1st Bihar Published by: First Bihar Updated Feb 28, 2026, 8:40:13 AM
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Bihar Education Department : बिहार के शिक्षा विभाग में करोड़ों रुपये के खर्च को लेकर बड़ा खेल उजागर होने से हड़कंप मच गया है। जिलों में खर्च की गई 1,896.02 करोड़ रुपये की राशि का उपयोगिता प्रमाण-पत्र (यूसी) अब तक विभाग को नहीं मिला है। मामला सामने आने के बाद महालेखाकार कार्यालय ने भी जवाब तलब कर लिया है, जिससे विभागीय स्तर पर अफरातफरी का माहौल बन गया है।
जानकारी के अनुसार, यह राशि अलग-अलग अवधियों से जुड़ी है। मई 2019 से 31 अगस्त 2024 तक 494.06 करोड़ रुपये का उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित है। वहीं, एक सितंबर 2024 से 31 अक्तूबर 2025 तक 956.67 करोड़ रुपये का हिसाब नहीं दिया गया है। इसके अलावा 445.29 करोड़ रुपये की राशि भी समायोजन के दायरे में है। कुल मिलाकर 1,896.02 करोड़ रुपये का लेखा-जोखा विभाग को अब तक नहीं सौंपा गया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि समीक्षा में यह भी सामने आया कि मई 2019 से अगस्त 2024 तक कुल 9,149.47 करोड़ रुपये के उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित थे। हालांकि 8,587.04 करोड़ रुपये का प्रमाण-पत्र महालेखाकार कार्यालय को भेज दिया गया है, लेकिन 494.06 करोड़ रुपये अब भी अटके हुए हैं। इसी तरह, सितंबर 2024 से अक्तूबर 2025 के बीच 14,496.71 करोड़ रुपये लंबित थे, जिनमें से 13,471.01 करोड़ रुपये का यूसी भेजा गया, जबकि 956.67 करोड़ रुपये का हिसाब अब तक नहीं दिया गया।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद विभागीय जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि चार दर्जन से अधिक जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) कार्रवाई की जद में आ सकते हैं। कारण बताओ नोटिस से लेकर वेतन रोकने और निलंबन तक की कार्रवाई पर विचार हो रहा है।
शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्दर ने सभी जिलों को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि लंबित उपयोगिता प्रमाण-पत्र तत्काल जमा किए जाएं। उन्होंने कैंप मोड में विशेष अभियान चलाकर समायोजन की प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया है और चेतावनी दी है कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।