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Bihar Government Scheme : 82 स्कूलों के हेडमास्टर के वेतन में कटौती, सात साल का हिसाब नहीं..बक्शी नहीं जाएगी लापरवाही

बिहार में मुख्यमंत्री परिभ्रमण योजना के तहत मिले फंड का सही हिसाब न देने पर 82 सरकारी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों के वेतन में कटौती का आदेश जारी किया गया है। डीईओ राघवेंद्र मणि त्रिपाठी ने कहा कि यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं,

Bihar Government Scheme : 82 स्कूलों के हेडमास्टर के वेतन में कटौती, सात साल का हिसाब नहीं..बक्शी नहीं जाएगी लापरवाही
Tejpratap
Tejpratap
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Bihar Government Scheme : बिहार में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही का एक और गंभीर मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री परिभ्रमण योजना के तहत वर्षों पहले मिली राशि का हिसाब नहीं देना अब जिले के 82 सरकारी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों (एचएम) को भारी पड़ गया है। सात वर्षों तक लगातार स्मरण, नोटिस और चेतावनी के बावजूद जब जवाबदेही नहीं दिखाई गई, तो जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) राघवेंद्र मणि त्रिपाठी ने सख्त कदम उठाते हुए संबंधित एचएम के वेतन में कटौती का आदेश जारी कर दिया है।


यह मामला वित्तीय वर्ष 2017-18 से जुड़ा है। उस वर्ष मुख्यमंत्री परिभ्रमण योजना के तहत जिले के चयनित सरकारी विद्यालयों को प्रत्येक स्कूल के लिए 20-20 हजार रुपये की राशि आवंटित की गई थी। योजना का उद्देश्य छात्रों को शैक्षणिक भ्रमण, शैक्षिक गतिविधियों और व्यवहारिक ज्ञान से जोड़ना था, ताकि शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित न रह जाए। लेकिन हकीकत यह है कि कुल 16 लाख 40 हजार रुपये की इस राशि का पूरा हिसाब आज तक 82 स्कूलों द्वारा नहीं दिया गया।


डीईओ के अनुसार, कई बार लिखित और मौखिक निर्देश दिए गए, फिर भी प्रधानाध्यापकों ने खर्च से संबंधित डीसी विपत्र (डिमांड कलेक्शन वाउचर) जमा नहीं कराया। जवाबदेही तय करने के लिए आठ जनवरी को एक विशेष शिविर का आयोजन भी किया गया, ताकि सभी लंबित विपत्र एक साथ जमा कराए जा सकें। हालांकि यह प्रयास भी नाकाम रहा। 82 स्कूलों में से केवल छह स्कूलों के प्रधानाध्यापकों ने ही शिविर में विपत्र जमा कराया, जबकि शेष या तो अनुपस्थित रहे या फिर टालमटोल करते नजर आए।


इस रवैये को गंभीर लापरवाही मानते हुए डीईओ ने डीपीओ स्थापना को निर्देश दिया है कि आठ जनवरी को शिविर में अनुपस्थित रहे सभी एचएम को अनुपस्थित माना जाए। साथ ही, जब तक विपत्र जमा नहीं किया जाता, तब तक दिन के हिसाब से वेतन कटौती की जाए और कटी हुई राशि को कोषागार में जमा कराया जाए। इतना ही नहीं, इस कार्रवाई का उल्लेख संबंधित प्रधानाध्यापकों की सेवा पुस्तिका में भी दर्ज किया जाएगा, ताकि भविष्य में इसका प्रभाव उनके सेवा अभिलेख पर साफ तौर पर दिखे।


जानकारी के मुताबिक, जिन प्रखंडों के स्कूल इस सूची में शामिल हैं, उनमें बाजपट्टी, बथनाहा, बेलसंड, बोखड़ा, डुमरा, मेजरगंज, नानपुर, परिहार, पुपरी, रीगा, रुन्नीसैदपुर, सोनबरसा, सुप्पी और सुरसंड प्रमुख हैं। इनमें सबसे अधिक 30 स्कूल रुन्नीसैदपुर प्रखंड से हैं, जबकि परिहार के 13 और नानपुर के 7 स्कूल भी लंबित मामलों की सूची में शामिल हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि समस्या किसी एक विद्यालय या प्रखंड तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर फैली हुई है।


डीईओ राघवेंद्र मणि त्रिपाठी ने साफ शब्दों में कहा है कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं के प्रति जिम्मेदारी, पारदर्शिता और अनुशासन से जुड़ा हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द विपत्र जमा नहीं किया गया, तो आगे और भी कड़ी विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।


बिहार सरकार लगातार शिक्षा व्यवस्था में सुधार, योजनाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दे रही है। मुख्यमंत्री परिभ्रमण योजना जैसी योजनाओं का मकसद छात्रों को बेहतर अवसर देना है, लेकिन जब जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी ही लापरवाही बरतें, तो योजना का उद्देश्य ही प्रभावित होता है। इस कार्रवाई को शिक्षा विभाग में अनुशासन स्थापित करने की दिशा में एक कड़ा लेकिन जरूरी कदम माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि वेतन कटौती और सेवा पुस्तिका में दर्ज कार्रवाई के बाद कितने प्रधानाध्यापक समय रहते अपना हिसाब-किताब दुरुस्त करते हैं।