Bihar News: भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा), बिहार के अध्यक्ष विवेक कुमार सिंह को रेरा अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के क्रियान्वयन सम्बन्धी विषयों पर केंद्र सरकार को परामर्श एवं अनुशंषा करने वाली सर्वोच्च परिषद् - केंद्रीय सलाहकार परिषद्- जो केन्द्रीय मंत्री आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की अध्यक्षता में गठित है, के सदस्य के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका दी गयी है।
इसकी अधिसूचना आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा हाल में अधिसूचित की गयी। अधिसूचना के अनुसार, विवेक कुमार सिंह इस पद पर तीन वर्षों के लिए नामित किये गए हैं। वर्ष 2017 में राज्य में प्राधिकरण के गठन के पश्चात ऐसा पहली बार हुआ है कि रेरा बिहार के अध्यक्ष को केंद्रीय सलाहकार परिषद् का सदस्य बनाया गया है।
केंद्रीय सलाहकार परिषद् का गठन रेरा अधिनियम की धारा 41 के अनुरूप किया जाता है एवं इसके अध्यक्ष आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री होते हैं। अधिनियम की धारा 42 में परिषद् के मुख्य कार्यों का वर्णन है जिसके अनुसार परिषद् केंद्र सरकार को रेरा अधिनियम के लागू करने से सम्बंधित सभी बिन्दुओं, नीतिगत विषयों, घर खरीददारों के हितों की रक्षा से सम्बंधित उपाय, भू-सम्पदा प्रक्षेत्र का विकास एवं अन्य सम्बंधित विषयों पर केंद्र सरकार को सलाह देती है।
यहाँ यह बता देना जरूरी है कि केंद्र सरकार ने रेरा बिहार द्वारा प्रारंभ की गयी कई गतिविधियों की सराहना की है एवं अन्य राज्यों के रेरा को ऐसी गतिविधियां प्रारम्भ करने हेतु परामर्श दिया है। रेरा बिहार देश का पहला ऐसा प्राधिकरण है जहाँ सिपीग्राम्स (CPGRAMS) में प्राप्त आवेदन को शिकायतवाद में बदलने हेतु आवेदनकर्ता की मदद की जाती है । रेरा बिहार द्वारा सॅटॅलाइट चित्रों के माध्यम से रेरा कानून का उलंघन करने वालों की पहचान एवं कार्रवाई की भी राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंषा की गयी हैं।
दूसरे राज्यों के प्राधिकरण ने रेरा बिहार द्वारा प्रोजेक्ट्स एवं प्रमोटरों की रैंकिंग प्रणाली अपनाने में दिलचस्पी दिखाई है। केंद्रीय सलाहकार परिषद् के सदस्य बनाये जाने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए, अध्यक्ष विवेक कुमार सिंह ने कहा कि यह वस्तुतः घर खरीददारों के हितों की रक्षा के साथ-साथ भू-सम्पदा प्रक्षेत्र के विकास हेतु किये गए कार्यों के लिए पूरे राज्य को दिया गया सम्मान है। उन्होंने आगे बताया कि यह गर्व का विषय तो है ही, साथ ही पूरे देश में भू-सम्पदा क्षेत्र के विकास हेतु एक वृहत्तर दायित्व भी है।



