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Bihar Exam Scam : बिहार पेपर लीक मामलों में ED की एंट्री, अब परीक्षा माफियाओं के पैसों और संपत्ति की होगी जांच

पेपर लीक करने वालों की सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, अब कथित अवैध कमाई और संपत्ति का हिसाब भी खंगाला जा सकता है। TRE-3, CHO और AEDO समेत परीक्षा धांधली के मामलों पर जानिए पूरी कहानी।

Bihar Exam Scam
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Tejpratap
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पटना: बिहार में भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और कथित परीक्षा धांधली के मामलों को लेकर जांच का दायरा अब बढ़ता नजर आ रहा है। अब जांच सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी और पेपर लीक के तरीके तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इस पूरे नेटवर्क से जुड़े पैसों के लेन-देन और कथित अवैध कमाई की भी पड़ताल की जा सकती है। इसी कड़ी में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की भूमिका चर्चा में है।


जानकारी के मुताबिक, बिहार में 2024 के बाद हुई कई भर्ती परीक्षाओं में सामने आई गड़बड़ियों से संबंधित मामलों की जानकारी आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU की ओर से केंद्रीय एजेंसियों तक पहुंचाई गई है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि पेपर लीक के पीछे कौन लोग सक्रिय थे और इस नेटवर्क को चलाने के लिए कितनी रकम का इस्तेमाल किया गया।


पेपर लीक के पीछे कितना बड़ा आर्थिक नेटवर्क?

भर्ती परीक्षा में पेपर लीक होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि इसके पीछे सिर्फ कुछ लोग हैं या फिर इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है। जांच एजेंसियां अब इसी पहलू पर ज्यादा ध्यान दे सकती हैं। अगर पेपर लीक से जुड़े मामलों में अपराध से अर्जित धन का कोई लिंक सामने आता है, तो उसके स्रोत से लेकर अंतिम इस्तेमाल तक की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। अभ्यर्थियों से कथित तौर पर पैसा किसने लिया, रकम किसके खाते में पहुंची, किन लोगों के बीच उसका बंटवारा हुआ और बाद में उस पैसे का इस्तेमाल कहां किया गया—इन सवालों के जवाब तलाशे जा सकते हैं।


TRE-3 मामले ने बढ़ाई चिंता

बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-3 में पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित कराया गया था। इस मामले में बड़ी संख्या में लोगों की गिरफ्तारी हुई और जांच एजेंसियों ने कथित पेपर लीक नेटवर्क की कई कड़ियों को खंगाला। इस मामले में परीक्षा माफिया के तौर पर चर्चा में रहे संजीव मुखिया से जुड़े नेटवर्क की भूमिका भी जांच के केंद्र में रही है। अब आर्थिक पहलू की जांच आगे बढ़ती है तो कथित तौर पर इस नेटवर्क से जुड़े पैसों के लेन-देन की तस्वीर भी सामने आ सकती है।


NEET मामले में भी आर्थिक पहलू अहम

NEET 2024 को लेकर भी बिहार में परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं का मामला सामने आया था। इस प्रकरण की जांच में कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हुई। अब यदि इस मामले में किसी संगठित आर्थिक नेटवर्क का प्रमाण मिलता है तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।


CHO और AEDO परीक्षा भी सवालों के घेरे में

कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। इसी तरह AEDO भर्ती परीक्षा भी पेपर लीक के आरोपों के कारण जांच के घेरे में आई। दोनों मामलों में गिरफ्तारियां हुई हैं और जांच एजेंसियां कथित नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। इन मामलों में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि अगर पेपर लीक के बदले पैसे लिए गए थे, तो वह रकम कहां गई। जांच आगे बढ़ने पर बैंक खातों, संपत्ति और दूसरे वित्तीय लेन-देन की पड़ताल भी महत्वपूर्ण हो सकती है।


संपत्ति पर भी हो सकती है कार्रवाई

पेपर लीक से जुड़े मामलों में अगर किसी आरोपी की संपत्ति और कथित अपराध से अर्जित रकम के बीच संबंध सामने आता है, तो ऐसी संपत्ति भी जांच के दायरे में आ सकती है। यानी परीक्षा माफियाओं के लिए परेशानी सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहने वाली है। जांच एजेंसियों का फोकस कथित तौर पर उस पूरे नेटवर्क पर हो सकता है, जिसमें पेपर उपलब्ध कराने से लेकर अभ्यर्थियों से रकम जुटाने और पैसे को अलग-अलग जगह पहुंचाने तक की भूमिका शामिल है।


छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ पर कड़ा संदेश

पेपर लीक का सबसे बड़ा असर उन छात्रों पर पड़ता है, जो महीनों और वर्षों तक मेहनत करके भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। परीक्षा में गड़बड़ी होने से न सिर्फ अभ्यर्थियों का समय और पैसा बर्बाद होता है, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो जाते हैं। ऐसे में अगर जांच एजेंसियां पेपर लीक के आर्थिक नेटवर्क तक पहुंचने में सफल होती हैं, तो परीक्षा माफियाओं पर कार्रवाई और मजबूत हो सकती है। अब आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि जांच में कौन-कौन से नाम सामने आते हैं और कथित पेपर लीक से जुड़े पैसों का नेटवर्क कितनी दूर तक फैला हुआ है।