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एडवांटेज केयर डायलॉग में कॉरपोरेट जगत पर चर्चा, सीएम सिंह बोले- लघु उद्योग और व्यापार धंधे को मिले टैक्स छूट

PATNA : सीएमएस जंक्शन के डायरेक्टर और प्रमोटर चंद्रमणि सिंह ने कहा कि महामारी का असर लघु व छोटे उद्योग-धंधों पर ज्यादा पड़ा है। पिछले तीन-चार माह में बिजनेस का टर्नओवर प्रभावित हुआ

एडवांटेज केयर डायलॉग में कॉरपोरेट जगत पर चर्चा, सीएम सिंह बोले- लघु उद्योग और व्यापार धंधे को मिले टैक्स छूट
First Bihar
9 मिनट

PATNA : सीएमएस जंक्शन के डायरेक्टर और प्रमोटर चंद्रमणि सिंह ने कहा कि महामारी का असर लघु व छोटे उद्योग-धंधों पर ज्यादा पड़ा है। पिछले तीन-चार माह में बिजनेस का टर्नओवर प्रभावित हुआ है। सभी इस समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में कुछ राहत की जरूरत है। अन्यथा बहुत मुश्किल हो जाएंगी। लॉक डाउन के कुछ माह बाद इसका असर देखने को मिलेगा जब एनपीए के अधिक केस आएंगे। इसलिए सरकार को चाहिए कि वो कर में कुछ राहत दे। इसी तरह लोन के सूद में भी राहत मिले। ऐसे धंधों को कुछ वित्तीय सहायता भी मिलनी चाहिए।


चंद्रमणि सिंह एडवांटेज केयर वर्चुअल डायलॉग सीरीज के छठवें एपिसोड में रविवार को बोल रहे थे। शाम चार से पांच बजे के बीच आयोजित इस परिचर्चा का विषय था, ‘ कोरोना वायरस संकट नौकरियों और काम के भविष्य को फिर से परिभाषित कर रहा है।‘ परिचर्चा में बोलते हुए चंद्रमणि सिंह ने कहा कि इस महामारी से कॉरपोरेट जगत को कुछ खास नुकसान नहीं हुआ है। हमलोग सुरक्षित जोन में हैं।  फै क्ट्रियों में मजदूर वापस आ रहे हैं। कंपनियों के मानव संसाधन विभाग कर्मचारियों की नियुक्ति कर रहे हैं। इसलिए बहुत ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। क्योंकि उत्पादन नुकसान नहीं है बल्कि शटडाउन हुआ है। नौकरी पाने  की इच्छा रखने वालों को मेरी सलाह है कि अभी जहां हैं वहीं रहें। उन्होंने कहा कि हालांकि इस महामारी से कॉरपोरेट जगत में नए प्रवेश करनेवालों के लिए थोड़ी चुनौती बढ़ी है। वो थोड़े दबाव में हैं। श्री सिंह ने यह भी कहा कि रिटेलर परेशान हैं। चंद्रमणि सिंह एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया लिमिटेड के पूर्व बिजनेस हेड और वीडियोकोन के पूर्व सीईओ हैं।


विश्व स्तर पर यह चुनौती का वक्त है: मेहनाज परवीन

कार्यक्रम में शिरकत कर रहीं एवीपी की मेहनाज परवीन ने कहा कि निश्चित रूप से विश्व स्तर पर यह चुनौती का वक्त है। विश्व स्तर पर अर्थव्यवस्था बुरी तरह व वृहद स्तर पर प्रभावित हुई हैं। हॉस्पीटलिटी, होटल आदि का क्षेत्र प्रभावित हुआ है। अर्थव्यवस्था बंदी का असर विभिन्न देशों पर पड़ा है। लेकिन आगे बढ़ने की जरूरत है। अपने ऊपर भरोसा रखें। कई ऑनलाइन कोर्स हैं उसे ज्वाइन करें। खुद को और हुनरमंद बनाएं। मार्केट के मांग के अनुसार खुद को ढालें।

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महामारी ने काफी कुछ सिखाया: पंकज बलवरियार

