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Bihar MLC Result: नवल यादव से मदन मोहन झा तक... चारों सीटिंग MLC का पत्ता साफ, शिक्षक चुनाव में चौंकाने वाला रिजल्ट

बिहार विधान परिषद शिक्षक निर्वाचन चुनाव में इस बार बड़ा उलटफेर हुआ है। चारों सीटिंग MLC चुनाव हार गए। पटना में नवल यादव, दरभंगा में मदन मोहन झा और सारण में आफाक अहमद की हार ने सियासी समीकरण बदल दिए।

Bihar MLC Result: नवल यादव से मदन मोहन झा तक... चारों सीटिंग MLC का पत्ता साफ, शिक्षक चुनाव में चौंकाने वाला रिजल्ट
Tejpratap
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Bihar MLC Result: बिहार विधान परिषद के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव परिणाम ने इस बार सियासी तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। शिक्षक सीटों पर लंबे समय से अपनी पकड़ बनाए रखने वाले सभी मौजूदा यानी सीटिंग MLC को मतदाताओं ने इस बार बाहर का रास्ता दिखा दिया। चारों शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में नए चेहरों की जीत ने न सिर्फ राजनीतिक दलों, बल्कि चुनावी रणनीतिकारों को भी चौंका दिया है। खास बात यह रही कि जिन नेताओं को अपनी पुरानी पकड़ और संगठन के भरोसे जीत का मजबूत दावेदार माना जा रहा था, उन्हें भी इस बार हार का सामना करना पड़ा।


सबसे बड़ा झटका पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी को लगा है। यहां बीजेपी के नवल यादव लगातार पांच बार चुनाव जीत चुके थे और शिक्षक मतदाताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी। लेकिन इस बार मतदाताओं ने वर्षों पुराना समीकरण बदल दिया। राजद के संजीव कुमार ने नवल यादव को शिकस्त देकर पटना शिक्षक सीट पर कब्जा कर लिया। नवल यादव की हार इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि लगातार पांच जीत के बाद उन्हें इस सीट का बेहद मजबूत चेहरा माना जाता था। ऐसे में उनकी हार ने बिहार की शिक्षक राजनीति में नए संकेत दे दिए हैं।


तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी बड़ा उलटफेर देखने को मिला। यहां वामपंथी खेमे के मौजूदा MLC संजय कुमार सिंह को हार का सामना करना पड़ा। उनकी जगह बीजेपी के नरेंद्र सिंह ने चुनाव जीत लिया। इस नतीजे के साथ तिरहुत शिक्षक सीट पर भी सत्ता पक्ष के उम्मीदवार ने अपनी जगह बना ली है। चुनाव परिणाम ने यह साफ कर दिया कि इस बार शिक्षक मतदाताओं के बीच पुराने चेहरों के बजाय नए विकल्पों को लेकर भी मजबूत रुझान देखने को मिला।


दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम भी बेहद दिलचस्प रहा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मौजूदा MLC मदन मोहन झा को जन सुराज के उम्मीदवार प्रो. सुरेश राय ने हरा दिया। यह जीत जन सुराज के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विधानसभा और लोकसभा चुनावों से अलग शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जन सुराज ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हुए एक मौजूदा MLC को चुनावी मैदान से बाहर कर दिया। दरभंगा का परिणाम संगठन के लिए भी बड़ा संदेश माना जा रहा है कि शिक्षक मतदाताओं के बीच जन सुराज को जगह मिल रही है।


सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी कहानी कुछ अलग नहीं रही। यहां जन सुराज के आफाक अहमद को इस बार हार का सामना करना पड़ा। आफाक अहमद इससे पहले केदार पांडेय के निधन के बाद हुए उपचुनाव में जीत दर्ज कर MLC बने थे। लेकिन नियमित चुनाव में वे अपनी सीट बचाने में सफल नहीं हो सके। इस बार बीजेपी के बागी निर्दलीय उम्मीदवार राहुल राज ने बाजी मार ली। उन्होंने दलगत समीकरणों से अलग अपनी चुनावी जमीन तैयार करते हुए जीत हासिल की।


चारों शिक्षक सीटों के नतीजों को एक साथ देखें तो इस चुनाव ने बिहार विधान परिषद की शिक्षक राजनीति में बड़ा बदलाव कर दिया है। पटना में पांच बार के विजेता की हार, तिरहुत में मौजूदा MLC की विदाई, दरभंगा में कांग्रेस के दिग्गज नेता की हार और सारण में जन सुराज के उम्मीदवार का पिछड़ना—इन सभी नतीजों ने साफ कर दिया है कि शिक्षक मतदाताओं ने इस बार पुराने समीकरणों पर भरोसा नहीं किया।


इन परिणामों का असर आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है। खासकर शिक्षक समुदाय के बीच सरकार, विपक्ष और नए राजनीतिक विकल्पों को लेकर किस तरह का मूड बन रहा है, इन नतीजों ने उसकी एक झलक दे दी है। चारों सीटों पर सीटिंग MLC की हार को सिर्फ चुनावी उलटफेर नहीं, बल्कि शिक्षक राजनीति में बदलाव के बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।