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Bihar News: दुश्मन कौन और दोस्त कौन? विधानसभा चुनाव से पहले बनेगी लिस्ट; पुलिस के लिए आदेश जारी

Bihar News: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले पुलिस को दोस्त-दुश्मन की सूची बनाने का मिला निर्देश। सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षक, पूर्व सैनिक मित्र जबकि कानून तोड़ने वाले शत्रु। शांतिपूर्ण मतदान और अवैध हथियारों पर नकेल के लिए पुलिस तैयार..

Bihar News
प्रतीकात्मक
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Deepak Kumar
Deepak Kumar
3 मिनट

Bihar News: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष कराने के लिए पुलिस प्रशासन ने कमर कस ली है। पुलिस मुख्यालय ने सभी थानों को अपने क्षेत्र में “दोस्त और दुश्मन” की गोपनीय सूची तैयार करने का निर्देश दिया है। इस सूची में दो श्रेणियां होंगी: मित्र, जो समाज में सकारात्मक भूमिका निभाते हैं और पुलिस को सहयोग कर सकते हैं तथा शत्रु, जो कानून-व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।


मित्रों में सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षक, पूर्व सैनिक, स्थानीय जनप्रतिनिधि, व्यापारी और सम्मानित नागरिक शामिल होंगे, जो गैर-राजनीतिक और निष्पक्ष हों। वहीं, शत्रु सूची में उन लोगों को शामिल किया जाएगा जो अपराधी प्रवृत्ति के हैं, अवैध गतिविधियों में लिप्त हैं या चुनावी माहौल बिगाड़ सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य पुलिस-पब्लिक के बीच विश्वास बढ़ाना और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना है।


इस सूची को तैयार करने के लिए थाना स्तर पर गोपनीय जांच होगी, जिसमें स्थानीय चौकीदारों और विश्वसनीय मुखबिरों की मदद ली जाएगी। थानेदारों को निर्देश है कि वे प्राप्त जानकारी को क्रॉस-चेक करें ताकि सूची सटीक और भरोसेमंद हो। यह कदम न केवल चुनाव के दौरान, बल्कि सामान्य दिनों में भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहायक होगा।


पुलिस को उम्मीद है कि मित्रों की सक्रिय भागीदारी से मतदान केंद्रों पर सुरक्षा और सहयोग बढ़ेगा, जबकि शत्रु सूची के आधार पर संभावित उपद्रवियों पर नजर रखी जा सकेगी। बिहार में 243 विधानसभा सीटों पर होने वाले इस चुनाव में करीब 7.89 करोड़ मतदाता हिस्सा लेंगे और पुलिस की यह रणनीति भीड़ प्रबंधन, बूथ सुरक्षा और फर्जी मतदान रोकने में कारगर होगी।


पुलिस मुख्यालय ने सभी जिला पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। अवैध हथियारों और शस्त्र दुकानों का निरीक्षण करने, इस्तेमाल की गई गोलियों का सत्यापन करने और अवैध हथियारधारकों के खिलाफ कार्रवाई करने का टास्क दिया गया है। बिहार में चुनावी हिंसा और अवैध हथियारों का इतिहास रहा है, इसलिए पुलिस ने हथियार लाइसेंसों की जांच तेज कर दी है।


इसके अलावा जेलों का मासिक औचक निरीक्षण करने का आदेश भी जारी हुआ है ताकि अपराधी तत्वों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। हाल के वर्षों में बिहार में चुनावी हिंसा कम हुई है, लेकिन पुलिस कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। 2020 के विधानसभा चुनाव में 71% मतदान हुआ था और इस बार भी पुलिस शांतिपूर्ण और उच्च मतदान सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।