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पद्म पुरस्कार से सम्मानित कृषि वैज्ञानिक डॉ. गोपालजी त्रिवेदी का निधन, बिहार में शोक की लहर

Dr Gopalji Trivedi: पद्म पुरस्कार से सम्मानित कृषि वैज्ञानिक और पूर्व कुलपति डॉ. गोपालजी त्रिवेदी का पटना के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन से बिहार के कृषि और शिक्षा जगत में शोक की लहर है।

Dr Gopalji Trivedi
नहीं रहे डॉ. गोपालजी त्रिवेदी
© Google
Mukesh Srivastava
3 मिनट

Dr Gopalji Trivedi: शिक्षा और कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पद्म पुरस्कार से सम्मानित डॉ. गोपालजी त्रिवेदी का निधन हो गया है। उन्होंने पटना के मेदांता अस्पताल में अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि सांस लेने में तकलीफ के चलते उन्हें दो दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 93 वर्ष की आयु में उनके निधन की खबर से मुजफ्फरपुर समेत पूरे बिहार में शोक की लहर दौड़ गई है।


डॉ. गोपालजी त्रिवेदी को हाल ही में भारत सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वे मुजफ्फरपुर जिले के बंदरा प्रखंड स्थित मतलुपुर गांव के रहने वाले थे। इसी वर्ष 25 जनवरी को उन्हें यह सम्मान घोषित किया गया था। वे डॉ. राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के पूर्व कुलपति भी रह चुके थे।


15 फरवरी 1930 को जन्मे डॉ. त्रिवेदी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने पूसा से आगे की पढ़ाई की, जबकि इंटरमीडिएट की शिक्षा मुजफ्फरपुर के एलएस कॉलेज से पूरी की। उन्होंने भागलपुर के सबौर कृषि महाविद्यालय से बीएससी एग्रीकल्चर और पोस्ट ग्रेजुएशन किया, जिसके बाद भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।


1961 में उन्होंने तिरहुत कृषि महाविद्यालय, ढोली में प्रोफेसर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। बाद में वे राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय में निदेशक बने और 1988 से 1992 तक कुलपति के पद पर कार्यरत रहे। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने कृषि और ग्रामीण विकास से अपना जुड़ाव बनाए रखा।


उन्होंने अपने गांव में लीची उत्पादन को बढ़ावा दिया और आधुनिक खेती, विंटर मक्का तथा मत्स्यपालन आधारित कृषि प्रणाली को प्रोत्साहित कर किसानों को नई तकनीकों से जोड़ा। हाल ही में एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि भारत गांवों का देश है और गांवों को मजबूत करना ही उनका जीवन का सबसे बड़ा संकल्प रहा। डॉ. गोपालजी त्रिवेदी का निधन बिहार के कृषि और शिक्षा क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता