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Bihar MLA fund : जानिए आपके विधायक को मिलने वाले फंड कैसे होते हैं खर्च ? किस मद में कितना पैसा और किसके पास होता है सुप्रीम पावर

बिहार में प्रत्येक विधायक को अपने क्षेत्र के विकास के लिए सालाना 4 करोड़ रुपये मिलते हैं। लेकिन यह राशि किन मदों में आती है और कैसे खर्च होती है? जानिए पूरा फंड ब्रेकअप और प्रक्रिया।

Bihar MLA fund : जानिए आपके विधायक को मिलने वाले फंड कैसे होते हैं खर्च ? किस मद में कितना पैसा और किसके पास होता है सुप्रीम पावर
Tejpratap
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3 मिनट

बिहार में प्रत्येक विधायक को अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए सालाना 4 करोड़ रुपये आवंटित किए जाते हैं। यह राशि मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना (CMLADS) के तहत दी जाती है। हाल के दिनों में इस राशि को बढ़ाने की चर्चा भी तेज है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि 4 करोड़ रुपये किन-किन मदों में आते हैं और उनका बंटवारा कैसे होता है।


राशि कहां से आती है?

यह पूरी राशि राज्य सरकार के वार्षिक बजट से आती है। वित्त विभाग बजट में योजना के लिए कुल राशि का प्रावधान करता है। इसके बाद योजना एवं विकास विभाग जिलों को विधायकवार स्वीकृति जारी करता है। पैसा सीधे विधायक को नहीं दिया जाता, बल्कि जिला प्रशासन के माध्यम से स्वीकृत योजनाओं पर खर्च किया जाता है।


क्या हर मद के लिए तय हिस्सा होता है?

आधिकारिक तौर पर 4 करोड़ रुपये का कोई सख्त “फिक्स प्रतिशत बंटवारा” सभी जिलों में एक जैसा तय नहीं होता। विधायक अपने क्षेत्र की जरूरत के अनुसार योजनाओं की अनुशंसा करते हैं। फिर भी व्यावहारिक तौर पर औसतन निम्न प्रकार से राशि खर्च होती है—


1️⃣ सड़क एवं आधारभूत संरचना (लगभग 35–40%)

करीब 1.40 करोड़ से 1.60 करोड़ रुपये

ग्रामीण सड़क निर्माण और मरम्मत

पीसीसी सड़क

पुल-पुलिया निर्माण

यह सबसे बड़ा हिस्सा होता है क्योंकि निर्माण कार्य महंगे होते हैं।


2️⃣ शिक्षा मद (लगभग 15–20%)

करीब 60 लाख से 80 लाख रुपये

अतिरिक्त कक्ष निर्माण

शौचालय निर्माण

स्कूल फर्नीचर

पेयजल सुविधा


3️⃣ स्वास्थ्य सुविधाएं (लगभग 10–15%)

करीब 40 लाख से 60 लाख रुपये

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन मरम्मत

बेड, उपकरण

एम्बुलेंस सहायता (स्वीकृत नियमों के तहत)


4️⃣ पेयजल एवं सिंचाई (लगभग 10–15%)

करीब 40 लाख से 60 लाख रुपये

हैंडपंप

मिनी जलापूर्ति योजना

छोटी सिंचाई परियोजनाएं


5️⃣ सामुदायिक भवन एवं सामाजिक ढांचा (लगभग 10–15%)

करीब 40 लाख से 60 लाख रुपये

सामुदायिक भवन

विवाह भवन

पुस्तकालय

श्मशान घाट/कब्रिस्तान विकास


6️⃣ स्ट्रीट लाइट एवं अन्य सार्वजनिक सुविधाएं (लगभग 5–10%)

करीब 20 लाख से 40 लाख रुपये

सोलर स्ट्रीट लाइट

हाईमास्ट लाइट

सार्वजनिक शेड


खर्च की प्रक्रिया

विधायक विकास कार्य की अनुशंसा करते हैं। इसके बाद तकनीकी स्वीकृति संबंधित विभाग देता है। तब जाकर टेंडर प्रक्रिया के बाद एजेंसी चयनित होती है। ऐसे में कार्य पूर्ण होने पर भुगतान कोषागार से किया जाता है। इतना ही नहीं जिलाधिकारी (DM) पूरी प्रक्रिया की निगरानी करते हैं। मतलब साफ़ है कि विधायक सीधे पैसे का लेन-देन नहीं करते।


क्या राशि बढ़ सकती है?

निर्माण सामग्री और श्रम लागत में बढ़ोतरी के कारण विधायकों की मांग है कि 4 करोड़ रुपये पर्याप्त नहीं हैं। यदि सरकार इसे 5 या 6 करोड़ करती है, तो अलग-अलग मदों में आवंटन भी उसी अनुपात में बढ़ेगा।बिहार में विधायक को मिलने वाले 4 करोड़ रुपये किसी निजी उपयोग के लिए नहीं होते, बल्कि पूरी तरह विकास कार्यों के लिए निर्धारित सरकारी राशि है। इसका बंटवारा क्षेत्र की प्राथमिक जरूरतों के अनुसार किया जाता है, हालांकि सड़क और आधारभूत संरचना पर सबसे ज्यादा खर्च होता है।