Bihar Panchayat Chunav : बिहार में पंचायत चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। राज्य में मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2026 के आसपास पूरा होने वाला है। ऐसे में तय समय सीमा के भीतर नए पंचायत चुनाव कराने की तैयारी की जा रही है। चुनाव से पहले पंचायतों के परिसीमन की प्रक्रिया भी अहम होगी। प्रस्तावित परिसीमन में 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जा सकता है।
परिसीमन के बाद बदल सकता है पंचायतों का पूरा गणित
पंचायती राज विभाग के मंत्री दीपक प्रकाश के मुताबिक, पंचायत चुनाव समय पर कराने की कोशिश की जा रही है। परिसीमन के दौरान आबादी के आधार पर पंचायतों और वार्डों का गठन किया जाएगा। इसके चलते कई पंचायतों की सीमाओं और वार्डों की संरचना में बदलाव संभव है।
सबसे बड़ा असर मुखिया पदों की संख्या पर पड़ सकता है। वर्तमान में बिहार में करीब 8,053 मुखिया के पद हैं। परिसीमन के बाद इनकी संख्या बढ़कर करीब 13 हजार तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अंतिम संख्या परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने और आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। अगर मुखिया के पदों की संख्या बढ़ती है तो पंचायत चुनाव में दावेदारों की संख्या भी बढ़ सकती है। गांवों में संभावित प्रत्याशी अभी से अपने स्तर पर राजनीतिक समीकरण और जनसंपर्क मजबूत करने में जुट सकते हैं।
मुखिया का चुनाव लड़ने के लिए कितनी उम्र जरूरी?
अगर आप भी बिहार पंचायत चुनाव 2026 में मुखिया पद के लिए चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं तो सबसे पहले अपनी पात्रता जांचना जरूरी है। पंचायत चुनाव में मुखिया पद के उम्मीदवार की उम्र कम से कम 21 वर्ष होनी चाहिए। 21 वर्ष से कम उम्र का व्यक्ति मुखिया पद के लिए चुनाव नहीं लड़ सकता।
मतदाता सूची में नाम होना जरूरी
मुखिया या पंचायत के किसी अन्य निर्वाचित पद के लिए उम्मीदवार का नाम संबंधित पंचायत की मतदाता सूची में होना जरूरी है। इसके साथ ही उम्मीदवार का भारत का नागरिक होना भी आवश्यक है। इसलिए चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोगों को मतदाता सूची में अपना नाम और संबंधित विवरण पहले से जांच लेना चाहिए।
सरकारी नौकरी करने वाले लड़ सकते हैं चुनाव?
सरकारी कर्मचारी आम तौर पर पंचायत चुनाव में उम्मीदवार नहीं बन सकते। पंचायत के अधीन लाभ का पद रखने वाले व्यक्ति और कुछ सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों के कर्मचारी भी पद पर रहते हुए चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति चुनाव लड़ना चाहता है तो उसे संबंधित पद से त्यागपत्र देने की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि, किसी विशेष मामले में लागू नियमों की पुष्टि आधिकारिक चुनाव नियमों से करना जरूरी है।
गंभीर अपराध में सजा पाने वालों पर भी लागू हो सकती है अयोग्यता
पंचायत चुनाव में आपराधिक मामलों को लेकर भी नियम लागू होते हैं। सक्षम अदालत द्वारा मानसिक रूप से अस्वस्थ घोषित व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता। वहीं, गंभीर अपराध में निर्धारित सजा पाने वाले व्यक्ति पर भी चुनाव लड़ने की अयोग्यता लागू हो सकती है। इसलिए किसी आपराधिक मामले वाले संभावित उम्मीदवार को नामांकन से पहले संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।
आरक्षित सीट पर क्या है नियम?
पंचायत चुनाव में कई पद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षित होते हैं। ऐसे में आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार के लिए संबंधित वर्ग की पात्रता पूरी करना जरूरी होगा। आरक्षण और सीटों की वास्तविक स्थिति परिसीमन तथा आरक्षण रोस्टर जारी होने के बाद स्पष्ट होगी।
चुनाव की तैयारी में जुटे संभावित दावेदार
बिहार में पंचायत चुनाव की तारीख और अंतिम कार्यक्रम की घोषणा राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से की जाएगी। उससे पहले परिसीमन, आरक्षण और मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी होना महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि संभावित प्रत्याशियों की नजर अब पंचायतों के नए परिसीमन और आरक्षण रोस्टर पर टिकी है।




