Bihar News : बिहार की जेलों में अब अनुशासन तोड़ना कैदियों के लिए और भारी पड़ सकता है। राज्य के नए जेल मैनुअल में बंदियों के आचरण और जेल के भीतर नियमों के उल्लंघन को लेकर कई प्रावधान बदले गए हैं। जेल में मारपीट, तोड़फोड़ या अव्यवस्था फैलाने वाले कैदियों की सुविधाओं में कटौती की जा सकती है। इतना ही नहीं, गंभीर अनुशासनहीनता की स्थिति में पैरोल की सुविधा भी एक साल तक रोकी जा सकती है।
नए नियमों की खास बात यह है कि पुराने दौर में इस्तेमाल होने वाली हथकड़ी और डंडा-बेड़ी जैसे दंडात्मक प्रावधानों को हटाकर अनुशासन बनाए रखने के लिए दूसरे तरीके अपनाने पर जोर दिया गया है। जेल प्रशासन अब बंदियों की सुविधाओं और मिलने वाली रियायतों में कटौती के जरिए कार्रवाई कर सकेगा।
जेल में बवाल किया तो सुविधाएं होंगी बंद
यदि कोई कैदी जेल के अंदर मारपीट, तोड़फोड़ या अन्य तरीके से अव्यवस्था फैलाता है, तो उसकी कैंटीन और मनोरंजन जैसी सुविधाएं एक महीने तक बंद की जा सकती हैं। इसके अलावा अर्जित परिहार यानी सजा में मिलने वाली छूट को तीन महीने तक जब्त किया जा सकता है और इसी अवधि में परिहार देने पर रोक भी लगाई जा सकती है।
सबसे बड़ा असर पैरोल पर पड़ेगा। अनुशासन तोड़ने वाले कैदी को एक साल तक पैरोल की सुविधा से वंचित किया जा सकता है। यानी जेल के बाहर जाने की मिलने वाली यह राहत गंभीर नियम उल्लंघन की स्थिति में लंबे समय के लिए खत्म हो सकती है।
परिजनों से मुलाकात पर भी रोक
नए प्रावधानों में कैदियों से मिलने-जुलने की सुविधा को भी दंड का हिस्सा बनाया गया है। दोषी पाए जाने पर एक महीने से अधिक अवधि तक वकील को छोड़कर अन्य आगंतुकों से मुलाकात पर रोक लगाई जा सकती है। जरूरत पड़ने पर अनुशासनहीन कैदी को सामान्य बंदियों से अलग पृथक कारावास में भी रखा जा सकता है।
इसका मकसद जेल के अंदर अनुशासन बनाए रखना और दूसरे कैदियों पर किसी अनुशासनहीन बंदी के नकारात्मक प्रभाव को रोकना है।
मोबाइल मिला तो तीन साल तक की सजा
जेल में मोबाइल फोन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिलने के मामले में भी नियम सख्त किए गए हैं। यदि किसी कैदी, आगंतुक या जेलकर्मी के पास मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद होता है और मजिस्ट्रेट के समक्ष दोष साबित हो जाता है, तो तीन साल तक की अतिरिक्त सजा, 25 हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों दंड दिए जा सकते हैं।
मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जेल के अंदर पहुंचाने वाले व्यक्ति के लिए भी दो साल तक की सजा का प्रावधान है। ऐसे अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती बनाया गया है।
बार-बार नियम तोड़ा तो अलग से जेल
अगर कोई बंदी बार-बार जेल अनुशासन तोड़ता है, तो जेल अधीक्षक इसकी सूचना सक्षम न्यायिक दंडाधिकारी को देंगे। मामले की सुनवाई के बाद दोष साबित होने पर तीन साल तक की अतिरिक्त जेल की सजा हो सकती है। यह सजा बंदी की पहले से चल रही सजा पूरी होने के बाद काटनी होगी।
कुल मिलाकर नए जेल मैनुअल का फोकस जेलों में अनुशासन बनाए रखने, प्रतिबंधित सामान की आवाजाही रोकने और बार-बार नियम तोड़ने वाले बंदियों पर कड़ी कार्रवाई करने पर है। साथ ही, जेल अधीक्षक को कारा के अंदर अनुशासन व्यवस्था के लिए अधिक स्पष्ट जिम्मेदारी दी गई है।





