Bihar Roads: बिहार की नई रोड मेंटेनेंस पॉलिसी के तहत एक किलोमीटर से भी कम लंबाई वाली सड़कों को भी शामिल किया गया है। इन सड़कों के रखरखाव की जिम्मेदारी निर्माण कंपनियों को दी गई है, जो अगले सात वर्षों तक इनका मेंटेनेंस करेंगी।
रोड मेंटेनेंस पॉलिसी के तहत तैयार किए गए पैकेज में लगभग सभी जिलों की एक किलोमीटर से कम लंबाई वाली सड़कें शामिल हैं। पटना के पैकेज में ऐसी छोटी सड़कों की संख्या खास तौर पर अधिक है। अब संबंधित निर्माण कंपनियों को इन छोटे-छोटे सड़क स्ट्रेच के रखरखाव पर भी सक्रियता दिखानी होगी। सड़क से जुड़ी किसी तरह की शिकायत मिलने पर मामला उच्च स्तर तक पहुंच सकता है।
पटना के लिए तैयार रोड मेंटेनेंस पॉलिसी के पैकेज में कई बेहद छोटी सड़कें शामिल की गई हैं। इनमें नेहरू पथ पर आयकर गोलंबर से तारामंडल की ओर जाने के दौरान सोना मेडिकल हॉल के पास बनी सर्विस लेन की लंबाई महज 0.17 किलोमीटर है।
वहीं, फुलवारीशरीफ के पूर्णेंदुनगर से योगेंद्र भगत के घर तक जाने वाली सड़क सिर्फ 0.10 किलोमीटर लंबी है। इसके अलावा न्यू डाकबंगला रोड की 0.40 किलोमीटर, बैंक रोड की 0.80 किलोमीटर, बंदर बागीचा की 0.10 किलोमीटर और चितकोहरा गोलंबर से अश्नरोही सैन्य बेस तक की 0.22 किलोमीटर सड़क भी इस पैकेज में शामिल है। पटना से सटे बिहारशरीफ में भी एक किलोमीटर से कम लंबाई वाली कई सड़कों को रोड मेंटेनेंस पॉलिसी के पैकेज में जगह दी गई है।
नालंदा कॉलेज रोड से बारादरी रोड तक की सड़क 0.43 किलोमीटर लंबी है। वहीं, पावर ग्रिड कल्याणबिगहा से हरनौत रेलवे स्टेशन तक की सड़क 0.33 किलोमीटर, दीपनगर बाजार रोड 0.70 किलोमीटर और कल्याणबिगहा बापास से चेरो-बहादुरपुर लिंक रोड 0.28 किलोमीटर लंबी है।
राजगीर की इंडो-होक्के लिंक रोड की लंबाई 0.95 किलोमीटर है। इन सभी सड़कों के रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित निर्माण कंपनी की होगी। रोड मेंटेनेंस पॉलिसी में शामिल सड़कों की सूची में अन्य जिलों की छोटी सड़कें भी हैं। बोधगया में तिब्बत धर्मशाला से होटल ओम इंटरनेशनल तक की सड़क 0.58 किलोमीटर लंबी है।
इसी तरह मोतिहारी में पेट्रोल पंप से गायत्री मंदिर रोड तक की सड़क 0.45 किलोमीटर, मुजफ्फरपुर में रेवाघाट रोड 0.60 किलोमीटर, समस्तीपुर में रेलवे ओवरब्रिज रोड 0.43 किलोमीटर और बेगूसराय में बरौनी रेलवे स्टेशन रोड 0.90 किलोमीटर लंबी है।नई नीति के तहत इन सभी सड़कों के रखरखाव की जिम्मेदारी निर्धारित निर्माण कंपनियों की होगी। इसका उद्देश्य छोटे सड़क स्ट्रेच के रखरखाव को भी नियमित व्यवस्था के दायरे में लाना है।





