1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sun, 01 Feb 2026 02:21:08 PM IST
Road Accident - फ़ोटो AI PHOTO
Road Accident : बिहार में एक ही जगह बार-बार होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को अब गंभीरता से खत्म करने की तैयारी है। राज्य सरकार ने सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ा और ठोस एक्शन प्लान तैयार किया है, जिसका सीधा मकसद जान-माल के नुकसान को न्यूनतम करना है। परिवहन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल दुर्घटनाओं की रिपोर्ट बनाकर फाइल बंद नहीं की जाएगी, बल्कि तय समयसीमा में मौके पर सुधार कार्य अनिवार्य रूप से पूरा किया जाएगा।
परिवहन विभाग के अनुसार, बिहार में सड़क दुर्घटनाओं का बड़ा कारण ब्लैक स्पॉट हैं, यानी ऐसे स्थान जहां बार-बार हादसे होते हैं। इन ब्लैक स्पॉट की अब नए सिरे से पहचान की जाएगी। विभाग ने लक्ष्य तय किया है कि अप्रैल 2026 तक राज्य की सभी सड़कों को अंतरराष्ट्रीय सड़क सुरक्षा मानकों के अनुरूप दुरुस्त कर लिया जाएगा। इसके लिए समयबद्ध और रिजल्ट ओरिएंटेड रणनीति बनाई गई है।
विभाग का कहना है कि जैसे ही किसी सड़क को दुर्घटना संभावित स्थल या ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हित किया जाएगा, वहां अधिकतम 15 दिनों के भीतर जरूरी सुधार कार्य पूरा करना अनिवार्य होगा। इसमें सड़क की डिजाइन में बदलाव, साइन बोर्ड, स्पीड ब्रेकर, लाइटिंग, डिवाइडर, रोड मार्किंग और विजिबिलिटी सुधार जैसे उपाय शामिल होंगे। अब लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
विशेष टीमों का गठन
ब्लैक स्पॉट पर त्वरित कार्रवाई के लिए विशेष टीमों का गठन किया जाएगा। इन टीमों में परिवहन विभाग, सड़क निर्माण विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारी शामिल होंगे। हर टीम को स्पष्ट जिम्मेदारी दी जाएगी ताकि सुधार कार्य में देरी न हो। जिला प्रशासन पूरे प्रक्रिया की निगरानी करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि एक ही जगह दोबारा हादसे न हों।
पटना-वैशाली में 59 ब्लैक स्पॉट चिन्हित
अधिकारियों के मुताबिक, पटना और वैशाली जिलों में अब तक 59 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए जा चुके हैं। इन स्थानों पर जल्द से जल्द सुधार कार्य पूरा करने पर सहमति बन गई है। इसके अलावा गया, जहानाबाद, पूर्णिया, सीतामढ़ी, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, शिवहर, छपरा और मोतिहारी जैसे जिलों में भी नए ब्लैक स्पॉट की पहचान और सुधार का काम तेज कर दिया गया है।
हाइवे पर अस्पतालों की जानकारी
सड़क हादसों के बाद घायलों को तुरंत इलाज मिल सके, इसके लिए राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर विशेष साइनेज लगाए जाएंगे। इन साइन बोर्ड पर नजदीकी सरकारी और निजी अस्पतालों का नाम और उनकी सटीक दूरी लिखी होगी। जिला प्रशासन निजी अस्पतालों से समन्वय कर इस व्यवस्था को लागू करेगा, ताकि आपात स्थिति में समय की बर्बादी न हो और घायल की जान बचाई जा सके।
गुड सेमेरिटन को मिलेगा संरक्षण
सरकार ने साफ किया है कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले नेक दिल मददगारों यानी ‘गुड सेमेरिटन’ को पूरी सुरक्षा दी जाएगी। उनसे पुलिस किसी तरह की पूछताछ नहीं करेगी और न ही उन्हें कानूनी झंझट में फंसाया जाएगा। इसके अलावा इलाज के दौरान पैसों की कमी के कारण किसी भी घायल का उपचार रोका नहीं जाएगा। एंबुलेंस सेवाओं को अलर्ट मोड में रखा जाएगा और किसी भी तरह की देरी को गंभीरता से लिया जाएगा।
हर हादसे के बाद बनेगी विस्तृत रिपोर्ट
हर सड़क दुर्घटना के बाद गठित टीम मौके की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। इस रिपोर्ट में हादसे के कारण, सड़क की स्थिति और जरूरी सुधार उपायों का स्पष्ट उल्लेख होगा। जिला प्रशासन इसकी नियमित समीक्षा करेगा ताकि सुधार के बाद दोबारा वही स्थिति पैदा न हो।
कुल मिलाकर, बिहार सरकार का यह एक्शन प्लान सड़क सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अगर यह योजना तय समय पर प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो राज्य में सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े में उल्लेखनीय कमी आ सकती है और हजारों लोगों की जान बचाई जा सकेगी।