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Bihar News: पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बिना कोर्ट आदेश नहीं रुकेगी लगान रसीद, रद्द नहीं होगी सालों पुरानी जमाबंदी

पटना हाईकोर्ट ने कहा कि बिना सक्षम कोर्ट आदेश के वर्षों पुरानी लगान रसीद रोकना और जमाबंदी रद्द करना गैरकानूनी है।

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Tejpratap
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Bihar News : बिहार में जमीन से जुड़े मामलों को लेकर पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि बिना सक्षम न्यायालय के आदेश के किसी व्यक्ति की वर्षों से चली आ रही लगान रसीद पर रोक लगाना और जमाबंदी (भूमि रिकॉर्ड में दर्ज अधिकार) को रद्द करना कानून के खिलाफ है।


हाईकोर्ट ने एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि राजस्व अधिकारियों को भी कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। केवल प्रशासनिक स्तर पर किसी की जमीन की जमाबंदी खत्म नहीं की जा सकती और न ही लंबे समय से जारी लगान रसीद को बिना उचित कारण के रोका जा सकता है।


वर्षों से चल रही जमाबंदी को रद्द करने पर उठे सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि उनकी जमीन की जमाबंदी लंबे समय से चली आ रही थी और नियमित रूप से लगान रसीद भी कट रही थी। इसके बावजूद बिना किसी न्यायिक आदेश के राजस्व विभाग की ओर से लगान रसीद काटने पर रोक लगा दी गई और जमाबंदी को समाप्त करने की कार्रवाई की गई।


याचिकाकर्ता ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए पटना हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के बाद अदालत ने माना कि इस तरह की कार्रवाई से व्यक्ति के संपत्ति संबंधी अधिकार प्रभावित होते हैं।


राजस्व अधिकारियों को प्रक्रिया का पालन करना होगा

हाईकोर्ट ने कहा कि जमीन से जुड़े मामलों में अधिकारियों को निर्धारित नियमों और कानून के अनुसार ही कार्रवाई करनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति की जमीन का रिकॉर्ड बदलने या समाप्त करने से पहले उसे उचित अवसर देना जरूरी है।


अदालत ने यह भी साफ किया कि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नाम या जमाबंदी को सिर्फ प्रशासनिक आदेश के आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता। इसके लिए कानूनी प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारी के आदेश का पालन आवश्यक है।


जमीन मालिकों के लिए राहत भरा फैसला

पटना हाईकोर्ट के इस फैसले को राज्य के हजारों जमीन मालिकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बिहार में जमीन विवाद और जमाबंदी से जुड़े मामले बड़ी संख्या में सामने आते हैं। ऐसे मामलों में कई बार बिना स्पष्ट न्यायिक आदेश के राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव की शिकायतें आती रही हैं।


अदालत के इस फैसले से यह संदेश गया है कि जमीन संबंधी रिकॉर्ड में बदलाव करते समय पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है।


लगान रसीद और जमाबंदी का महत्व

लगान रसीद जमीन पर सरकार को राजस्व भुगतान का प्रमाण होती है, जबकि जमाबंदी भूमि रिकॉर्ड में मालिकाना हक और कब्जे से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। हालांकि केवल लगान रसीद या जमाबंदी अपने आप में अंतिम स्वामित्व प्रमाण नहीं होती, लेकिन लंबे समय से चले आ रहे रिकॉर्ड को बिना प्रक्रिया के समाप्त करना उचित नहीं है।


पटना हाईकोर्ट के इस फैसले ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं और अधिकारियों को कानून के दायरे में रहकर काम करने का निर्देश दिया है।