प्रभात खबर अखबार के मार्केटिंग विभाग के नेशनल हेड पंकज बलवरियार ने कहा कि महामारी के दोनों लहर ने काफी कुछ सिखाया। कॉरपोरेट सेक्टर में काफी बदलाव आया है। काम करने का तरीका बदला है। आम जिंदगी में भी बदलाव आया है। अब लोग सामान ऑनलाइन खरीदने लगे हैं। वो सामान का आर्डर रिलेटर को ऑनलाइन दे देते हैं और उनका सामान घर पर पहुंच जाता है। इस बाधा ने हमें सोचने पर बाध्य किया है कि हम कैसे जी सकते हैं। दरअसल, पूरा विश्व ही वर्चुअल हो गया है। मैंने लगभग दो वर्षों से यात्रा नहीं की। लेकिन मेरी कोई मिटिंग नहीं रूकी। सब वर्चुअल हुआ। यहां तक शादियां और मनोरंजन भी वर्चुअल हो गया है। विद्यार्थी ऑनलाइन क्लास कर रहे हैं। लगभग दो वर्ष में ऑनलाइन कोचिंग बूम कर गया है। शॉपिंग वर्चुअल हो गया है। मेरी सलाह है कि स्टार्ट अप को बूस्ट किया जाए। उसे प्रोत्साहित किया जाए। नारा होना चाहिए, ‘हॉस्पिटल यहीं बनाएंगे‘। हर जिले में अधिक से अधिक अस्पताल खुलें।

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लगभग दो वर्ष से बच्चे स्कूल नहीं गए, जीवन में उदासी है: डाॅ. रोमा कुमार

वहीं इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ के वरीय कंसल्टेंट मनोविज्ञान, सर गंगा राम हॉस्पिटल के इंस्टीट्यूट फॉर साइकेट्री एंड वीहेवीयरल साइंसेज की वाइस चेयरपर्सन व मैक्स हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. रोमा कुमार ने कहा कि हमने वर्चुअल कल्चर अपनाया। लेकिन बच्चे लगभग दो वर्ष से स्कूल नहीं गए हैं। एक उदासी है। मेरे ख्याल से समय चीजों को अलग तरीके से देखने का है। दुःख बहुत बड़े पैमाने पर आया है। मेरे ख्याल से चुनौती को गले लगाने का समय है। लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाई जाए। सामाज में मानसिक स्वास्थ्य को कलंक बना दिया गया है। हम इस पर बात ही नहीं करते। जरूरत है कि हम खुद पर ध्यान दें। मुझे लगता है कि शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य ऐसे बड़े क्षेत्र हैं, जिस पर काम करने की आवश्यकता है। मानसिक स्वास्थ्य की पढ़ाई को अनिवार्य किया जाए। अस्पतालों में मनोचिकित्सक या मनोविज्ञानी ही नहीं होते हैं।


अपने ऊपर काम करने की जरूरत: संचिता सिंह

पिज्जा हट एशिया पेसिफिक की चीफ पीपल ऑफिसर संचिता सिंह ने कहा कि इस महामारी में किसी की नौकरी चली गई या नहीं भी गई है तो भी अपने ऊपर काम करने की आवश्यकता है। दो-तीन माह में ही हम अपने आप को भूल गए। इसलिए खुद पर काम करने की आवश्यकता है। ख्ुाद के बारे में योजना बनाएं। आज सभी चीज डिजिटल हो रही हैं। मेरा मानना है कि सभी के अंदर कुछ अदभूत होता है। यही जीवन की सुंदरता है। पहले माना जाता था कि घर से काम करने से उत्पादकता प्रभावित होती है। लेकिन हालिया शोध इससे अलग बयां करता है। मेरा सुझाव है कि देश में ज्यादा से ज्यादा टीकाकरण हो। स्वास्थ्य संसाधन पर ध्यान दिया जाए। यदि यह नहीं किया जाता है तो कोरोना जैसी महामारी परेशान करती रहेगी।


