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JDU में महाभारत! नहीं लूंगा ललन सिंह से आशीर्वाद,मुझे परेशान किया,भड़के नीरज कुमार ने केंद्रीय मंत्री को जमकर सुनाया

पटना स्नातक सीट पर जीत के बाद नीरज कुमार के तेवर तल्ख हैं। ललन सिंह को फोन करने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति का कर्ज सूद समेत लौटाएंगे। अनंत सिंह पर भी पलटवार किया। जानिए JDU के भीतर बढ़ते विवाद की पूरी कहानी।

JDU में महाभारत! नहीं लूंगा ललन सिंह से आशीर्वाद,मुझे परेशान किया,भड़के नीरज कुमार ने केंद्रीय मंत्री को जमकर सुनाया
Tejpratap
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7 मिनट

बिहार की राजनीति में पटना स्नातक विधान परिषद सीट का चुनाव खत्म हो गया है, लेकिन इसके बाद शुरू हुई बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है। जेडीयू के विधान पार्षद नीरज कुमार की जीत के बाद अब पार्टी के भीतर की खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। खासकर केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह को लेकर पूछे गए सवालों पर नीरज कुमार के जवाब ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।नीरज कुमार ने साफ शब्दों में कहा है कि वह ललन सिंह को बधाई लेने के लिए फोन नहीं करेंगे।


उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर चुनाव के दौरान उन्हें इतनी परेशानी क्यों झेलनी पड़ी और इसमें उनका कसूर क्या था? इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में लिया गया कर्ज वह सूद समेत लौटाएंगे। उनके इस बयान को चुनाव के दौरान पार्टी के भीतर बने तनाव और नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है।


ललन सिंह को फोन करने के सवाल पर नीरज का दो टूक जवाब

दरअसल, पटना स्नातक सीट पर जीत के बाद नीरज कुमार से जब पूछा गया कि क्या वह ललन सिंह को बधाई लेने के लिए फोन करेंगे, तो उन्होंने स्पष्ट कहा, 'सवाल ही पैदा नहीं होता है।' इसके बाद उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए पूछा कि आखिर इस पूरे चुनावी प्रकरण में उनका गुनाह क्या था?

नीरज कुमार का कहना था कि उन्हें चुनाव की प्रक्रिया के दौरान इतनी परेशानियों का सामना क्यों करना पड़ा, इसका जवाब मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें जिन लोगों से बधाई मिलनी चाहिए, वे सोशल मीडिया और दूसरे माध्यमों से बधाई दे रहे हैं। कार्यकर्ताओं का उन्हें भरपूर प्यार मिला है और यही उनके लिए महत्वपूर्ण है। उनके इस बयान ने जेडीयू के भीतर चुनाव को लेकर चल रही खींचतान को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि, नीरज कुमार ने अपने बयान में किसी पर सीधे तौर पर चुनाव में बाधा डालने का आरोप साबित नहीं किया, लेकिन उनके सवालों से यह साफ है कि वह पूरे घटनाक्रम से संतुष्ट नहीं हैं।


‘राजनीति का कर्ज सूद समेत लौटाऊंगा’, आखिर किसे दिया संदेश?

नीरज कुमार के बयान का सबसे चर्चित हिस्सा उनका राजनीतिक कर्ज वाला तंज रहा। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता और पूर्वजों ने उन्हें यही सीख दी है कि अगर किसी से कर्ज लेना तो उसे लौटा भी देना। उन्होंने आगे कहा कि राजनीति के कर्ज को वह सूद समेत लौटा देंगे।


अब सवाल यह है कि नीरज कुमार का यह संदेश आखिर किसके लिए था? क्या यह चुनाव के दौरान उनके खिलाफ खड़े हुए लोगों के लिए चेतावनी है या फिर पार्टी के भीतर अपनी नाराजगी जाहिर करने का तरीका? नीरज ने किसी का नाम लेकर इस कर्ज का हिसाब नहीं बताया, लेकिन उनके बयान ने अटकलों को जरूर हवा दे दी है।


