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बिहार में तीर्थयात्रियों के लिए बड़ी सौगात: 60 धार्मिक स्थलों तक चलेंगी हाई-टेक बसें, इस तारीख से आवेदन शुरू

बिहार सरकार ने तीर्थयात्रियों को बड़ी सौगात देते हुए 60 धार्मिक स्थलों को हाई-टेक बस सेवा से जोड़ने का फैसला किया है। 15 मार्च से आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी और इलेक्ट्रिक व सीएनजी बसों के संचालन की तैयारी शुरू हो चुकी है।

बिहार में तीर्थयात्रियों के लिए बड़ी सौगात: 60 धार्मिक स्थलों तक चलेंगी हाई-टेक बसें, इस तारीख से आवेदन शुरू
Tejpratap
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Bihar News: बिहार सरकार ने श्रद्धालुओं को बड़ी सौगात देते हुए राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों को आधुनिक बस सेवा से जोड़ने की योजना बनाई है। परिवहन विभाग के इस फैसले से अब तीर्थ यात्राएं पहले की तुलना में अधिक सुगम और सुविधाजनक हो जाएंगी। पहले चरण में 60 से अधिक छोटे-बड़े धार्मिक स्थलों को हाई-टेक बसों के माध्यम से जोड़ा जाएगा। इन रूटों के लिए आवेदन प्रक्रिया 15 मार्च से शुरू होगी और जल्द ही बसों का संचालन प्रारंभ करने की तैयारी है।


राज्य के जिन प्रमुख स्थलों को इस योजना से लाभ मिलेगा, उनमें बाबा धाम, विष्णुपद मंदिर (गया जी) और जानकी मंदिर जैसे पवित्र धाम शामिल हैं। अब श्रद्धालुओं को इन स्थानों तक पहुंचने के लिए निजी वाहनों या महंगे साधनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।


इस योजना की सबसे खास बात यह है कि बसें अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होंगी और पर्यावरण के अनुकूल इलेक्ट्रिक तथा सीएनजी मोड पर चलेंगी। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए इनमें जीपीएस ट्रैकिंग, ऑनलाइन टिकट बुकिंग और आरामदायक सीटों जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।


परिवहन विभाग ने इस परियोजना को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत लागू करने का निर्णय लिया है। 15 मार्च के बाद इच्छुक ऑपरेटरों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। उम्मीद है कि मार्च के अंतिम सप्ताह या अप्रैल की शुरुआत तक इन रूटों पर बसों का ट्रायल शुरू हो जाएगा।


पहले चरण में पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, बांका, वैशाली, सीतामढ़ी, दरभंगा और भोजपुर जैसे जिलों से बसों का परिचालन शुरू किया जाएगा। इन जिलों के प्रमुख मंदिरों और ऐतिहासिक स्थलों को आपस में जोड़ने के लिए विशेष रूट तैयार किए गए हैं। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से न केवल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि तीर्थयात्रा का अनुभव भी अधिक शांत और सुखद बनेगा।


दूसरे चरण में राज्य के अन्य छोटे धार्मिक केंद्रों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। सरकार की यह पहल न केवल श्रद्धालुओं के लिए लाभकारी साबित होगी, बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी नई दिशा देगी और बिहार के पर्यटन मानचित्र को सशक्त बनाएगी।

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