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18 साल पुराने मामले में BEO सूर्यकांत सिंह को निगरानी कोर्ट ने सुनाई सजा, शिक्षक से 23 हजार रुपये लेते हुआ था गिरफ्तार

पटना निगरानी कोर्ट ने 18 साल पुराने रिश्वत मामले में भोजपुर के पूर्व बीईओ सूर्यकांत सिंह को दोषी करार देते हुए एक साल की सश्रम कैद और 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया। 2007 में शिक्षक से 23 हजार रुपये घूस लेते वे रंगे हाथ पकड़े गए थे।

बिहार
18 साल पुराना रिश्वत मामला
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

PATNA: 18 साल पुराने 23 हजार घूस लेने के मामले में कोईलवर के तत्कालीन प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी सूर्यकांत सिंह को निगरानी कोर्ट ने दोषी करार दिया है। उन्हें एक साल का सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना लगाया गया है। 2007 में एक शिक्षक से स्कूल आवंटित करने के एवज में 23 हजार रुपये घूस लेते निगरानी ने रंगेहाथ पकड़ा था। इसी केस में आज निगरानी कोर्ट ने दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। 


आज दिनांक 12.12.2025 को मो० रूस्तम, माननीय न्यायाधीश, निगरानी, पटना द्वारा अभियुक्त सूर्यकान्त सिंह, तत्कालीन प्रखण्ड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, कोईलवर, जिला-भोजपुर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7/13 (2) सह पठित धारा 13 (1) (d) के तहत निगरानी थाना कांड संख्या-80/2007 (विशेष वाद सं-51/2007) में दोषी ठहराया गया।


पूर्व में यह मामला सूर्यकान्त सिंह, तत्कालीन प्रखण्ड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, कोईलवर, जिला-भोजपुर द्वारा शिकायतकर्ता राजीव रणविजय कुमार से शिक्षक के पद पर नियोजन के उपरांत उन्हें विद्यालय आवंटित करने के एवज में रिश्वत माँगने का आरोप लगाया गया था। जिसमें आरोपी को 23,000/- रूपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तारी की गयी थी।


इस मामले में तत्कालीन अनुसंधानकर्ता पुलिस निरीक्षक, परमानन्द सिंह, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना द्वारा सटीक और समय पर आरोप-पत्र दायर किया गया था। उक्त मामले में बिहार सरकार की ओर से किशोर कुमार सिंह, विशेष लोक अभियोजक, प्रभारी निगरानी (ट्रैप केसेज), पटना ने प्रभावी तरीके से पैरवी की और आरोपी को दोष सिद्ध कराने में सफलता हासिल की है।


सूर्यकान्त सिंह, तत्कालीन प्रखण्ड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, कोईलवर, जिला-भोजपुर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 में 01 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 10,000/- (दस हजार) रूपये का अर्थदण्ड लगाया गया है एवं धारा 1 3(1)(d) में 01 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 10,000/- (दस हजार) रूपये का अर्थदण्ड लगाया गया है। अर्थदण्ड की राशि नहीं जमा करने पर एक महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास होगा। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेगी।


अब तक वर्ष 2025 में कुल भ्रष्टाचार के 28 विभिन्न मामलों में माननीय न्यायालय द्वारा सजा सुनायी जा चुकी है। यह दोषसिद्धि की कार्रवाई मो० रूस्तम, माननीय न्यायाधीश, निगरानी के न्यायालय पटना द्वारा की गई है। पिछले वर्ष 2024 में कुल 18 मामलों में सजा सुनायी गयी थी। इस प्रकार इस वर्ष न्यायालयों द्वारा अधिक मामलों में सजा सुनाये जाने की कार्यवाही की गयी है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा अभियोजन की कार्यवाही लगातार जारी है।

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