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नेपाल बॉर्डर के पास अब 160 की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें, 4079 करोड़ की मेगा परियोजना शुरू, जाने किन लोगों को होगा फायदा

Bihar Rail New Project: बिहार में नेपाल सीमा से सटे रेलखंडों पर बड़ा विकास होने जा रहा है। मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-दरभंगा-रक्सौल रेललाइन का दोहरीकरण कर ट्रेनों की रफ्तार 160 किमी/घंटा की जाएगी। इस परियोजना पर 4079.5 करोड़ खर्च होंगे...

नेपाल बॉर्डर के पास अब 160 की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें, 4079 करोड़ की मेगा परियोजना शुरू, जाने किन लोगों को होगा फायदा
Ramakant kumar
3 मिनट

Bihar Rail New Project: नेपाल सीमा से सटे बिहार के इलाकों में जल्द ही रेलवे की तस्वीर बदलने वाली है। भारतीय रेलवे ने मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-दरभंगा-रक्सौल-नरकटियागंज रेलखंड पर ट्रेनों की रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटा तक बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है। इसके लिए 255 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के दोहरीकरण और सुदृढ़ीकरण की बड़ी परियोजना पर काम शुरू होने जा रहा है। इस पूरी परियोजना पर करीब 4079.5 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।


रेलवे ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को सामरिक और पर्यटन दोनों दृष्टिकोण से बेहद अहम माना है। यही वजह है कि इसे इमरजेंसी वर्क श्रेणी में शामिल किया गया है। रेलवे बोर्ड से परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है और अब जल्द ही जमीन पर काम शुरू होने की उम्मीद है।


फिलहाल उत्तर बिहार के इस रेलखंड पर ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटा है, लेकिन नई डबल लाइन और भारी रेल पटरी बिछने के बाद ट्रेनें 160 की स्पीड से दौड़ सकेंगी। इसके लिए 60 किलोग्राम वजन वाली मजबूत रेल पटरियों का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि हाई स्पीड के साथ भारी मालगाड़ियों का दबाव भी आसानी से संभाला जा सके।


रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस रेलखंड पर अभी क्षमता से कहीं ज्यादा ट्रैफिक का दबाव है। वर्तमान में लाइन की क्षमता का 91 प्रतिशत से अधिक इस्तेमाल हो रहा है, जबकि मरम्मत और मेंटेनेंस के दौरान यह दबाव 107 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। अनुमान है कि वर्ष 2029 तक यह दबाव 242 प्रतिशत से ज्यादा हो जाएगा। ऐसे में डबल लाइन बनना बेहद जरूरी माना जा रहा है।


सिंगल लाइन होने की वजह से फिलहाल रोजाना कई मालगाड़ियों को घंटों तक रुकना पड़ता है। इस रूट से प्रतिदिन 11 जोड़ी यात्री और एक्सप्रेस ट्रेनें तथा 23 से 25 मालगाड़ियां गुजरती हैं। दोहरीकरण के बाद ट्रेनों की संख्या भी बढ़ेगी और बिना रुके तेज गति से परिचालन संभव हो सकेगा।


इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा नेपाल सीमा से जुड़े इलाकों को मिलेगा। रेलवे का मानना है कि इससे सेना और जरूरी सामानों की आवाजाही और तेज होगी, जिससे देश की सामरिक ताकत मजबूत होगी। साथ ही सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, दरभंगा और मुजफ्फरपुर जैसे जिलों की रेल कनेक्टिविटी भी काफी बेहतर हो जाएगी।


परियोजना के तहत 17 नदियों और 288 नालों पर कुल 307 पुल और पुलियों का निर्माण किया जाएगा। यह रेल लाइन पांच बड़े जंक्शन, 24 स्टेशनों और 17 हाल्ट से होकर गुजरेगी। दिल्ली की एजेंसी मैट्रिक्स जियो सॉल्यूशन ने इस पूरे प्रोजेक्ट का फाइनल लोकेशन सर्वे पूरा कर लिया है।

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