Bihar Police : 'गलती की तो सस्पेंड होना तय, विभागीय कार्रवाई बोनस में...',पुलिस में नहीं चलेगा "हुड हुड दबंग" वाला स्टाइल; DGP ने दिया यह आदेश

बिहार में पुलिसकर्मियों के दुर्व्यवहार के लगातार सामने आ रहे मामलों पर पुलिस मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाया है। डीजीपी ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर निलंबन और विभागीय कार्रवाई का स्पष्ट संदेश दिया है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 09 Feb 2026 09:44:20 AM IST

Bihar Police : 'गलती की तो सस्पेंड होना तय, विभागीय कार्रवाई बोनस में...',पुलिस में नहीं चलेगा "हुड हुड दबंग" वाला स्टाइल; DGP ने दिया यह आदेश

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Bihar Police : बिहार पुलिस इन दिनों अपराधियों से कम और अपनी छवि से ज्यादा जंग लड़ती दिख रही है। वजह भी साफ है—फील्ड में कुछ पुलिसकर्मियों की दबंगई ने वर्दी की गरिमा को सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है। हालात ऐसे बन गये कि पुलिस मुख्यालय को अब ‘सम्मानजनक व्यवहार’ का पाठ याद दिलाने के साथ-साथ सख्त कार्रवाई का डंडा भी उठाना पड़ा है। बीते 15 दिनों  में करीब आधा दर्जन ऐसे मामले सामने आये, जिनमें पुलिस पदाधिकारी और कर्मियों के ‘दबंग अंदाज’ ने कानून व्यवस्था से ज्यादा सोशल मीडिया की सुर्खियां बटोरीं।


पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने साफ कर दिया है कि दुर्व्यवहार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं होगा। उनका संदेश सीधा और स्पष्ट है—गलती की तो निलंबन तय, और विभागीय कार्रवाई बोनस में। पुलिस मुख्यालय की यह सख्ती कहीं न कहीं उस वायरल दौर का असर है, जहां जनता से पहले वीडियो और फोटो पुलिस की करतूतों की गवाही देने लगते हैं।


नालंदा जिले का मामला इस सूची में सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। यहां थरथरी थानाध्यक्ष आरोपित को गिरफ्तार करने पहुंचे थे, लेकिन गिरफ्तारी से ज्यादा चर्चा आंगनबाड़ी सेविका का बाल खींचने और थप्पड़ मारने के वीडियो की हुई। वीडियो वायरल होते ही पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे। मामले की जांच के बाद एसपी भरत सोनी ने थानाध्यक्ष के निलंबन की प्रक्रिया शुरू कर दी।


पटना में भी पुलिस का ‘एक्शन मोड’ कानून व्यवस्था से ज्यादा कैमरे के सामने नजर आया। बिहटा थाने की महिला दारोगा श्वेता कुमारी रास्ता विवाद सुलझाने पहुंची थीं, लेकिन विवाद सुलझाने के बजाय एक व्यक्ति पर थप्पड़ चला दिया। जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, अनुशासन का डंडा भी सक्रिय हो गया। सिटी एसपी पश्चिमी भानुप्रताप सिंह ने महिला दारोगा को लाइन हाजिर कर अनुशासनहीनता पर स्पष्ट संदेश दे दिया कि वर्दी का मतलब अधिकार जरूर है, लेकिन बेलगाम अधिकार नहीं।


इसी तरह नीट छात्रा मामले में शुरुआती जांच में लापरवाही भी पुलिस पर भारी पड़ गई। चित्रगुप्त नगर थाना प्रभारी रोशनी कुमारी और कदमकुओं के अपर थानाध्यक्ष हेमंत झा को निलंबित कर दिया गया। पीड़ित के परिजनों ने भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाये थे, जिससे मामला और संवेदनशील बन गया।


सारण जिले में तो मामला और भी अलग अंदाज में सामने आया। पुलिस केंद्र में तैनात पीटीसी जवान कन्हैया तिवारी नशे की हालत में महिला परिचारी से दुर्व्यवहार करते पकड़े गये। ब्रेथ एनलाइजर टेस्ट ने नशे की पुष्टि कर दी, जिसके बाद एसएसपी ने जवान को हिरासत में लेकर निलंबित कर दिया। यानी यहां वर्दी से ज्यादा ‘नशे का नूर’ भारी पड़ गया।


दरभंगा में भी पुलिस का गुस्सा सड़क पर उतर आया। गलत दिशा में घुसी कार के ड्राइवर के साथ गाली-गलौज और मारपीट की घटना सामने आई। कार की पिछली सीट पर बैठी महिला डॉक्टर ने पूरी घटना का वीडियो बना लिया। वीडियो वायरल होते ही पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गये।


इन घटनाओं के बाद पुलिस मुख्यालय ने साफ समझ लिया कि अपराधियों पर नकेल कसने से पहले अपने सिस्टम को दुरुस्त करना भी जरूरी है। इसी को लेकर कई निर्देश जारी किये गये हैं। पिछले साल थानों में दलालों की एंट्री पर रोक लगाने का आदेश दिया गया था। साथ ही विजिटर रजिस्टर में आने-जाने वालों का पूरा ब्योरा दर्ज करने की व्यवस्था लागू की गयी। ड्यूटी के दौरान अनावश्यक मोबाइल चलाने वाले पुलिसकर्मियों को भी चेतावनी दी गयी है। इतना ही नहीं, पुलिसकर्मियों को सरकारी नंबर की व्हाट्सएप डीपी में वर्दी वाली फोटो लगाने का निर्देश भी दिया गया है। यानी अब पहचान भी पक्की और जिम्मेदारी भी तय।


कुल मिलाकर बिहार पुलिस अब ‘दबंग स्टाइल’ से ‘डिसिप्लिन स्टाइल’ की ओर बढ़ने की कोशिश में दिख रही है। हालांकि सवाल यह जरूर है कि यह सख्ती सिर्फ वायरल वीडियो तक सीमित रहेगी या वाकई व्यवहार में बदलाव भी दिखेगा। फिलहाल इतना तय है कि वर्दी का रौब दिखाने वालों के लिए अब विभाग का डंडा भी पूरी तैयारी में खड़ा है।