Cyber Fraud: बिहार की राजधानी पटना समेत कई इलाकों में साइबर अपराधियों का नया खेल तेजी से फैल रहा है, जहां अब ठग सीधे मोबाइल हैक कर लोगों के बैंक खातों से पैसे उड़ा रहे हैं। पिछले एक महीने में ही ऐसे करीब सौ मामले सामने आने से पुलिस भी अलर्ट मोड में आ गई है और आम लोगों के लिए यह एक बड़ी चेतावनी बनकर सामने आया है।
जानकारी के मुताबिक, साइबर अपराधी पहले लोगों को फोन कर खुद को बैंक अधिकारी बताकर झांसे में लेते हैं। वे खाते से जुड़ी समस्या, केवाईसी अपडेट या अन्य तकनीकी गड़बड़ी का हवाला देकर लोगों का भरोसा जीतते हैं, इसके बाद उनके मोबाइल पर एक एपीके (APK) फाइल भेजी जाती है और उसे डाउनलोड या क्लिक करने के लिए कहा जाता है। जैसे ही कोई व्यक्ति इस फाइल को ओपन करता है, उसका मोबाइल पूरी तरह हैक हो जाता है।
मोबाइल हैक होते ही अपराधी फोन का पूरा एक्सेस अपने हाथ में ले लेते हैं। वे न सिर्फ बैंक से जुड़े मैसेज पढ़ लेते हैं, बल्कि स्क्रीन शेयरिंग और कॉल फॉरवर्डिंग के जरिए ओटीपी और अन्य जरूरी जानकारी भी हासिल कर लेते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि 21# जैसे कोड के जरिए कॉल फॉरवर्डिंग एक्टिव कर दी जाती है, जिससे फोन पर आने वाले कॉल और मैसेज सीधे अपराधियों तक पहुंचने लगते हैं।
साइबर डीएसपी नीतीश चंद्र धारिया के अनुसार, इन दिनों कॉल फॉरवर्डिंग और एपीके फाइल के जरिए ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं। अपराधी बेहद शातिर तरीके से प्रोग्रामिंग कर रहे हैं, जिससे मोबाइल यूजर को भनक तक नहीं लगती और कुछ ही देर में उसके खाते से पैसे साफ हो जाते हैं।
इतना ही नहीं, मोबाइल हैक होने के बाद अपराधी उसी नंबर से नया व्हाट्सएप अकाउंट बनाकर पीड़ित के जान-पहचान वालों को मैसेज भेजते हैं और पैसे मांगते हैं। कई लोग इसे असली समझकर पैसे भेज देते हैं और खुद भी ठगी का शिकार हो जाते हैं।
हाल ही में गोरियाटोली के एक व्यक्ति के साथ ऐसा ही मामला सामने आया, जहां उनके दोस्त के मोबाइल से मैसेज आया कि उसे पैसों की जरूरत है। भरोसा कर उन्होंने जैसे ही लिंक पर क्लिक किया, उनके खाते से 48 हजार रुपये गायब हो गए। इसी तरह गर्दनीबाग के एक अन्य व्यक्ति के खाते से भी करीब 50 हजार रुपये की निकासी कर ली गई। जांच में पता चला कि इन कॉल्स का लिंक शेखपुरा से जुड़ा हुआ था।
लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए पटना साइबर पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया है, जो इन घटनाओं की गहराई से जांच कर रही है और गिरोह तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है।
कैसे बचें इस साइबर ठगी से
ऐसे मामलों से बचने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है। किसी भी अनजान एपीके फाइल को कभी डाउनलोड न करें और व्हाट्सएप की ऑटो डाउनलोड सेटिंग को बंद रखें। मोबाइल में हमेशा टू-स्टेप वेरिफिकेशन चालू रखें और किसी भी संदिग्ध लिंक या स्कैनर को ओपन करने से बचें। खासतौर पर 21# जैसे कोड वाले मैसेज से दूर रहें और उन पर कोई प्रतिक्रिया न दें।
साइबर अपराधियों के बदलते तरीकों को देखते हुए अब सिर्फ सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है, क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही आपकी मेहनत की कमाई को पलभर में गायब कर सकती है।