अररिया में जुलाई से शुरू होगा 40 बेड का अस्पताल: डाॅ. ए. ए. हई

डॉ. हई ने बताया कि अररिया की आबादी 28 लाख है। लेकिन यहां पुरे जिला के अस्पतालों में केवल 400 बेड हैं। ये बेहद निराशाजनक आंकड़ा है। ऐसे में हम लोग वहां भी इसी तरह एक सेंटर खोलने का प्रयास कर रहे हैं। जुलाई में यह अस्पताल शुरू हो जाने की उम्मीद है। यह सेंटर 40 बेड का होगा। ऑक्सीजन आपूर्ति की व्यवस्था की जा रही है। इस सेंटर को खोलने में कई लोग मदद के लिए आगे आए हैं। जिनमें सीएम सिंह (अररिया), बीबी प्रसाद (आराध्चेन्नई), शकील अख्तर (डी.जी.पी, चेन्नई), डॉ रविकांत (सर्जन, लखनऊ), डॉ. शारीक नजीर (अमेरिका), डॉ. सईद मल्लिक (अमेरिका), डाॅ. फरहत हसन (पटना), हई फाउंडेशन, एडवांटेज केयर एवं मर्शी मिशन आदि शामिल हैं। सेंटर खोलने के लिए एक इंजीनियर मंजूर आलम ने अपना भवन दिया है।


इस संकट की घड़ी में साथ हैं हम, 5 गाँव को भी गोद लिया: खुर्शीद अहमद

एडवांटेज केयर की स्थापना एडवांटेज सपोर्ट के अंतर्गत स्वास्थ्य संबंधी वर्तमान समस्या को देखते हुए इसी वर्ष किया गया है। एडवांटेज ग्रुप ने सीएसआर (कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व) के लिए एडवांटेज सपोर्ट की स्थापना वर्ष 2007 में की थी। प्रसिद्ध सर्जन डॉ. ए.ए. हई एडवांटेज सपोर्ट के अध्यक्ष हैं। खुर्शीद अहमद एडवांटेज सपोर्ट के सचिव हैं। दो एंबुलेंस भी मुफ्त में शहरवासियों को उपलब्ध कराया है, अबतक 20 लोगों ने इस सेवा का लाभ उठाया है। यही नहीं, एडवांटेज केयर अस्पताल में भर्ती मरीज के 6000 परिजनों एवं जरूरतमंदों को खाना खिला चुके हैं। एडवांटेज केयर लोगों को कोरोना टीकाकरण के लिए जागरूक बना रही है और अबतक 100 लोगों का टीकाकरण करवा चुकी है।

उन्होंने कहा कि जब बिहार को ‘ऑक्सीजन संकट‘ का सामना करना पड़ा, तो हम मुफ्त ऑक्सीजन सिलेंडर देने के लिए आगे आए। जब राज्य को ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत थी, तो हमने मुफ्त ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराए। पूरे बिहार (दरभंगा और पटना) में 50़ लोगों की जान बचाई गई। जब बिहार ने कहा ‘‘टीका लगाने का समय आ गया है‘‘ हमने पटना के टीकाकरण की पहल की। जब बिहार को चाहिए था मरीजों को अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाना हमने जरूरतमंदों के लिए मुफ्त एम्बुलेंस सेवा शुरू की। जब कोविड महामारी के कारण बच्चों ने अपना परिवार खो दिया हम परिवार की तरह उनके साथ खड़े रहे। जब गांवों ने ‘चिकित्सा सहायता‘ की मांग की हमने अररिया (पूर्णिया), मधुबनी, सीवान, गया, पटना को सहारा देने के लिए बिहार के 5 गांवों को गोद लिया। मानव सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं आओ मिलकर मानवता की सेवा करें!


एडवांटेज केयर डायलाॅग सीरीज मिशन हेल्थ एवं एडवोकेसी में अबतक 6 एपीसोड हो चुके हैं। इसी श्रृंखला का अगला दो एपीसोड रविवार 20 जून 2021 को होगा जिसमें चर्चा का विषय होगा मिडीया, होप एवं सेफ्टी आफ दी चाइल्डहुड।