1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Sat, 31 Jan 2026 04:52:51 PM IST
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Bihar News: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को लेकर शिक्षा विभाग अब सख्त हो गया है। योजना के तहत एजुकेशन लोन के लिए लगातार बढ़ते आवेदनों को देखते हुए विभाग ने निजी शिक्षण संस्थानों की भौतिक और स्थलीय जांच कराने का आदेश दिया है।
विभाग को आशंका है कि योजना के नाम पर कहीं सरकारी राशि के दुरुपयोग की संभावना हो सकती है। पहले चरण में पटना, वैशाली, मुजफ्फरपुर, मधुबनी, रोहतास और औरंगाबाद के कुल 15 निजी शिक्षण संस्थानों की जांच कराई जाएगी। सभी जांच रिपोर्ट संबंधित जिलों को एक पखवाड़े के भीतर सौंपनी होगी।
इस संबंध में बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के प्रभारी पदाधिकारी नसीम अहमद ने सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को पत्र जारी किया है। पत्र में बताया गया है कि शैक्षणिक सत्र 2024-25 में जहां लक्ष्य 85 हजार आवेदन का था, वहीं 99,357 आवेदन प्राप्त हुए। वहीं शैक्षणिक सत्र 2025-26 में 27 जनवरी तक लक्ष्य 95,220 के मुकाबले 1,15,423 आवेदन आ चुके हैं।
आवेदनों की समीक्षा में यह भी सामने आया है कि बीते वर्षों की तुलना में लगभग सभी संस्थानों में नामांकन में अचानक वृद्धि हुई है। इसी को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग ने समान और पारदर्शी जांच प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया है।
जांच के लिए गठित कमेटी की अध्यक्षता जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (योजना एवं लेखा) सह नोडल पदाधिकारी करेंगे। कमेटी में जिला निबंधन सह परामर्श केंद्र के प्रबंधक और बिहार राज्य वित्त निगम के सहायक प्रबंधक को सदस्य बनाया गया है।
पहले चरण में जिन संस्थानों में नामांकन में विसंगति की आशंका जताई गई है, उनमें पटना के मगध प्रोफेशनल इंस्टीट्यूट, ऑक्सफोर्ड कॉलेज ऑफ रिसर्च एंड मैनेजमेंट, चैतन्य कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, आरएस विद्यापीठ, एबीसी कॉलेज ऑफ एजुकेशन, नोवा मैनेजमेंट कॉलेज और हिमालया कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल एजुकेशन (पालीगंज) शामिल हैं।
इसके अलावा मुजफ्फरपुर, वैशाली, मधुबनी, औरंगाबाद और रोहतास के कई अन्य संस्थानों में भी जांच की जाएगी। जांच के दौरान संस्थानों के संबंधन दस्तावेज, सरकारी अनुमति, पाठ्यक्रम, नामांकन और उपस्थिति रिकॉर्ड की जांच होगी। साथ ही पिछले दो वर्षों के फीस स्ट्रक्चर, कक्षाएं, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, कंप्यूटर लैब और सेमिनार हॉल की जियो-टैग्ड तस्वीरें ली जाएंगी। शिक्षकों की योग्यता की जांच के साथ-साथ छात्रों से सीधा फीडबैक भी लिया जाएगा। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में पारदर्शिता और ईमानदारी से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।