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अब बाजार नहीं, जीविका दीदियों के हाथों बनी पोशाक पहनेंगे आंगनबाड़ी के बच्चे

बिहार में आंगनबाड़ी बच्चों को अब जीविका दीदियों द्वारा सिली पोशाक दी जा रही है। इस योजना से लाखों बच्चों को लाभ और हजारों महिलाओं को रोजगार मिल रहा है।

बिहार न्यूज
लाखों महिलाओं को मिला रोजगार
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
2 मिनट

PATNA: अब आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को बाजार से खरीदी गई तैयार पोशाक के बजाय जीविका दीदियों द्वारा घरेलू स्तर पर सिली हुई गुणवत्तापूर्ण पोशाक उपलब्ध कराई जा रही है। इसके तहत अब तक 10 लाख से अधिक पोशाक सेट का वितरण आंगनबाड़ी केंद्रों में किया जा चुका है। पूरे प्रदेश में 1000 से अधिक संकुल स्तर पर जीविका दीदियों क्र माध्यम से बच्चों की पोशाक की सिलाई का कार्य सक्रिय रूप से चल रहा है।


हजारों महिलाओं को मिला रोजगार

इस योजना का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण महिलाओं को हुआ है। हजारों जीविका दीदियों को घर के पास ही सिलाई का काम मिल रहा है, जिससे उन्हें औसतन 10 हजार रुपये प्रति माह की आमदनी हो रही है। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास और स्वावलंबन की भावना भी बढ़ रही है। 


विभागीय जानकारी के अनुसार, राज्य में करीब 1.5 लाख महिलाएं वर्तमान में इस सिलाई कार्य से जुड़ी हुई हैं और आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। कई जिलों में 'सिलाई घर' या प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां दीदियों को आधुनिक मशीनों और कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।


बच्चों को मिल रही बेहतर सुविधा

यह पहल सिर्फ रोजगार सृजन तक सीमित नहीं है। आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों को अब एकसमान, टिकाऊ और अच्छी क्वालिटी की पोशाक मिल रही है। प्रदेश में लगभग 1.13 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों में करीब 50 लाख बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं।