Bihar MLC Election 2026 : बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की आठ सीटों पर चुनावी तस्वीर अब तेजी से साफ हो रही है। चार स्नातक और चार शिक्षक सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होना है। इन सीटों पर मुकाबला विधानसभा चुनाव से काफी अलग है, क्योंकि यहां मतदाता सीमित हैं और उम्मीदवार की व्यक्तिगत पहचान, संपर्क और अपने-अपने सामाजिक व पेशेवर नेटवर्क की भूमिका अहम मानी जाती है।
दिलचस्प बात यह है कि पार्टियों की ओर से सामने आए और संभावित चेहरों के सामाजिक समीकरण को देखें तो सवर्ण उम्मीदवारों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक दिखाई देती है। उपलब्ध घोषित और संभावित नामों के विश्लेषण में करीब 24 चेहरों की चर्चा है, जिनमें लगभग 14 सवर्ण समुदायों से बताए जा रहे हैं। इसके मुकाबले OBC और EBC वर्ग से आने वाले चेहरों की संख्या कम है। हालांकि, नामांकन की अंतिम प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उम्मीदवारों की आधिकारिक संख्या और सामाजिक प्रतिनिधित्व की अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर और नाम वापसी की तारीख 9 अक्टूबर है।
जन सुराज ने सभी आठ सीटों पर उम्मीदवार उतारकर इस चुनाव को खासा दिलचस्प बना दिया है। पार्टी ने चरणबद्ध तरीके से उम्मीदवारों की घोषणा की और 24 सितंबर को बाकी तीन नामों के साथ अपनी पूरी सूची पूरी की। इनमें पटना स्नातक से अनुज सिंह, तिरहुत स्नातक से डॉ. विमोहन कुमार और तिरहुत शिक्षक से भूषण झा का नाम शामिल है। इससे पहले पार्टी ने पटना शिक्षक, सारण शिक्षक, दरभंगा शिक्षक, कोसी स्नातक और दरभंगा स्नातक सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित किए थे।
जन सुराज के उम्मीदवारों के सामाजिक समीकरण में सवर्ण चेहरों की मौजूदगी प्रमुख है। उपलब्ध सूची के आधार पर पार्टी के आठ उम्मीदवारों में पांच सवर्ण बताए जा रहे हैं। इसके अलावा यादव और मुस्लिम समुदाय से भी उम्मीदवार मैदान में हैं। यानी पार्टी ने सभी सामाजिक समूहों को समान संख्या में प्रतिनिधित्व नहीं दिया है। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि जन सुराज पहली बार आधिकारिक तौर पर विधान परिषद की इन आठ सीटों पर अपना पूरा संगठनात्मक दमखम आजमा रहा है।
RJD की तस्वीर कुछ अलग नजर आती है। पार्टी ने अब तक छह सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए हैं। उपलब्ध नामों में भूमिहार और ब्राह्मण समुदाय से आने वाले उम्मीदवारों के साथ यादव और कुर्मी चेहरे भी शामिल हैं। यानी राजद की सूची में सवर्ण और पिछड़े वर्ग के बीच संतुलन बनाने की कोशिश दिखाई देती है। दो सीटों को लेकर सहयोगी दलों के साथ तालमेल की चर्चा भी चुनावी समीकरण को और दिलचस्प बनाती है। NDA में सीट बंटवारे के तहत JDU चार सीटों पर चुनाव लड़ रही है और पार्टी ने चारों उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। इनमें पटना स्नातक से नीरज कुमार लगातार चौथी बार मैदान में हैं। उपलब्ध सामाजिक समीकरण के मुताबिक JDU के चार उम्मीदवारों में तीन सवर्ण और एक अति पिछड़ा वर्ग से हैं। यानी पार्टी की सूची में भी सवर्ण प्रतिनिधित्व ज्यादा है।
वहीं BJP ने अभी औपचारिक रूप से अपने सभी उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है, लेकिन कई संभावित चेहरों को चुनावी तैयारी में जुटने का संकेत मिल चुका है। पटना शिक्षक सीट पर नवल किशोर यादव और कोसी स्नातक सीट पर एनके यादव के नाम प्रमुखता से सामने आए हैं। दोनों मौजूदा MLC हैं। उपलब्ध संभावित नामों में यादव और राजपूत चेहरे दिखाई दे रहे हैं, जिससे BJP का सामाजिक समीकरण JDU और RJD से कुछ अलग नजर आता है। कांग्रेस की ओर से दरभंगा शिक्षक सीट पर मौजूदा MLC डॉ. मदन मोहन झा का नाम प्रमुख है, जबकि तिरहुत शिक्षक सीट पर CPI के मौजूदा MLC प्रो. संजय कुमार सिंह फिर मैदान में हैं। मौजूदा आठ MLC में BJP, JDU, कांग्रेस, CPI और निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रतिनिधित्व है।
अब सवाल है कि विधानसभा चुनाव में जातीय समीकरण को बेहद गंभीरता से लेने वाली पार्टियां MLC चुनाव में भी उसी फॉर्मूले पर क्यों नहीं चल रहीं? इसकी सबसे बड़ी वजह इन सीटों की मतदाता संरचना है। बिहार जातीय गणना के आंकड़ों के अनुसार सामान्य वर्ग में स्नातक आबादी का अनुपात 13.41 प्रतिशत है, जबकि पिछड़ा वर्ग में यह 6.77 प्रतिशत और अति पिछड़ा वर्ग में 4.27 प्रतिशत बताया गया है। लेकिन सिर्फ जाति के आधार पर उम्मीदवार की जीत तय नहीं होती। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र कई जिलों में फैले होते हैं, जबकि मतदाताओं की संख्या विधानसभा चुनाव के मुकाबले काफी सीमित रहती है। ऐसे में उम्मीदवार को एक-एक मतदाता तक पहुंच बनानी पड़ती है।
पटना स्नातक सीट इसका बड़ा उदाहरण है। नीरज कुमार पिछले तीन चुनाव जीत चुके हैं और अब चौथी बार मैदान में हैं। यह निर्वाचन क्षेत्र पटना, नालंदा और नवादा के बड़े हिस्से में फैला है। लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण उनका व्यक्तिगत नेटवर्क पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। दूसरा उदाहरण तिरहुत स्नातक सीट का है। देवेश चंद्र ठाकुर के सांसद बनने के बाद 2024 में हुए उपचुनाव में निर्दलीय शिक्षक बंशीधर ब्रजवासी ने जीत हासिल की थी। बड़े राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के बीच एक शिक्षक उम्मीदवार की जीत ने यह दिखाया कि इन चुनावों में संगठन के साथ-साथ व्यक्तिगत संपर्क और संबंधित वर्ग में पकड़ भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
यही वजह है कि MLC चुनाव में पार्टियां केवल जातीय गणित नहीं देखतीं। उम्मीदवार की व्यक्तिगत पहचान, मतदाताओं से सीधा संपर्क, शिक्षक संगठनों से रिश्ते, वर्षों की सक्रियता और चुनावी क्षेत्र में नेटवर्क जैसे फैक्टर भी टिकट तय करने में भूमिका निभाते हैं। इस बार उम्मीदवारों की सूची में सवर्ण चेहरों की अधिक संख्या इसी व्यापक चुनावी रणनीति का एक हिस्सा दिखाई देती है। अंतिम तस्वीर नामांकन और नाम वापसी के बाद ही सामने आएगी।





