1st Bihar Published by: First Bihar Updated Feb 27, 2026, 12:42:01 PM
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Bihar Assembly : बिहार विधानसभा में आज ध्यान आकर्षण प्रस्ताव के दौरान धर्मांतरण का मुद्दा जोर-शोर से उठा। भारतीय जनता पार्टी के विधायक वीरेंद्र कुमार ने सदन का ध्यान कथित तौर पर धोखाधड़ी, प्रलोभन और बाल विवाह के माध्यम से किए जा रहे धर्मांतरण की ओर आकर्षित कराया। उन्होंने कहा कि राज्य में इस प्रकार की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून लाने की आवश्यकता है।
वीरेंद्र कुमार ने अपने वक्तव्य में कहा कि देश के कई राज्यों—जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात—में धर्म परिवर्तन को लेकर कठोर कानून बनाए गए हैं। इन राज्यों में धोखाधड़ी, लालच या विवाह के बहाने धर्म परिवर्तन कराने पर कड़ी सजा का प्रावधान है, जो कई मामलों में 20 वर्षों तक की सजा और गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने मांग की कि बिहार में भी इसी प्रकार का सख्त कानून बनाया जाए, ताकि जबरन या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि बिहार के कुछ सीमावर्ती इलाकों में धर्मांतरण की घटनाएं बढ़ी हैं और इसके कारण जनसंख्या संरचना में बदलाव देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि विवाह का प्रलोभन देकर लड़कियों का धर्म परिवर्तन कराने की शिकायतें मिल रही हैं। साथ ही कुछ धर्म गुरुओं पर भी इस प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त होने के आरोप लगाए गए। उन्होंने इसे केवल धर्मांतरण नहीं बल्कि “राष्ट्रांतरण” और “विचार परिवर्तन” करार देते हुए इसे गंभीर विषय बताया।
हालांकि, सरकार की ओर से जवाब देते हुए संबंधित मंत्री ने स्पष्ट किया कि फिलहाल राज्य सरकार के पास धर्मांतरण रोकने के लिए अलग से कानून लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। मंत्री के इस उत्तर के बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया। भाजपा के विधायक संजय प्रसाद, जीवेश मिश्रा, मिथिलेश तिवारी समेत कई सदस्यों ने सरकार के जवाब का विरोध किया और इसे असंतोषजनक बताया।
विधायक जीवेश मिश्रा ने बहस के दौरान संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लेख करते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि धर्म से जुड़े अधिकारों और स्वतंत्रता को लेकर संविधान में प्रावधान है, लेकिन उन्होंने यह तर्क दिया कि जन्म के धर्म को बदलने का अधिकार स्पष्ट रूप से नहीं दिया गया है। इस मुद्दे पर उन्होंने सरकार से स्पष्ट नीति बनाने की मांग की।
सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिली। जहां भाजपा विधायकों ने सख्त कानून बनाने की मांग दोहराई, वहीं सरकार ने फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं होने की बात कही। धर्मांतरण का मुद्दा अब राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।