BIHAR NEWS : बिहार में पुलिसिंग व्यवस्था को और अधिक संवेदनशील और समावेशी बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। अब राज्य के सभी पुलिस थानों में स्थापित महिला सहायता डेस्क सिर्फ महिलाओं की ही नहीं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों और ट्रांसजेंडर समुदाय की शिकायतों को भी सुनेगी और उनके समाधान की दिशा में काम करेगी। इस बात की जानकारी बिहार पुलिस मुख्यालय स्थित सरदार पटेल भवन में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग) अमित कुमार जैन ने दी।
उन्होंने बताया कि राज्य के कुल 855 पुलिस थानों में महिला सहायता डेस्क पहले से ही सक्रिय है, लेकिन अब इसके दायरे को बढ़ाते हुए इसे और अधिक व्यापक जिम्मेदारी दी गई है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य समाज के उन वर्गों तक पुलिस की पहुंच को मजबूत करना है, जो अक्सर अपनी समस्याओं को लेकर सीधे थाने तक नहीं पहुंच पाते हैं या जिनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जाता।
एडीजी अमित कुमार जैन ने कहा कि बुजुर्ग नागरिकों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को कई बार सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर भेदभाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे में महिला सहायता डेस्क उनके लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद मंच के रूप में काम करेगी, जहां वे बिना किसी झिझक के अपनी बात रख सकेंगे।
प्रेस वार्ता में उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए शुरू की गई “अभया ब्रिगेड” योजना का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। इस योजना के तहत जनवरी से मार्च 2026 के बीच 405 ऐसे मामलों में कार्रवाई की गई, जहां छेड़छाड़ या उत्पीड़न की घटनाएं सामने आई थीं। इनमें से 11 मामलों में एफआईआर दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया है।
अभया ब्रिगेड के विस्तार की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस यूनिट को और मजबूत किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार ने 1500 नई स्कूटी खरीदने की मंजूरी दे दी है, जिससे पुलिसकर्मी तेजी से संवेदनशील क्षेत्रों में पहुंचकर कार्रवाई कर सकेंगे। यह कदम विशेष रूप से स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाली छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बिहार पुलिस ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़े मामलों की जांच प्रक्रिया में भी तेजी लाई है। एडीजी के अनुसार, वर्ष 2025 के अंत तक ऐसे कुल 5010 मामले लंबित थे, लेकिन फरवरी 2026 तक इनकी संख्या घटकर 4870 रह गई है। यानी 140 मामलों का निपटारा किया गया है। यह सुधार पुलिस की जांच प्रणाली में आई तेजी और गंभीरता को दर्शाता है।
इसके अलावा मानव तस्करी जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए बिहार पुलिस ने विशेष अभियान भी चलाया है। “नया सवेरा 2.0” नामक यह अभियान 1 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक पूरे राज्य में चलाया गया। इस दौरान मानव तस्करी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर कार्रवाई की गई और कई मामलों की पहचान कर उन्हें आगे की जांच में शामिल किया गया।
एडीजी अमित कुमार जैन ने कहा कि बिहार पुलिस का उद्देश्य केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग को सुरक्षा और सम्मान देना भी है। उन्होंने कहा कि पुलिस व्यवस्था को और अधिक जनहितैषी बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले समय में महिला सहायता डेस्क को तकनीकी रूप से भी मजबूत किया जाएगा, ताकि शिकायतों का त्वरित निपटारा हो सके और पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सके।
कुल मिलाकर बिहार पुलिस की यह नई पहल राज्य में सामाजिक न्याय, सुरक्षा और संवेदनशील पुलिसिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे कमजोर वर्गों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।