पटना स्नातक सीट के चुनाव में नीरज कुमार के खिलाफ जेडीयू विधायक अनंत सिंह के प्रचार करने और उनकी जमानत जब्त कराने की चुनौती देने से विवाद पहले ही गहरा गया था। ऐसे में नीरज के ताजा बयान को उसी राजनीतिक टकराव की अगली कड़ी माना जा रहा है।


अनंत सिंह को भी दिया करारा जवाब

अनंत सिंह से जब पूछा गया था कि क्या नीरज कुमार उन्हें बधाई लेने के लिए फोन करेंगे, तो उन्होंने जवाब दिया था कि वह नीरज को बधाई क्यों देंगे? अब नीरज कुमार ने भी इस सवाल पर पलटवार किया है।उन्होंने कहा कि क्या वह ऐसे लोगों से बधाई लेने के लिए फोन करेंगे? क्या उनकी राजनीति की पहचान अब सिर्फ इतनी रह गई है कि वह लोगों को फोन करके बधाई मांगते फिरें? नीरज ने सवालिया लहजे में कहा कि क्या वह राजनीति में इसी काम के लिए पैदा हुए हैं?उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसे लोगों से बधाई लेने पर तो और पाप चढ़ता है। उनके इस बयान से साफ है कि चुनावी नतीजे आने के बाद भी अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच जुबानी जंग खत्म नहीं हुई है।


‘धनबल और बाहुबल की राजनीति नहीं चलेगी’

नीरज कुमार ने अपने चुनाव को धर्म और अधर्म की लड़ाई करार दिया। उन्होंने कहा कि पटना स्नातक सीट पर मुकाबला केवल चुनावी जीत-हार का नहीं था, बल्कि सिद्धांतों की लड़ाई थी। उनके मुताबिक, इस लड़ाई में पार्टी और एनडीए मजबूती से उनके साथ खड़े रहे।

जब उनसे पूछा गया कि उनकी ही पार्टी के विधायक उनके खिलाफ प्रचार कर रहे थे और जमानत जब्त कराने की बात कह रहे थे, तो उन्होंने कहा कि अब धनबल और बाहुबल की राजनीति नहीं चलेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक उनका जमीर जिंदा है, दुनिया की कोई ताकत उसे झुका नहीं सकती। जमानत जब्त कराने की चुनौती देने वालों पर कटाक्ष करते हुए नीरज ने पूछा कि अब उनकी अपनी तबीयत कैसी है और कहीं उनका बीपी तो नहीं बढ़ गया है। यह बयान उनके चुनावी विरोधियों पर सीधा राजनीतिक तंज माना जा रहा है।


सुलह की कोशिश पर क्या बोले नीरज? ललन सिंह पर फिर टिकी नजरें

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद को लेकर जब सुलह की कोशिशों पर सवाल किया गया, तो नीरज ने कहा कि उन्होंने सुलहनामा कराने की कोई कोशिश नहीं की। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि पार्टी के धर्म का पालन सभी को करना चाहिए।

नीरज ने अपने मतदान केंद्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि उनके बूथ पर एनडीए को जितने वोट मिले, उतने वोट किसी दूसरे मतदान केंद्र पर आए हों तो दिखाया जाए। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर वह किससे लड़ रहे थे, यह दुनिया समझती है और इसके लिए किसी को इशारा करने की जरूरत नहीं है।

उनका यह बयान भी काफी अहम है, क्योंकि चुनाव के दौरान पार्टी के भीतर किसका समर्थन किस उम्मीदवार के साथ था, इसे लेकर सवाल उठते रहे हैं। नीरज ने यह भी कहा कि राजनीतिक घरों में किसे नुकसान हुआ है, इसका एहसास सबको होगा।

फिलहाल, पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार की जीत के बाद जेडीयू के अंदर का विवाद नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। ललन सिंह को फोन नहीं करने का ऐलान, राजनीति का कर्ज सूद समेत लौटाने की बात और अनंत सिंह पर तीखा पलटवार—इन तीनों ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद को शांत करने के लिए कोई पहल करता है या फिर नेताओं के बीच बयानबाजी का दौर आगे भी जारी रहता है।