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Bihar News : 35 साल पुराने विस्फोट केस में बड़ा फैसला! पूर्व सांसद सूरजभान सिंह समेत 3 आरोपित बरी

बेगूसराय के 35 साल पुराने विस्फोट मामले में बड़ा फैसला आया है। एमपी/एमएलए स्पेशल कोर्ट ने पूर्व सांसद सूरजभान सिंह समेत तीन आरोपितों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। जानिए अदालत ने क्या कहा और पूरा मामला क्या था।

Surajbhan singh
Surajbhan singh
© File photo
Tejpratap
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4 मिनट

Bihar News: करीब 35 वर्ष पुराने बहुचर्चित विस्फोट मामले में बेगूसराय की एमपी/एमएलए स्पेशल कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पूर्व सांसद सूरजभान सिंह, भाजपा के वरिष्ठ नेता राम लखन सिंह और ललन सिंह को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में सफल नहीं हो सका, इसलिए तीनों आरोपितों को संदेह का लाभ दिया जाता है।


यह फैसला एडीजे-2 सह एमपी/एमएलए स्पेशल जज ब्रजेश कुमार सिंह की अदालत ने सुनाया। इसके साथ ही अदालत ने तीनों आरोपितों को उनके बंधपत्रों की जिम्मेदारी से भी मुक्त कर दिया।


1991 में दर्ज हुआ था मामला

जानकारी के अनुसार यह मामला बरौनी थाना कांड संख्या 449/1991 से जुड़ा है। घटना 2 नवंबर 1991 की बताई गई थी। उस समय राम लखन सिंह ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके आवासीय परिसर स्थित गोहाल में तेज धमाका हुआ, जिससे खपरैल की छत उड़ गई और एक व्यक्ति घायल हो गया।


हालांकि, जांच के दौरान पुलिस ने प्रारंभिक शिकायत से अलग निष्कर्ष निकाला। जांच एजेंसी ने बाद में राम लखन सिंह, सूरजभान सिंह और ललन सिंह को ही इस मामले में आरोपित बना दिया और उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया।


लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया

मामले की सुनवाई कई वर्षों तक विभिन्न चरणों से गुजरती रही। आखिरकार 21 अप्रैल 2018 को अदालत ने तीनों आरोपितों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 324, 427, 120बी तथा विस्फोटक अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। इसके बाद अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से साक्ष्य और दलीलें अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गईं।


अभियोजन आरोप साबित नहीं कर सका

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पुलिस गवाहों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आरोप सिद्ध करने का प्रयास किया। लेकिन अदालत ने पाया कि प्रस्तुत साक्ष्य आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।


बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि मामले में आरोपों को पुष्ट करने वाले ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने तीनों आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।


बचाव पक्ष ने जताई संतुष्टि

बचाव पक्ष के अधिवक्ता और पूर्व लोक अभियोजक सैयद मोहम्मद मंसूर आलम ने फैसले के बाद कहा कि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का निष्पक्ष मूल्यांकन किया और इसी आधार पर फैसला सुनाया। उनका कहना था कि अभियोजन पक्ष आरोपों को कानूनी रूप से सिद्ध नहीं कर पाया, जिसके चलते अदालत ने तीनों आरोपितों को बरी करने का आदेश दिया।


फैसले पर नजर

यह मामला तीन दशक से अधिक समय तक न्यायालय में लंबित रहा। ऐसे में इस फैसले को लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। अदालत के आदेश के बाद पूर्व सांसद सूरजभान सिंह, राम लखन सिंह और ललन सिंह अब इस मामले से पूरी तरह मुक्त हो गए हैं।


हालांकि, यह फैसला केवल इस विशेष विस्फोट मामले से संबंधित है और इसका अन्य मामलों या कानूनी प्रक्रियाओं पर कोई स्वतः प्रभाव नहीं माना जाएगा।