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Bihar Crime News : बेटे की हत्या का केस, पिता शिकायतकर्ता और मां गवाह... फिर क्यों जारी हो गया दोनों के खिलाफ वारंट?

मुजफ्फरपुर के विशाल पांडेय हत्याकांड में कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। बेटे की हत्या के मामले में उसके माता-पिता समेत तीन गवाहों के खिलाफ जमानतीय वारंट जारी हुआ है। पुलिस को 21 नवंबर तक सभी को कोर्ट में पेश करना है।

Bihar Crime News : बेटे की हत्या का केस, पिता शिकायतकर्ता और मां गवाह... फिर क्यों जारी हो गया दोनों के खिलाफ वारंट?
Tejpratap
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Bihar Crime News: मुजफ्फरपुर में करीब ढाई साल पुराने हत्या के एक मामले ने एक बार फिर सनसनी मचा दी है। जिस युवक की हत्या के बाद उसका परिवार सड़क पर उतरकर आरोपितों को सजा दिलाने की मांग कर रहा था, अब उसी मामले में मृतक के माता-पिता के खिलाफ कोर्ट ने जमानतीय वारंट जारी किया है। कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया है कि मृतक के माता-पिता समेत तीन गवाहों को 21 नवंबर तक न्यायालय में उपस्थित कराया जाए। मामला अहियापुर थाना क्षेत्र का है और युवक की हत्या बेहद निर्मम तरीके से की गई थी।


दरअसल, बखरी टरमा गांव निवासी विशाल पांडेय की हत्या 19 फरवरी 2024 को कर दी गई थी। उसका शव एसकेएमसीएच के पीछे शहबाजपुर सलेम गांव में एक सुनसान जगह पर बोरे में बंद मिला था। विशाल की चाकू से गला रेतकर हत्या की गई थी। शव मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी। इस मामले में विशाल के पिता राजेश पांडेय के बयान पर अहियापुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।


अब इसी मुकदमे में गवाही के लिए उपस्थित नहीं होने पर कोर्ट ने मृतक के पिता राजेश पांडेय, मां रंजू देवी और बखरी निवासी सुधा देवी के खिलाफ जमानतीय वारंट जारी किया है। एसएसपी के माध्यम से वारंट अहियापुर थानेदार को भेजा गया है। कोर्ट ने तीनों गवाहों को 21 नवंबर तक न्यायालय में पेश कराने का निर्देश दिया है।


विशाल की हत्या के बाद उसके परिवार ने आरोपितों की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर जोरदार आवाज उठाई थी। 19 फरवरी 2024 को शव मिलने के बाद बखरी में परिवार के लोग सड़क पर उतर आए थे। इस दौरान पूर्व मंत्री और कांटी विधायक अजीत कुमार, पूर्व मंत्री सुरेश शर्मा और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी मामले को गंभीरता से उठाया था। प्रतिनिधिमंडल ने तत्कालीन एसएसपी से मुलाकात कर आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई और स्पीडी ट्रायल के जरिए जल्द सजा दिलाने की मांग की थी।


मामले में मृतक के पिता राजेश पांडेय खुद केस के सूचक हैं, जबकि उनकी पत्नी रंजू देवी को अहम गवाह बताया गया है। प्राथमिकी में राजेश पांडेय ने पुलिस को बताया था कि 18 फरवरी की शाम उनका बेटा विशाल घर से सब्जी लाने की बात कहकर निकला था। इसके बाद वह वापस नहीं लौटा। परिजनों को बाद में विशाल की हत्या की खबर मिली और अगले दिन उसका शव बोरे में बंद हालत में बरामद हुआ।


पिता के अनुसार, विशाल को एक अंजान नंबर से बार-बार फोन किया जा रहा था। कॉल के जरिए उसे घर से बाहर बुलाया गया और इसके बाद उसकी हत्या कर दी गई। परिवार ने आशंका जताई थी कि किसी साजिश के तहत विशाल को बुलाकर मौत के घाट उतारा गया और फिर शव को सुनसान जगह पर फेंक दिया गया।


पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो विशाल के आपराधिक रिकॉर्ड की बात भी सामने आई। जांच में यह जानकारी मिली कि उसके कुछ आपराधिक प्रवृत्ति वाले साथियों से संबंध थे। पुलिस को आशंका थी कि इन्हीं साथियों ने फोन करके विशाल को बुलाया और फिर उसकी हत्या कर दी। हालांकि, मामले में कोर्ट की कार्यवाही के दौरान गवाहों की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण है।


अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस परिवार ने बेटे की हत्या के बाद आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आवाज उठाई थी, उसी परिवार के माता-पिता अदालत में गवाही देने क्यों नहीं पहुंच रहे हैं। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए दोनों के खिलाफ जमानतीय वारंट जारी किया है। पुलिस को अब दोनों समेत तीनों गवाहों को निर्धारित तारीख तक अदालत में पेश करना होगा।


करीब ढाई साल पुराने इस हत्याकांड में अब कोर्ट की सख्ती के बाद एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। विशाल पांडेय की हत्या की गुत्थी, आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई और गवाहों की भूमिका पर अब सबकी नजर है। 21 नवंबर को अदालत में तीनों गवाहों की पेशी के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई किस दिशा में बढ़ती है, यह देखने वाली बात होगी।