Bihar News : बिहार में अब लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थापित करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर इसकी घोषणा की। मुख्यमंत्री के इस ऐलान के बाद बिहार में एक बार फिर सरदार पटेल की विरासत और उनके योगदान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस घोषणा को राज्य के लिए एक बड़ी पहल के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि प्रतिमा का निर्माण बिहार के किस जिले में होगा, इसकी ऊंचाई कितनी होगी और इस पूरी परियोजना पर कितना खर्च आएगा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शनिवार को पटना के बापू सभागार में आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। साझी विरासत अभियान की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने बिहार में सरदार पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थापित करने का ऐलान किया। उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच भी इस प्रस्ताव को लेकर उत्सुकता देखने को मिली।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सरदार पटेल को देश के सबसे मजबूत गृह मंत्रियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को 2047 तक विकसित और आर्थिक रूप से सशक्त राष्ट्र बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सरदार पटेल के सपनों को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किए हैं। उनके मुताबिक, देश की एकता और मजबूती के लिए सरदार पटेल का योगदान हमेशा याद किया जाएगा।
सरदार पटेल की प्रतिमा को लेकर मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद गुजरात के केवड़िया स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की चर्चा भी स्वाभाविक रूप से शुरू हो गई है। गुजरात में स्थापित इस प्रतिमा की ऊंचाई 182 मीटर है और इसे दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा के रूप में पहचान मिली है। अब बिहार में भी सरदार पटेल की सबसे ऊंची मूर्ति स्थापित करने के ऐलान ने लोगों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। हालांकि, बिहार में प्रस्तावित प्रतिमा की वास्तविक ऊंचाई को लेकर अभी कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि बिहार की यह परियोजना किस स्तर की होगी।
सरदार वल्लभभाई पटेल का नाम भारतीय इतिहास में देश की एकता और अखंडता के सबसे बड़े प्रतीकों में शामिल है। आजादी के बाद जब देश के सामने सैकड़ों रियासतों को एकजुट करने की चुनौती थी, तब पटेल ने अपनी राजनीतिक कुशलता और दृढ़ इच्छाशक्ति से इस कठिन काम को अंजाम दिया था। उनके प्रयासों से अलग-अलग रियासतों का भारतीय संघ में विलय संभव हुआ और एक मजबूत राष्ट्र की नींव तैयार हुई। इसी ऐतिहासिक भूमिका के कारण उन्हें लौह पुरुष कहा जाता है। हर साल 31 अक्टूबर को उनकी जयंती राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है।
इस मौके पर बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने भी सरदार पटेल के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता को मजबूत बनाने में सरदार पटेल का योगदान अतुलनीय और अविस्मरणीय है। स्वतंत्रता के बाद अनेक रियासतों का एकीकरण कर उन्होंने सशक्त और अखंड भारत की नींव रखी थी। पटना स्थित अशोक कन्वेंशन केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने यह बातें कहीं।
इससे पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटेल जयंती के अवसर पर पटना के चितकोहरा पुल के निकट पटेल चौक स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। इस राजकीय समारोह में उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी, विजय सिन्हा, डॉ. दिलीप जायसवाल, रामकृपाल यादव, शीला कुमारी और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार समेत कई नेता और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब लोगों की नजर सरकार के अगले कदम पर रहेगी। प्रतिमा के निर्माण के लिए स्थान का चयन, बजट, डिजाइन और निर्माण की समयसीमा जैसे पहलुओं पर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। यदि इस प्रस्ताव को धरातल पर उतारा जाता है, तो बिहार को सरदार पटेल के नाम पर एक नया ऐतिहासिक स्मारक मिल सकता है। साथ ही यह पर्यटन के लिहाज से भी राज्य की पहचान को नई मजबूती दे सकता है। फिलहाल मुख्यमंत्री के ऐलान ने इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर उम्मीदें जरूर बढ़ा दी हैं।





