Bankipur By Election : पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियों को अंतिम चरण में पहुंचा दिया है। हालांकि चुनाव से ठीक पहले उम्मीदवार बदलने के फैसले ने पार्टी के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है, लेकिन बीजेपी अब इस पूरे घटनाक्रम को संगठन की ताकत और बूथ स्तर की रणनीति के दम पर अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश में जुटी हुई है।
पार्टी ने पहले घोषित उम्मीदवार अभिषेक सिन्हा का नाम वापस लेने के बाद युवा नेता नीरज सिन्हा को चुनाव मैदान में उतारा है। इसके बाद से संगठन पूरी तरह सक्रिय हो गया है और चुनाव प्रचार को बूथ स्तर तक व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा रहा है।
नितिन नवीन की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा है चुनाव
बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय तक बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का विधानसभा क्षेत्र रही है। ऐसे में इस उपचुनाव को केवल एक सीट का चुनाव नहीं बल्कि संगठन की प्रतिष्ठा से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार नितिन नवीन इन दिनों दिल्ली में मौजूद हैं, लेकिन चुनाव अभियान की लगातार निगरानी वहीं से कर रहे हैं। मंडल अध्यक्षों, बूथ प्रभारियों, चुनाव संचालन समिति और कोर टीम के नेताओं के साथ उनकी लगातार फोन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत हो रही है। हर दिन मिलने वाले फीडबैक के आधार पर चुनावी रणनीति में आवश्यक बदलाव भी किए जा रहे हैं।
माइक्रो मैनेजमेंट पर सबसे ज्यादा जोर
बीजेपी ने इस बार चुनाव प्रचार को पूरी तरह माइक्रो मैनेजमेंट मॉडल पर आधारित किया है। पार्टी ने तय किया है कि किस वार्ड में कौन नेता जाएगा, किस मोहल्ले में किस समय जनसंपर्क होगा और किस क्षेत्र में किस स्तर के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। रोड शो, नुक्कड़ सभा, घर-घर संपर्क अभियान, स्थानीय बैठकों और सामाजिक संगठनों के साथ संवाद का पूरा कैलेंडर पहले से तैयार कर लिया गया है। पार्टी का उद्देश्य यह है कि चुनाव प्रचार का कोई भी इलाका या वर्ग छूटने न पाए।
422 बूथों पर अलग-अलग जिम्मेदारियां
बीजेपी की सबसे बड़ी रणनीति बूथ प्रबंधन को मजबूत बनाने की है। बांकीपुर विधानसभा के सभी 422 बूथों के लिए अलग-अलग जिम्मेदार नेताओं और कार्यकर्ताओं की तैनाती की गई है। इनमें विधायक, सांसद, जिला पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष, मोर्चा पदाधिकारी तथा लंबे समय से संगठन में काम कर रहे कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रत्येक प्रभारी को अपने बूथ पर मतदाताओं से लगातार संपर्क बनाए रखने और मतदान के दिन अधिकतम समर्थकों को मतदान केंद्र तक पहुंचाने का लक्ष्य दिया गया है। पार्टी का मानना है कि यदि पारंपरिक समर्थक बड़ी संख्या में मतदान करेंगे तो उम्मीदवार बदलने से पैदा हुई राजनीतिक चुनौती का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
उम्मीदवार बदलने के बाद डैमेज कंट्रोल की कवायद
बीजेपी अब पूरी तरह डैमेज कंट्रोल मोड में दिखाई दे रही है। पार्टी संगठन यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि उम्मीदवार बदलने का फैसला किसी दबाव में नहीं बल्कि भविष्य में संभावित राजनीतिक विवादों से बचने के लिए लिया गया। संगठन के भीतर यह भी बताया जा रहा है कि पुराने मामलों को लेकर विपक्ष को कोई अवसर न मिले, इसलिए समय रहते निर्णय लिया गया। इसके साथ ही पार्टी यह प्रचारित कर रही है कि टिकट किसी बड़े राजनीतिक चेहरे को देने के बजाय संगठन से जुड़े एक जमीनी कार्यकर्ता को दिया गया है।
नीरज सिन्हा को युवा कार्यकर्ता की पहचान दिलाने की कोशिश
चुनाव प्रचार की नई रणनीति में बीजेपी ने युवाओं को विशेष रूप से केंद्र में रखा है। बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं और प्रचारकों को निर्देश दिया गया है कि वे नीरज सिन्हा को क्षेत्र का अपना साथी, मित्र और लंबे समय से संगठन में सक्रिय युवा कार्यकर्ता के रूप में मतदाताओं के बीच प्रस्तुत करें। मोहल्ला स्तर की छोटी बैठकों, घर-घर संपर्क अभियान और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी यही संदेश लगातार प्रसारित किया जा रहा है कि पार्टी ने एक साधारण कार्यकर्ता पर भरोसा जताकर संगठन को सर्वोपरि रखा है।
संगठन सर्वोपरि का संदेश
बीजेपी इस उपचुनाव के माध्यम से यह राजनीतिक संदेश भी देना चाहती है कि पार्टी में केवल बड़े नेताओं या प्रभावशाली परिवारों को ही अवसर नहीं मिलता, बल्कि जमीनी स्तर पर मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को भी आगे बढ़ाया जाता है।पार्टी नीरज सिन्हा को मंडल स्तर से सक्रिय रहे युवा चेहरे और संगठन के समर्पित कार्यकर्ता के रूप में प्रचारित कर रही है। रणनीतिकारों का मानना है कि इससे संगठन के कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और युवाओं के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा।
24 घंटे में बदला उम्मीदवार
बांकीपुर उपचुनाव का सबसे चर्चित घटनाक्रम उम्मीदवार बदलने का रहा। बीजेपी ने पहले अभिषेक सिन्हा को उम्मीदवार घोषित किया, लेकिन घोषणा के करीब 24 घंटे के भीतर उनका नाम वापस लेने का फैसला लिया गया। इसके तुरंत बाद नीरज सिन्हा को नया उम्मीदवार घोषित कर दिया गया।
हालांकि पार्टी ने तेजी से नया प्रत्याशी उतारकर स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष ने इस पूरे मामले को राजनीतिक मुद्दा बना लिया है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर और राष्ट्रीय जनता दल लगातार बीजेपी के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं और इसे चुनावी तैयारी में कमजोरी का संकेत बता रहे हैं।
चुनावी मुकाबले पर सभी की नजर
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव अब केवल स्थानीय चुनाव नहीं रह गया है। उम्मीदवार परिवर्तन, संगठन की सक्रियता, बूथ स्तर की रणनीति और विपक्ष के लगातार हमलों के बीच यह मुकाबला राज्य की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। अब देखना होगा कि बीजेपी का माइक्रो मैनेजमेंट, युवा चेहरे पर दांव और बूथ स्तर की मजबूत रणनीति मतदाताओं को कितना प्रभावित करती है। वहीं विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को कितना बड़ा चुनावी मुद्दा बना पाता है, यह भी नतीजों पर असर डालने वाला महत्वपूर्ण पहलू होगा।





