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1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sat, 29 Nov 2025 10:48:44 AM IST
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land revenue Bihar : बिहार में भूमि एवं राजस्व मामलों में अब आम लोगों के लिए बड़ी सुविधा मिलने वाली है। राज्य सरकार ने भूमि सुधार एवं राजस्व विभाग के अंतर्गत आने वाले राजस्व न्यायालयों में सभी कार्य पूरी तरह से ऑनलाइन करने का निर्णय लिया है। इसका मतलब यह है कि अब जमीन संबंधी मामलों के लिए आवेदन दर्ज कराने के लिए आवेदक को भौतिक रूप से कार्यालय में उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके साथ ही राजस्व मामलों में वकील की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है। यानी आवेदक स्वयं ही अपना मामला दर्ज करा सकता है और आवश्यक कार्रवाई करवा सकता है।
यह जानकारी शुक्रवार को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में सामने आई। इस प्रशिक्षण का आयोजन भूमि सुधार उप समाहर्ता (डीसीएलआर) के लिए किया गया था, जिसमें भूमि सुधार और राजस्व प्रशासन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव, राजस्व विभाग, दीपक कुमार सिंह ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि अंचल कार्यालयों का नियमित निरीक्षण और समीक्षा अभी पूरी तरह से प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि बेहतर राजस्व प्रशासन के लिए इन दोनों कार्यों का समय पर और नियमित रूप से होना अनिवार्य है।
अपर मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अब सभी काम ऑनलाइन माध्यम से किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से लोगों को कार्यालय आने की जरूरत नहीं होगी और मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। साथ ही, किसी भी प्रकार के अनावश्यक दस्तावेज मांगने की परंपरा को समाप्त किया जाएगा। उनका कहना था कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भूमि और राजस्व मामलों की प्रक्रिया सरल, तेज और निष्पक्ष होगी।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भी कहा कि राज्य में राजस्व प्रशासन को पूरी तरह से ऑनलाइन करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनता को सरकारी सेवाओं में असुविधा न हो और सभी मामलों का निपटान समय पर हो। मंत्री ने कहा कि ऑनलाइन सिस्टम से आवेदन की स्थिति को भी आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा, जिससे लोगों को बार-बार कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऑनलाइन प्रक्रिया से न केवल समय और लागत की बचत होगी बल्कि भ्रष्टाचार और मनमानी की संभावनाएं भी कम होंगी। पहले जहां जमीन और राजस्व से जुड़े मामले दर्ज कराने के लिए आवेदक को कई दिनों तक कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे, अब वह घर बैठे ही ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध आवेदन पत्र और आवश्यक दिशा-निर्देशों के माध्यम से आवेदक स्वयं अपने आवेदन की पुष्टि कर सकेंगे।
यह भी उल्लेखनीय है कि अब राजस्व मामलों में वकील की अनिवार्यता नहीं रहेगी। पहले जहां कई मामलों में वकील के माध्यम से ही आवेदन दर्ज कराए जाते थे, अब सामान्य आवेदक स्वयं ही अपने मामले की सारी प्रक्रिया ऑनलाइन पूरा कर सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से जनता को सुविधा तो मिलेगी ही, साथ ही प्रशासनिक प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।
इस कार्यक्रम में डीसीएलआर और अन्य अधिकारी भूमि सुधार और राजस्व प्रशासन से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इसमें ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन दर्ज करने की प्रक्रिया, आवेदन की ट्रैकिंग, डिजिटल दस्तावेज़ प्रबंधन और समयबद्ध निपटान पर जोर दिया गया। अधिकारियों को यह भी सिखाया गया कि कैसे ऑनलाइन पोर्टल के जरिए शिकायतों और विवादों का समाधान तेज और प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
राजस्व विभाग का मानना है कि इस कदम से बिहार में भूमि और राजस्व प्रशासन में एक नई क्रांति आएगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मामलों की निपटान प्रक्रिया पारदर्शी और त्वरित होगी, जिससे आम जनता को राहत मिलेगी।
वहीं, नागरिकों का भी कहना है कि ऑनलाइन प्रक्रिया से उनकी सुविधा बढ़ेगी और उन्हें बार-बार सरकारी कार्यालयों में समय बर्बाद करने की जरूरत नहीं होगी। इसके अलावा, ऑनलाइन निपटान से भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी कम होंगी और अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी।