पटना: शारदीय नवरात्रि का उत्साह पूरे देश में चरम पर है। 11 अक्टूबर को मां शैलपुत्री की पूजा के साथ शुरू हुआ नवरात्रि का पावन पर्व अब दूसरे दिन पहुंच चुका है। सोमवार, 12 अक्टूबर को मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाएगी। मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी तप, त्याग, संयम और दृढ़ संकल्प की प्रतीक हैं। यही वजह है कि नवरात्रि के दूसरे दिन उनकी आराधना को मन को स्थिर करने और कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने से जोड़कर देखा जाता है।
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप बेहद शांत और तेजस्वी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और उनके एक हाथ में जपमाला तथा दूसरे हाथ में कमंडल होता है। मां का यह स्वरूप साधकों को संदेश देता है कि जीवन में किसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए तप, अनुशासन और निरंतर प्रयास जरूरी है।
मानसिक शांति और आत्मबल की कामना से होती है आराधना
ज्योतिषाचार्य पंडित राजन उपाध्याय के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मसंयम और सकारात्मक सोच का भी प्रतीक है। उनकी आराधना से भक्त मन की एकाग्रता, धैर्य और आत्मविश्वास बढ़ाने की कामना करते हैं। मान्यता है कि मां की उपासना व्यक्ति को लोभ, अहंकार, ईर्ष्या और स्वार्थ जैसी प्रवृत्तियों से दूर रहने की प्रेरणा देती है। मां ब्रह्मचारिणी को सफेद रंग के फूल विशेष प्रिय माने जाते हैं। पूजा के दौरान मां को सफेद पुष्प, अक्षत, चंदन और फल अर्पित किए जा सकते हैं। इसके अलावा खीर और सफेद रंग की मिठाई का भोग भी लगाया जाता है।
ऐसे करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
नवरात्रि के दूसरे दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई कर गंगाजल का छिड़काव करें। दीपक जलाकर मां दुर्गा और मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान करें। इसके बाद मां को फूल, अक्षत, चंदन और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। फल और मिठाई का भोग लगाने के बाद मां के मंत्र का जाप करें।
पूजा के अंत में दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ कर मां की आरती करें और परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें। पंडित राजन उपाध्याय के अनुसार, पूजा में विधि-विधान के साथ श्रद्धा, एकाग्रता और मन की शुद्धता का भी विशेष महत्व है।
मां ब्रह्मचारिणी का पूजा मंत्र
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना के लिए इस मंत्र का जाप किया जाता है-
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
मां की स्तुति के लिए यह श्लोक भी पढ़ा जाता है-
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
12 अक्टूबर के प्रमुख शुभ मुहूर्त
वाराणसी पंचांग के अनुसार 12 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:16 बजे से 5:05 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त 11:21 बजे से 12:07 बजे तक है। वहीं विजय मुहूर्त दोपहर 1:41 बजे से 2:28 बजे तक और अमृत काल शाम 4:06 बजे से 5:34 बजे तक रहेगा। हालांकि ये सामान्य शुभ मुहूर्त हैं, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए कोई एक अनिवार्य समय निर्धारित नहीं माना गया है। श्रद्धालु अपनी सुविधा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा कर सकते हैं।
नवरात्रि में नवार्ण मंत्र का भी विशेष महत्व
नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की आराधना के साथ नवार्ण मंत्र के जाप को भी विशेष महत्व दिया जाता है। यह मंत्र है-
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंत्र के बीजाक्षरों को देवी की अलग-अलग शक्तियों से जोड़ा जाता है। ‘ऐं’ को ज्ञान, ‘ह्रीं’ को महालक्ष्मी और ‘क्लीं’ को महाकाली की शक्ति से संबंधित माना जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार इस मंत्र का जाप कर सकते हैं। सामान्य रूप से 108 बार जाप के लिए एक माला का प्रयोग किया जाता है।
पंडित राजन उपाध्याय के अनुसार, नवरात्रि का उद्देश्य सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। इन नौ दिनों में संयम, सदाचार, आत्मचिंतन और सकारात्मक विचारों को जीवन में उतारने का भी संदेश मिलता है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा इसी तप, धैर्य और आत्मसंयम की भावना को मजबूत करने का अवसर मानी जाती है।





