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BIHAR NEWS : शराबबंदी के बाद बिहार में ‘सूखा नशा’ बना नई चुनौती, अब सरकार ने महिलाओं को बनाया हथियार, गांव-गांव से टूटेगा ड्रग्स नेटवर्क

बिहार में बढ़ते ‘सूखा नशा’ के खतरे पर अब सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। हर गांव में 10 महिलाओं को नशामुक्ति अभियान की कमान दी गई है, जो ड्रग्स के खिलाफ जमीनी स्तर पर निगरानी और कार्रवाई में अहम भूमिका निभाएंगी।

BIHAR NEWS : शराबबंदी के बाद बिहार में ‘सूखा नशा’ बना नई चुनौती, अब सरकार ने महिलाओं को बनाया हथियार, गांव-गांव से टूटेगा ड्रग्स नेटवर्क
Tejpratap
Tejpratap
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BIHAR NEWS : बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद नशे का स्वरूप तेजी से बदलता नजर आ रहा है। शराब की जगह अब ‘सूखा नशा’ यानी ड्रग्स का खतरा गांव-गांव तक फैलने लगा है। इस चुनौती से निपटने के लिए बिहार सरकार ने एक बड़ा और अनोखा कदम उठाया है। अब इस लड़ाई की कमान महिलाओं को सौंपी जा रही है, जो न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे समाज को नशे से मुक्त करने में अहम भूमिका निभाएंगी।


समाज कल्याण विभाग की ओर से शुरू किए गए इस विशेष अभियान के तहत हर गांव से 10-10 सक्रिय और जागरूक महिलाओं का चयन किया जाएगा। ये महिलाएं ‘नशामुक्ति ब्रांड एंबेसडर’ के रूप में काम करेंगी और अपने-अपने क्षेत्रों में नशे के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाएंगी। सरकार का मानना है कि महिलाएं सामाजिक बदलाव की सबसे मजबूत कड़ी होती हैं और उनकी भागीदारी से इस अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी।


यह अभियान केवल जागरूकता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें एक मजबूत निगरानी तंत्र भी शामिल होगा। चयनित महिलाएं अपने गांव में एक विशेष टीम की तरह काम करेंगी और हर घर की स्थिति पर नजर रखेंगी। वे यह जानकारी जुटाएंगी कि कौन व्यक्ति किस तरह के नशे की चपेट में है और इसकी रिपोर्ट तैयार कर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएंगी। इस व्यवस्था से न केवल नशे के आदी लोगों की पहचान होगी, बल्कि उनके इलाज और पुनर्वास की प्रक्रिया भी आसान हो सकेगी।


सबसे अहम पहलू यह है कि ये महिलाएं ड्रग्स सप्लाई चेन को तोड़ने में भी सक्रिय भूमिका निभाएंगी। वे संदिग्ध गतिविधियों और नशा तस्करों की जानकारी सीधे जिला प्रशासन और पुलिस तक पहुंचाएंगी। इससे नशे के अवैध कारोबार पर सख्ती से लगाम लगाने में मदद मिलेगी। सरकार का लक्ष्य है कि जमीनी स्तर से ही इस नेटवर्क को खत्म किया जाए, ताकि युवाओं को नशे के जाल में फंसने से रोका जा सके।


इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों को मुख्य केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। ये केंद्र अब केवल पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि नशामुक्ति अभियान के ‘कंट्रोल रूम’ के रूप में भी काम करेंगे। यहां पर नियमित रूप से काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएंगे, जहां नशे के शिकार लोगों को समझाया जाएगा और उन्हें इस आदत से बाहर निकालने के लिए प्रेरित किया जाएगा।


इसके अलावा, गंभीर रूप से नशे के आदी लोगों को चिन्हित कर उन्हें सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का उद्देश्य केवल नशे के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि नशे की गिरफ्त में आ चुके लोगों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाना भी है।


अभियान को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए गांवों में विशेष पोस्टर भी लगाए जाएंगे। इन पोस्टरों पर स्वास्थ्य विभाग, समाज कल्याण विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों के मोबाइल नंबर सार्वजनिक किए जाएंगे, ताकि कोई भी व्यक्ति सीधे सूचना दे सके या मदद मांग सके। इससे आम लोगों की भागीदारी भी इस अभियान में बढ़ेगी।


नशे के खिलाफ जनजागरूकता बढ़ाने के लिए हर महीने तीन दिवसीय विशेष चौपाल का आयोजन किया जाएगा। इन चौपालों में महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा कि वे किस तरह अपने परिवार और आसपास के लोगों को नशे से दूर रख सकती हैं। साथ ही, युवाओं को सही दिशा देने और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने के उपायों पर भी चर्चा होगी।


सरकार का मानना है कि जब घर की महिला जागरूक और सशक्त होगी, तभी समाज में स्थायी बदलाव संभव होगा। महिलाओं की भागीदारी से न केवल नशे के खिलाफ यह अभियान मजबूत होगा, बल्कि ग्रामीण इलाकों में सामाजिक सुरक्षा और सामंजस्य का माहौल भी बेहतर होगा।


कुल मिलाकर, बिहार सरकार की यह पहल नशे के खिलाफ एक व्यापक सामाजिक आंदोलन का रूप ले सकती है। यदि यह अभियान सफल होता है, तो न केवल हजारों युवाओं का भविष्य बचाया जा सकेगा, बल्कि राज्य में एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज की नींव भी मजबूत होगी।