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Bihar Panchayat News : ट्रांसफर के बहाने पिछले दरवाजे से नौकरी का खेल? सूची में शामिल हुए ऐसे नाम, जो पंचायत सचिव हैं ही नहीं!

बिहार पंचायती राज विभाग की पंचायत सचिव ट्रांसफर सूची में मृत, नौकरी छोड़ चुके, निलंबित और संदिग्ध कर्मचारियों के नाम होने का आरोप। तीन नामों को लेकर जांच और टीआई परेड की मांग।

Bihar Panchayat News : ट्रांसफर के बहाने पिछले दरवाजे से नौकरी का खेल? सूची में शामिल हुए ऐसे नाम, जो पंचायत सचिव हैं ही नहीं!
Tejpratap
Tejpratap
7 मिनट

पटना: बिहार के पंचायती राज विभाग में पंचायत सचिवों के तबादले की सूची ने ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है, जिसका जवाब ढूंढते-ढूंढते प्रशासनिक महकमे के पसीने छूट सकते हैं। आरोप है कि तबादले की प्रक्रिया में ऐसे नाम भी शामिल कर दिए गए हैं, जो राज्य में पंचायत सचिव के रूप में कहीं कार्यरत ही नहीं हैं। मामला सिर्फ इतना नहीं है कि किसी कर्मचारी का नाम गलत लिख दिया गया हो, बल्कि पंचायत सचिव संघ का दावा है कि तीन ऐसे नाम ट्रांसफर सूची में शामिल हैं, जिनके नाम के पंचायत सचिव पूरे बिहार में हैं ही नहीं। अब सवाल उठ रहा है—जब कर्मचारी हैं ही नहीं, तो उनका ट्रांसफर किस पद से और किस पद पर कर दिया गया? क्या तबादला सूची अब नियुक्ति का नया रास्ता बन गई है?

2248 पंचायत सचिवों के तबादले की प्रक्रिया, लेकिन सूची में ‘गायब’ कर्मचारी

पंचायती राज विभाग को कुल 2248 पंचायत सचिवों का तबादला करना है। अब तक 1645 पंचायत सचिवों का ट्रांसफर किया जा चुका है, जबकि करीब 600 कर्मचारियों का तबादला अभी बाकी बताया जा रहा है। इसी प्रक्रिया के दौरान सामने आए तीन नामों ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है। पंचायत सचिव संघ का आरोप है कि तबादला सूची में शामिल ये लोग बिहार में पंचायत सचिव के रूप में कार्यरत ही नहीं हैं। संघ इसे पिछले दरवाजे से नई नियुक्ति कराने की कोशिश तक बता रहा है।

सवाल यह भी है कि इतनी बड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया में कर्मचारी की मूल नियुक्ति, वर्तमान पदस्थापन और सेवा रिकॉर्ड की जांच किए बिना ट्रांसफर आदेश कैसे जारी हो गया? क्या फाइलों में कर्मचारी मौजूद हैं और जमीन पर गायब? या फिर जमीन पर कोई नहीं और फाइलों में नई नौकरी की तैयारी चल रही है?

तबादला सूची के ये 3 नाम सवालों के घेरे में

पंचायत सचिव संघ ने तीन नामों को विशेष रूप से संदिग्ध बताया है—

  • क्रमांक 1 पर सुजीत विश्वास, अररिया

  • क्रमांक 761 पर दीपक कुमार, नालंदा

  • क्रमांक 791 पर गणेश कुमार, नवादा

संघ का दावा है कि इन नामों के पंचायत सचिव पूरे राज्य में कहीं कार्यरत नहीं हैं। यही वजह है कि अब इन तीनों की पहचान, नियुक्ति और सेवा रिकॉर्ड को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। संघ की मांग है कि विभाग सार्वजनिक रूप से बताए कि ये कर्मचारी पहले कहां तैनात थे, इनकी नियुक्ति कब हुई और किस प्रक्रिया के तहत हुई। यदि ये कर्मचारी वास्तव में पंचायत सचिव हैं, तो उनके सेवा अभिलेख सामने लाए जाएं।

स्वर्ग सिधारे, इस्तीफा दे चुके और निलंबित कर्मचारियों के भी नाम!

