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Bihar Panchayat Election 2026 : बिहार में पंचायत चुनाव का बिगुल! 4000+ पंचायतों में बदलेगा आरक्षण, मुखिया-सरपंच सीटों पर बड़ा उलटफेर

बिहार पंचायत चुनाव 2026 अक्टूबर-नवंबर में 9 चरणों में हो सकता है। 4000 से अधिक पंचायतों और 55 हजार वार्डों में आरक्षण बदलेगा। जानें चुनाव की पूरी तैयारी, EVM और नई तकनीक की जानकारी।

Bihar Panchayat Election 2026 : बिहार में पंचायत चुनाव का बिगुल! 4000+ पंचायतों में बदलेगा आरक्षण, मुखिया-सरपंच सीटों पर बड़ा उलटफेर
Tejpratap
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Bihar Panchayat Election 2026 : बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 की तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग अक्टूबर-नवंबर के दौरान पंचायत चुनाव कराने की योजना पर काम कर रहा है। मौजूदा मुखिया, सरपंच और अन्य पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल दिसंबर 2026 तक है, इसलिए उससे पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सुरक्षा बलों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए यह चुनाव उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कराने की तैयारी की जा रही है।


इस बार पंचायत चुनाव नौ चरणों में आयोजित किए जा सकते हैं। आयोग के पास सीमित संख्या में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) उपलब्ध होने के कारण चरणों की संख्या बढ़ाई गई है। वर्तमान में आयोग के पास करीब 32 हजार ईवीएम हैं, जिनका उपयोग रोटेशन सिस्टम के तहत अलग-अलग चरणों में किया जाएगा। मतदान के बाद प्रत्येक मशीन का डेटा सुरक्षित रखने के लिए सिक्योर डिटैचेबल मेमोरी मॉड्यूल (SDMM) का इस्तेमाल किया जाएगा।


पंचायत चुनाव 2011 की जनगणना के आधार पर ही कराए जाएंगे। नई जनगणना के आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए सीटों का आरक्षण और परिसीमन पुराने जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर तय होगा। वार्ड सदस्य से लेकर जिला परिषद तक की सीटों के लिए आरक्षण रोस्टर 2011 की आबादी के अनुपात में लागू किया जाएगा।


राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार अगस्त के अंतिम सप्ताह या सितंबर के पहले पखवाड़े में चुनाव की अधिसूचना जारी की जा सकती है। इससे पहले आरक्षण रोस्टर, जनसंख्या आंकड़ों और परिसीमन से संबंधित दावों एवं आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा। आयोग ने सभी आपत्तियों के समाधान के बाद 21 जून 2026 को अंतिम गजट प्रकाशन का लक्ष्य तय किया है।


इस चुनाव की सबसे बड़ी विशेषता आरक्षण रोस्टर में व्यापक बदलाव होगा। रोटेशन व्यवस्था के तहत चार हजार से अधिक पंचायतों और करीब 55 हजार वार्डों में आरक्षण की स्थिति बदल जाएगी। कई सीटें जो पिछले चुनाव में अनुसूचित जाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग या महिला श्रेणी के लिए आरक्षित थीं, वे अब अन्य वर्गों या सामान्य श्रेणी में जा सकती हैं। बिहार में वर्तमान में 8053 ग्राम पंचायतें, 533 पंचायत समितियां और 38 जिला परिषद कार्यरत हैं। शहरीकरण और नगर निकायों के विस्तार के कारण पंचायतों की संख्या पहले की तुलना में कम हुई है।


तकनीक के स्तर पर भी पंचायत चुनाव 2026 काफी आधुनिक होने वाला है। मल्टी-पोस्ट इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के जरिए मतदाता एक ही बूथ पर विभिन्न पदों के लिए मतदान कर सकेंगे। फर्जी मतदान रोकने के लिए बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली का उपयोग किया जाएगा, जिसमें अंगूठे के निशान और आंखों की पहचान दर्ज की जाएगी।


मतगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR) तकनीक का इस्तेमाल होगा। यह तकनीक ईवीएम के परिणामों को स्कैन कर सीधे सर्वर पर अपलोड करेगी, जिससे त्रुटियों की संभावना कम होगी। इसके अलावा AI आधारित वीडियो एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म ‘जार्विस’ के जरिए मतगणना केंद्रों की निगरानी की जाएगी।


संवेदनशील और अति संवेदनशील मतदान केंद्रों पर लाइव वेबकास्टिंग की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। जिला मुख्यालय और राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारी मतदान प्रक्रिया की रीयल टाइम निगरानी कर सकेंगे। उम्मीदवारों के नामांकन, दस्तावेज सत्यापन, शपथ पत्र और मतदाता जानकारी के लिए डिजिटल पोर्टल और ऑनलाइन सेवाओं को भी सक्रिय किया जाएगा। कुल मिलाकर बिहार पंचायत चुनाव 2026 तकनीक, पारदर्शिता और नए आरक्षण रोस्टर के साथ कई महत्वपूर्ण बदलावों का गवाह बनने जा रहा है।