज्यादा संवेदनशील साबित हुआ। अब सरकार ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रही है जिसमें आम ग्रामीण परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े और पंचायतों की आमदनी बढ़ाने का रास्ता भी खुला रहे।
व्यावसायिक भवनों पर जारी रह सकता है टैक्स
आवासीय मकानों को राहत देने के बावजूद व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े भवनों और प्रतिष्ठानों पर टैक्स व शुल्क का प्रावधान जारी रहने की संभावना है। ग्रामीण क्षेत्रों में व्यावसायिक, औद्योगिक और संस्थागत उपयोग वाले भवनों को टैक्स के दायरे में रखने का प्रस्ताव है। भवन के प्रकार और उसके इस्तेमाल के आधार पर सालाना 100 रुपये से लेकर 5 हजार रुपये तक कर या शुल्क लगाया जा सकता है।
इसके अलावा पेशा शुल्क की भी व्यवस्था प्रस्तावित की गई थी। बड़ी चावल मिल, सिनेमा हॉल, विवाह भवन, होटल, पेट्रोल पंप, रसोई गैस एजेंसी और ईंट-चिमनी जैसी व्यावसायिक गतिविधियों से पंचायतों को राजस्व दिलाने की योजना है।पेट्रोल पंप और रसोई गैस एजेंसी जैसी कुछ व्यावसायिक इकाइयों पर सालाना 5 हजार रुपये तक शुल्क प्रस्तावित था। हालांकि, संशोधन के दौरान कुछ शुल्क की दरों में भी बदलाव या कमी की संभावना जताई जा रही है।
अब नजर पंचायती राज विभाग की अधिसूचना पर
कुल मिलाकर सरकार अब ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ती दिख रही है जिसमें गांव के आम परिवारों के घरों को टैक्स से राहत मिले, जबकि व्यापारिक और व्यावसायिक गतिविधियों से पंचायतों की आय बढ़ाई जा सके। अगर प्रस्तावित संशोधन को मंजूरी मिलती है और नई अधिसूचना जारी होती है, तो बिहार के ग्रामीण परिवारों के लिए यह बड़ी राहत होगी। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि होल्डिंग टैक्स हटाने की तैयारी की खबर सामने आई है, लेकिन अंतिम फैसला अभी आधिकारिक अधिसूचना पर निर्भर है।
इसलिए ग्रामीण मकान मालिकों की नजर अब पंचायती राज विभाग की अगली अधिसूचना पर टिकी है। जैसे ही सरकार की ओर से संशोधित नियम जारी होंगे, यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगा कि किस तरह के मकान और कौन-कौन से शुल्क नई व्यवस्था के दायरे में आएंगे।