मामला सिर्फ तीन संदिग्ध नामों तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। पंचायत सचिव संघ का आरोप है कि तबादला सूची में स्वर्ग सिधार चुके कर्मचारियों, नौकरी छोड़ चुके कर्मियों और निलंबित कर्मचारियों के नाम भी शामिल हैं। यानी सवाल यह है कि अगर किसी कर्मचारी की मृत्यु हो चुकी है, तो उसका नया कार्यस्थल कौन जॉइन करेगा? जिसने नौकरी छोड़ दी, उसका ट्रांसफर आदेश किसे मिलेगा? और अगर कोई निलंबित है, तो सामान्य तबादले की सूची में उसका नाम कैसे पहुंच गया? यह मामला प्रशासनिक चूक है या सिस्टम के भीतर किसी बड़े खेल की झलक—इसकी जांच अब बेहद जरूरी मानी जा रही है।

वरीयता और दूरी के नियमों की अनदेखी का भी आरोप

संघ ने आरोप लगाया है कि तबादला प्रक्रिया में वरीयता और दूरी से जुड़े नियमों का भी पालन नहीं किया गया। गंभीर बीमारी से जूझ रहे कर्मचारियों और जरूरतमंद महिला कर्मियों के मामलों में भी अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दिए जाने की बात कही गई है। ऐसे में सवाल और बड़ा हो जाता है कि क्या असली कर्मचारी लाइन में खड़े रह गए और सूची में ऐसे नाम आगे निकल गए, जिनकी पहचान पर ही विवाद है?

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से टीआई परेड कराने की मांग

पंचायत सचिव संघ के अध्यक्ष बिरेन्द्र कुमार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर मामले की जांच कराने की मांग की है। संघ ने तीनों संदिग्ध कर्मचारियों की टीआई परेड यानी शिनाख्त कराने की मांग उठाई है। संघ का कहना है कि विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित तीनों लोगों की नियुक्ति कब हुई, वे पहले किस जिले या प्रखंड में तैनात थे और उनका सेवा रिकॉर्ड क्या है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 2 सितंबर तक मामले की जांच नहीं कराई गई, तो वह हाईकोर्ट का रुख करेगा और आपराधिक मामला दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू करेगा।

पंचायत सचिवों की भूमिका इसलिए भी बेहद अहम

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब बिहार में पंचायतों के नए सिरे से परिसीमन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मोड़ पर है। राज्य में 36 साल बाद पंचायतों का पुनर्गठन और परिसीमन हो रहा है। बिहार के करीब 45 हजार राजस्व गांव, जो फिलहाल 8053 पंचायतों में शामिल हैं, भविष्य में करीब 13 हजार संभावित नई पंचायतों का आधार बन सकते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में पंचायत सचिवों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। गांवों को किसी पंचायत से जोड़ने या हटाने और जमीनी स्थिति से संबंधित रिपोर्ट तैयार करने में पंचायत सचिव अहम कड़ी होते हैं।

यही कारण है कि उनके तबादले की सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी सिर्फ विभागीय मामला नहीं रह जाती, बल्कि पंचायत पुनर्गठन की पूरी प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि विभाग इन नामों को महज तकनीकी गलती बताएगा या फिर कोई विस्तृत जांच होगी। क्योंकि मामला गंभीर है—अगर पंचायत सचिव मौजूद नहीं हैं तो उनका ट्रांसफर किसका हुआ? और अगर वे मौजूद हैं, तो अब तक विभाग और संघ की नजरों से छिपे कैसे रहे? फिलहाल बिहार के पंचायती राज विभाग की ट्रांसफर सूची पर सबसे बड़ा सवाल यही है—यह तबादला है, प्रशासनिक भूल है या पिछले दरवाजे से किसी नई एंट्री की तैयारी?