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Bihar Health Department : बिहार के सरकारी अस्पतालों में अब आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाएं भी मिलेंगी, सरकार ने कर दिया एलान

बिहार सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए सरकारी अस्पतालों में अब एलोपैथिक दवाओं के साथ आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाएं उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। आयुष डॉक्टरों की तैनाती के बाद मरीजों को संबंधित पद्धति की दवाएं भी सरकारी स्तर पर मिलेंगी।

Bihar Health Department : बिहार के सरकारी अस्पतालों में अब आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाएं भी मिलेंगी, सरकार ने कर दिया एलान
Tejpratap
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Bihar Health Department : बिहार सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को और व्यापक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को एलोपैथिक (अंग्रेजी) दवाओं के साथ-साथ आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का यह निर्णय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने और मरीजों की बढ़ती मांग को देखते हुए लिया गया है।


स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में आयुष चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति के बाद यह महसूस किया गया कि जिन मरीजों का इलाज आयुर्वेद या होम्योपैथिक पद्धति से किया जा रहा है, उन्हें संबंधित दवाएं भी सरकारी स्तर पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इसी उद्देश्य से अस्पतालों में आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाओं की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया है।


दवाओं की खरीद, भंडारण और वितरण की जिम्मेदारी बिहार स्वास्थ्य सेवाएं आधारभूत संरचना निगम को सौंपी गई है। निगम द्वारा एक समन्वित आपूर्ति प्रणाली तैयार की जा रही है, ताकि किसी भी स्तर पर दवाओं की कमी न हो। अधिकारियों का कहना है कि दवाओं की गुणवत्ता और समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था भी लागू की जाएगी।


प्रदेश के लगभग सभी जिलों में संचालित सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में पहले चरण में आयुष डॉक्टरों को तैनात किया गया है। सरकार की योजना है कि एलोपैथिक सेवाओं के साथ-साथ पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को भी समान रूप से सशक्त किया जाए। इससे मरीजों को अपनी पसंद के अनुसार इलाज चुनने का विकल्प मिलेगा।


सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य केंद्रों के साथ-साथ राज्य के 294 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में भी आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाओं का वितरण किया जाएगा। इन आरोग्य मंदिरों को प्राथमिक स्तर पर समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। यहां पहले से ही बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं, अब वैकल्पिक चिकित्सा सेवाओं के जुड़ने से इनकी उपयोगिता और बढ़ेगी।


स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे मरीज हैं, जो एलोपैथिक दवाओं की बजाय वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों को प्राथमिकता देते हैं। विशेषकर पुरानी बीमारियों, त्वचा रोग, जोड़ों के दर्द और जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं में लोग आयुर्वेद और होम्योपैथी का सहारा लेते हैं। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में इन दवाओं की उपलब्धता से मरीजों को निजी क्लीनिकों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।


अधिकारियों के अनुसार, इस योजना के तहत दवाओं की सूची तैयार की जा रही है और आवश्यक अनुमोदन की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। जल्द ही राज्य के सभी चयनित अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाएं उपलब्ध हो जाएंगी।


सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से न केवल पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और विविधता भी बढ़ेगी। साथ ही, मरीजों को एक ही छत के नीचे विभिन्न उपचार विकल्प मिल सकेंगे, जिससे राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था और मजबूत होगी।

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