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Bihar Panchayat Election 2026 : दिसंबर में खत्म होगा पंचायतों का कार्यकाल, फिर भी चुनाव की तैयारी अधूरी, जानिए पूरा मामला

बिहार में पंचायत चुनाव समय पर कराने को लेकर संशय बढ़ गया है। दिसंबर 2026 से पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने लगेगा, लेकिन परिसीमन, आरक्षण और ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया अधूरी है। पटना हाई कोर्ट में अब 26 नवंबर को अगली सुनवाई होगी।

Bihar Panchayat Election 2026 : दिसंबर में खत्म होगा पंचायतों का कार्यकाल, फिर भी चुनाव की तैयारी अधूरी, जानिए पूरा मामला
Tejpratap
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पटना: बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्य में दिसंबर 2026 से जनवरी 2027 के पहले सप्ताह के बीच पंचायतों और ग्राम कचहरियों का मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने वाला है, लेकिन चुनाव की तैयारियां अब तक पूरी नहीं हो सकी हैं। ऐसे में निर्धारित समय पर पंचायत चुनाव कराना मुश्किल नजर आ रहा है। चुनाव से पहले परिसीमन, आरक्षण निर्धारण और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के लिए ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी करना सरकार के सामने बड़ी चुनौती बन गया है।

पंचायत चुनाव समय पर कराने की मांग को लेकर दायर याचिका पर 5 अक्टूबर को पटना हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से दिए गए जवाब से साफ हुआ कि चुनाव से पहले कई जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी बाकी हैं। मामले में हाई कोर्ट में अगली सुनवाई अब 26 नवंबर को होगी। ऐसे में चुनाव की निर्धारित समयसीमा को लेकर संशय बढ़ गया है।

ट्रिपल टेस्ट में देरी बनी सबसे बड़ी बाधा

बिहार में पंचायत चुनाव के दौरान अति पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने के लिए ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है। इसी के आधार पर यह तय होगा कि पंचायतों में अति पिछड़े वर्ग को कितना आरक्षण दिया जाएगा और विभिन्न वर्गों को किस अनुपात में प्रतिनिधित्व मिलेगा।

इस दिशा में सरकार ने एएन सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान को जिम्मेदारी देने का निर्णय लिया है। संस्थान के विशेषज्ञ और शोधार्थी पंचायतों में जाकर अति पिछड़े वर्ग की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति का अध्ययन करेंगे। इस अध्ययन के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिससे आरक्षण की सीमा निर्धारित करने में मदद मिलेगी।

दूसरी ओर, अति पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष और सदस्य भी जिलों का दौरा कर पंचायतों में स्थिति का आकलन कर रहे हैं। आयोग राजनीतिक पिछड़ेपन का अध्ययन करने के बाद आरक्षण के संबंध में सरकार को अपनी अनुशंसा देगा।

क्या है ट्रिपल टेस्ट का पूरा गणित?

बिहार में त्रिस्तरीय पंचायतों और ग्राम कचहरियों में कुल 50 प्रतिशत तक आरक्षण का प्रावधान है। इसमें अति पिछड़ा वर्ग के लिए 20 प्रतिशत तक आरक्षण की व्यवस्था रही है। हालांकि, इस आरक्षण को लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

इसके तहत सबसे पहले पिछड़ेपन का आकलन करने के लिए समर्पित आयोग का गठन किया जाता है। इसके बाद प्रत्येक स्थानीय निकाय में आरक्षण के अनुपात का निर्धारण किया जाता है। साथ ही यह सुनिश्चित करना होता है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की कुल सीमा निर्धारित मानकों से अधिक न हो।

बिहार में जातिगत सर्वे के अनुसार अति पिछड़ा वर्ग में 112 जातियां शामिल हैं। ऐसे में इन वर्गों की स्थिति का आकलन और आरक्षण का निर्धारण चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

कार्यकाल खत्म होने से पहले चुनाव कराना चुनौती

संविधान के अनुच्छेद 243-ई के अनुसार पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है और सामान्य तौर पर कार्यकाल समाप्त होने से पहले नए चुनाव संपन्न कराए जाने चाहिए। लेकिन बिहार में परिसीमन, आरक्षण और ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया में देरी के कारण समय पर चुनाव कराने की चुनौती बढ़ गई है।

राज्य में पंचायतों और ग्राम कचहरियों का कार्यकाल दिसंबर 2026 के मध्य से जनवरी 2027 के पहले सप्ताह तक अलग-अलग समय पर समाप्त होना है। ऐसे में अब सबकी नजर सरकार की तैयारियों और 26 नवंबर को होने वाली हाई कोर्ट की सुनवाई पर टिकी है।

बिहार में पंचायतों का कितना बड़ा चुनाव?

बिहार में पंचायत चुनाव के जरिए बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों का चुनाव होता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य में 8,053 मुखिया, 8,053 सरपंच, 1,09,635 वार्ड सदस्य, 1,09,635 वार्ड पंच, 11,085 पंचायत समिति सदस्य और 1,160 जिला परिषद सदस्य हैं। इन पदों के लिए चुनाव कराने से पहले आरक्षण की स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है। ऐसे में ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी होने और चुनाव कार्यक्रम घोषित होने तक पंचायत चुनाव को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है।