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Bihar Anganwadi : बिहार के आंगनबाड़ी केंद्र होंगे आधुनिक, बायोमैट्रिक अटेंडेंस से जुड़े; पटना में होगा यह बदलाव

बिहार सरकार ने राज्य के लगभग 1.14 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक बनाने और उनकी कार्यप्रणाली सुधारने के लिए बड़ा कदम उठाया है। नए बायोमैट्रिक सिस्टम के तहत सेविका और सहायिका को प्रतिदिन अटेंडेंस दर्ज करना अनिवार्य होगा।

Bihar Anganwadi : बिहार के आंगनबाड़ी केंद्र होंगे आधुनिक, बायोमैट्रिक अटेंडेंस से जुड़े; पटना में होगा यह बदलाव
Tejpratap
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Bihar Anganwadi : बिहार सरकार ने राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक बनाने और उनकी कार्यक्षमता सुधारने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत लगभग एक लाख 14 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को बायोमैट्रिक सिस्टम से जोड़ने की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी केंद्र समय पर खुलें और बच्चों को नियमित सेवाएं मिलें। वर्तमान में आंकड़ों के अनुसार लगभग 34 प्रतिशत केंद्र समय पर नहीं खुलते हैं, जिससे बच्चों और उनके अभिभावकों को समस्या होती है।


नए सिस्टम के तहत हर आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका और सहायिका को दैनिक अटेंडेंस दर्ज करना अनिवार्य होगा। इसके लिए एक नया एप विकसित किया जा रहा है, जिसमें सेविका-सहायिका को हर दिन अपने केंद्र पर अटेंडेंस बनाना होगा। यदि अटेंडेंस नहीं बनाई जाती है, तो सेविका को मोबाइल पर रिमाइंडर जाएगा और संबंधित रिपोर्ट तुरंत जिला स्तर के अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी। इस प्रक्रिया में सभी केंद्रों का कोड और सेविका-सहायिका का नाम दर्ज रहेगा।


जब तक सभी केंद्र बायोमैट्रिक सिस्टम से जुड़े नहीं होंगे, तब तक सभी एलएस (लाइज़ेंस सर्विस) को प्रतिदिन किसी एक केंद्र पर जाकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से यह दिखाना होगा कि केंद्र समय पर खुला है। इस प्रणाली से यह सुनिश्चित होगा कि सेविका और सहायिका नियमित रूप से अपनी जिम्मेदारी निभाएं और केंद्र समय पर संचालित हों।


सिर्फ तकनीकी सुधार ही नहीं, बल्कि आंगनबाड़ी केंद्रों के भौतिक स्वरूप में भी बदलाव किया जा रहा है। पटना जिले में छोटे झोपड़े या तंग किराये के कमरों में चल रहे केंद्रों को अब पक्के और आधुनिक भवनों में शिफ्ट किया जाएगा। नाबार्ड के सहयोग से शुरू होने वाली इस योजना के तहत बच्चों को सुरक्षित और स्थायी वातावरण मिलेगा, जहां वे पढ़ाई और पोषण दोनों के लाभ प्राप्त कर सकेंगे।


इस मेगा प्लान के पहले चरण में सात प्रमुख अंचल चुने गए हैं, जहां केंद्रों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। जिला प्रशासन ने इस योजना को लागू करने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। नई तकनीक और बेहतर भौतिक संरचना के साथ आंगनबाड़ी केंद्र न केवल बच्चों के लिए सुरक्षित स्थान होंगे, बल्कि उनके सर्वांगीण विकास में भी योगदान देंगे।


इस पहल से न सिर्फ केंद्रों की समय पर खुलने की समस्या हल होगी, बल्कि सेविका-सहायिका की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। बच्चों के शिक्षा और पोषण के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए यह योजना बिहार में बाल विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। भविष्य में इस प्रणाली के विस्तार से पूरे राज्य में सभी आंगनबाड़ी केंद्र प्रभावी और आधुनिक बनेंगे। इस प्रकार, बिहार सरकार की यह पहल तकनीकी, प्रशासनिक और भौतिक सुधार का एक संयुक्त प्रयास है, जिसका लक्ष्य बच्चों के लिए सुरक्षित, स्थायी और गुणवत्तापूर्ण आंगनबाड़ी केंद्र सुनिश्चित करना है।