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Bihar News : तस्करों की गोली नहीं, अपनी ही टीम की राइफल से गई सिपाही अजीत की जान? महिला दारोगा समेत 3 हिरासत में

बिहार के नालंदा में सिपाही अजीत की मौत के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। पहले शराब तस्करों की फायरिंग की बात कही गई, लेकिन जांच में अपनी ही टीम की राइफल से गोली लगने की बात सामने आई है। महिला दारोगा समेत तीन लोग हिरासत में हैं।

Bihar News : तस्करों की गोली नहीं, अपनी ही टीम की राइफल से गई सिपाही अजीत की जान? महिला दारोगा समेत 3 हिरासत में
Tejpratap
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Bihar News : बिहार के नालंदा में उत्पाद विभाग के सिपाही अजीत की मौत ने पूरी कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस घटना को शुरुआत में शराब तस्करों की फायरिंग बताया जा रहा था, जांच आगे बढ़ने पर उसकी कहानी ही बदलती नजर आ रही है। अब सामने आई जानकारी के मुताबिक, अजीत को गोली शराब तस्करों ने नहीं, बल्कि अपनी ही टीम के एक होमगार्ड जवान की राइफल से लगी थी। अगर जांच में यह बात साबित होती है, तो सवाल सिर्फ गोली चलने का नहीं होगा, बल्कि यह भी होगा कि आखिर घटना के बाद अधिकारियों को क्या बताया गया और सच्चाई सामने आने में इतनी देर क्यों हुई?


इस मामले में घटना के समय टीम का नेतृत्व कर रही महिला दारोगा पुष्पा कुमारी और दो जवानों को हिरासत में लिया गया है। गोली चलाने वाले होमगार्ड जवान समेत संबंधित कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की बात भी सामने आई है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शराब तस्करों की फायरिंग की शुरुआती कहानी बिना पूरी जांच के सामने रख दी गई थी? क्या किसी ने जानबूझकर घटना की असली परिस्थितियों को छिपाने की कोशिश की? फिलहाल इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिल सकेगा।


घटना गुरुवार को उस समय हुई, जब उत्पाद विभाग की टीम शराब की खेप लेकर जा रहे एक वाहन का पीछा कर रही थी। इसी दौरान सिपाही अजीत को गोली लग गई। शुरुआती जानकारी में दावा किया गया कि शराब तस्करों की गोलीबारी में वह घायल हुए हैं। ड्यूटी के दौरान अपराधियों से मुठभेड़ में जवान के घायल होने की बात सामने आने के बाद मामला सामान्य कार्रवाई से जुड़ा लग रहा था। लेकिन बाद में गोली चलने की परिस्थितियों को लेकर जो तथ्य सामने आए, उन्होंने पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े कर दिए। आखिर गोली चली कैसे? क्या वाहन का पीछा करने के दौरान अफरातफरी मची थी? क्या किसी जवान की राइफल से गलती से गोली चल गई या इसके पीछे कोई दूसरी परिस्थिति थी? टीम में मौजूद दूसरे जवानों ने गोली चलने की घटना को किस तरह देखा? इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी है। क्योंकि किसी सरकारी टीम के ऑपरेशन के दौरान अपने ही साथी की गोली से एक जवान की मौत होना बेहद गंभीर मामला है।


गोली लगने के बाद अजीत को पहले पावापुरी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने पर उन्हें पटना रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। एक जवान की जान बचाने की कोशिश के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि घटना के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस को पूरी जानकारी क्यों नहीं दी गई? सामने आई जानकारी के अनुसार, टीम के नालंदा से बाहर निकलने के बाद फोन पर अजीत के शराब तस्करों की फायरिंग में घायल होने की सूचना दी गई। इसके बाद पुलिस ने मामले की पड़ताल शुरू की।


अब जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि घटना के बाद अधिकारियों को जो जानकारी दी गई, वह वास्तविक परिस्थितियों से मेल खाती थी या नहीं। अगर शुरुआती सूचना और जांच में सामने आए तथ्यों में अंतर है, तो यह अंतर क्यों पैदा हुआ? क्या यह गलतफहमी थी, किसी की लापरवाही थी या जानबूझकर तथ्यों को छिपाया गया? इन सवालों पर जांच एजेंसियों की नजर है। हालांकि, किसी भी अधिकारी या जवान की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।


मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी गठित की गई है। जांच टीम शराब की खेप लेकर जा रहे वाहन और उससे जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटी है। इस सिलसिले में जांच टीम के झारखंड जाने की भी जानकारी सामने आई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शराब कहां से लाई जा रही थी, उसे कहां पहुंचाया जाना था और इस कारोबार से कौन-कौन जुड़ा हुआ था। साथ ही गोली चलने की परिस्थितियों और टीम के सदस्यों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।


लेकिन शराब तस्करी के नेटवर्क की जांच के साथ अजीत की मौत से जुड़े सवालों का जवाब मिलना भी उतना ही जरूरी है। क्या सरकारी टीम के ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा के नियमों का पालन किया गया था? गोली चलने के बाद घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने क्या किया? अधिकारियों को किस समय और क्या सूचना दी गई? और अगर शुरुआती कहानी में कोई तथ्य गलत था, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?


अजीत अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी मौत की सच्चाई सामने आना जरूरी है। मामला सिर्फ एक सिपाही की मौत का नहीं, बल्कि सरकारी कार्रवाई में जवाबदेही और पारदर्शिता का भी है। महिला दारोगा समेत तीन लोगों को हिरासत में लिए जाने के बाद अब निगाहें जांच पर टिकी हैं। क्या जांच में यह स्पष्ट हो पाएगा कि अजीत की जान लेने वाली गोली किन परिस्थितियों में चली और घटना के बाद सामने आई कहानी में अंतर क्यों था? यही वे सवाल हैं, जिनके जवाब मिलने के बाद ही इस पूरे मामले की असली तस्वीर साफ हो सकेगी।