1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 12 Jan 2026 10:08:50 AM IST
- फ़ोटो
Sleeper bus Bihar : बिहार में स्लीपर बसों के संचालन और सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने अब सख्त रुख अपना लिया है। परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने साफ शब्दों में कहा है कि सीटर बसों को अवैध रूप से स्लीपर या मिक्स्ड सीटर-स्लीपर में बदलकर चलाने वाले ऑपरेटरों का परमिट तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। यह फैसला लगातार बढ़ रही शिकायतों और हाल के दिनों में स्लीपर बसों में आग लगने की घटनाओं के बाद लिया गया है। सरकार का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अवैध बस मॉडिफिकेशन पर पूरी तरह रोक लगाना है।
जांच में यह सामने आया कि कई बसें सीटर परमिट पर पंजीकृत हैं, लेकिन उन्हें अंदर से स्लीपर मोड में बदलकर चलाया जा रहा है। इससे न केवल नियमों का उल्लंघन हो रहा है बल्कि यात्रियों की जान को भी गंभीर खतरा है। ऐसी बसों में फायर सेफ्टी, इमरजेंसी एग्जिट, ओवरलोडिंग और सुरक्षा उपकरणों की कमी जैसी समस्याएं पाई गई हैं। खासकर कटिहार–सिलीगुड़ी रूट पर चलने वाली ओवरनाइट बसों में इस तरह की गड़बड़ियां अधिक देखने को मिली हैं।
परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई केवल बस ऑपरेटरों तक सीमित नहीं होगी। नियम तोड़ने में शामिल आरटीओ अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जाएंगे। सरकार का मानना है कि बिना प्रशासनिक मिलीभगत के यह अवैध मॉडिफिकेशन संभव नहीं है।
स्लीपर बस निर्माण पर भी नया नियम लागू किया गया है। अब स्लीपर बसें केवल मान्यता प्राप्त ऑटोमोबाइल कंपनियों या केंद्र सरकार से स्वीकृत फैक्ट्रियों में ही बनाई जा सकती हैं। लोकल और अनधिकृत बॉडी बिल्डरों द्वारा स्लीपर कोच बनाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसका उद्देश्य बसों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करना है।
सुरक्षा बढ़ाने के लिए अब हर स्लीपर बस में फायर डिटेक्शन सिस्टम और ड्राइवर की थकान या नींद की स्थिति पहचानने के लिए एआई आधारित ड्राउजिनेस अलर्ट सिस्टम अनिवार्य होगा। अगर ड्राइवर को झपकी आएगी तो तुरंत अलार्म बजेगा। मौजूदा स्लीपर बसों में भी फायर डिटेक्टर, इमरजेंसी एग्जिट हैमर, इमरजेंसी लाइटिंग और ड्राइवर अलर्ट सिस्टम लगाना अनिवार्य है।
परिवहन मंत्री ने कहा कि अब स्लीपर बसों का निर्माण, निरीक्षण और संचालन केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली 1989 के नियम 126 और AIS-119 व AIS-052 मानकों के अनुसार ही किया जाएगा। बर्थ का तय आकार, इमरजेंसी निकास और सुरक्षा उपकरणों की जांच अनिवार्य होगी। यह कदम यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अवैध मॉडिफिकेशन पर लगाम लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
इस नीति से बिहार में स्लीपर बस सेवा अब सख्त सुरक्षा मानकों के तहत संचालित होगी और यात्रियों को सुरक्षित यात्रा का भरोसा मिलेगा। सरकार ने साफ किया है कि नियम उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और यात्री सुरक्षा सर्वोपरि रहेगी। यह कदम बिहार में बस संचालन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।