Bihar News: बिहार सरकार ने राज्य के मदरसों की कार्यप्रणाली, शैक्षणिक गतिविधियों और आधारभूत सुविधाओं की विस्तृत जांच कराने का फैसला किया है। इस संबंध में शिक्षा विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। सरकार के इस कदम को राज्य में संचालित मदरसों की वास्तविक स्थिति जानने और शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दरअसल, हाल ही में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने मदरसों की जांच कराने की घोषणा की थी। इसी घोषणा को अमल में लाते हुए शिक्षा विभाग ने मंगलवार को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग के अनुसार राज्य के प्रत्येक प्रखंड में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया जाएगा, जो संबंधित क्षेत्र के मदरसों का भौतिक सत्यापन कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
जारी आदेश के मुताबिक, प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) अथवा अंचलाधिकारी (सीओ) को समिति का अध्यक्ष बनाया जाएगा। वहीं, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को समिति का सदस्य सचिव नामित किया गया है। इसके अलावा संबंधित प्रखंड मुख्यालय के किसी सरकारी माध्यमिक या उच्च माध्यमिक विद्यालय के वरिष्ठ प्रधानाध्यापक को समिति का तीसरा सदस्य बनाया जाएगा।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि समिति गठन के बाद सभी मदरसों का स्थलीय निरीक्षण किया जाएगा। इस दौरान संस्थानों में संचालित शैक्षणिक गतिविधियों का मूल्यांकन किया जाएगा। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि छात्रों की उपस्थिति नियमित है या नहीं तथा विद्यालयों में आवश्यक शैक्षणिक और भौतिक सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं।
जांच के दौरान मदरसों की आधारभूत संरचना, भवन की स्थिति, कक्षाओं का संचालन, विद्यार्थियों की संख्या, शिक्षकों की उपलब्धता और अन्य निर्धारित मानकों का भी आकलन किया जाएगा। निरीक्षण टीम को जांच प्रक्रिया के दौरान फोटोग्राफ और अन्य आवश्यक साक्ष्य एकत्र करने का निर्देश दिया गया है ताकि रिपोर्ट तथ्यों और प्रमाणों पर आधारित हो।
विभागीय आदेश के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद समिति को 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन के माध्यम से शिक्षा विभाग मुख्यालय को भेजनी होगी। रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे की कार्रवाई तय करेगी। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य राज्य में संचालित मदरसों की वास्तविक स्थिति का पता लगाना और शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि मदरसों की समीक्षा पूरी होने के बाद संस्कृत विद्यालयों की भी इसी प्रकार जांच और समीक्षा की जाएगी। इससे राज्य के विभिन्न प्रकार के अनुदानित एवं मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों की कार्यप्रणाली का व्यापक मूल्यांकन संभव हो सकेगा।
शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान यदि कोई मदरसा निर्धारित नियमों और मानकों का उल्लंघन करता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। ऐसी स्थिति में संबंधित संस्थान का सरकारी अनुदान रोका जा सकता है। गंभीर अनियमितता मिलने पर उसकी मान्यता समाप्त करने तक का कदम उठाया जा सकता है।
सरकार का मानना है कि इस पहल से शिक्षा संस्थानों में जवाबदेही बढ़ेगी और यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सरकारी सहायता और संसाधनों का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप हो रहा है। अब सभी जिलों में समिति गठन की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही मदरसों के सत्यापन अभियान को जल्द गति मिलने की संभावना है।





