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मुजफ्फरपुर: चर्चित प्रॉपर्टी डीलर हत्याकांड में पुलिस की बड़ी विफलता, कोर्ट ने तीनों आरोपियों को किया बाइज्जत बरी

मुजफ्फरपुर के चर्चित प्रॉपर्टी डीलर राजीव कुमार हत्याकांड में अदालत ने तीन मुख्य आरोपियों को साक्ष्य न होने के चलते बरी कर दिया। पुलिस की जांच प्रणाली पर उठे गंभीर सवाल।

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पुलिस की जांच पर सवाल
© REPORTER
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

MUZAFFARPUR: मुजफ्फरपुर जिले के चर्चित प्रॉपर्टी डीलर राजीव कुमार हत्याकांड में शनिवार को स्थानीय अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। लगभग ढाई साल तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई के बाद, अदालत ने मामले में नामजद तीनों मुख्य आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया है। कोर्ट के इस निर्णय ने जहाँ आरोपियों के परिजनों को राहत दी है, वहीं जिला पुलिस की जांच प्रणाली और कार्यशैली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


क्या था पूरा मामला?

यह सनसनीखेज वारदात 2 जुलाई 2023 को मानियारी थाना क्षेत्र में हुई थी। बाइक सवार अपराधियों ने प्रॉपर्टी डीलर राजीव कुमार की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद इलाके में काफी आक्रोश व्याप्त था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई का दावा करते हुए शक और शुरुआती इनपुट के आधार पर सुशील पासवान, गुरुचरण राय और बुलबुल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।


अदालत का रुख और पुलिस की नाकामी

शनिवार को हुई अंतिम सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता संजय कुमार ने दलील दी कि पुलिस ने केवल संदेह के आधार पर उनके मुवक्किलों को फंसाया था। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ कोई भी ठोस या वैज्ञानिक साक्ष्य (Scientific Evidence) पेश करने में पूरी तरह विफल रहा। गवाहों के बयानों और पुलिस की चार्जशीट में कई विसंगतियां पाई गईं। पर्याप्त सबूत न होने के कारण माननीय न्यायालय ने सुशील पासवान, गुरुचरण राय और बुलबुल को निर्दोष करार देते हुए रिहा करने का आदेश दिया।


परिजनों ने जताया न्याय पर भरोसा

बता दें कि सुशील और गुरुचरण पहले से जमानत पर थे, लेकिन तीसरा आरोपी बुलबुल पिछले ढाई साल से जेल की सलाखों के पीछे था। रिहाई के बाद बुलबुल की पत्नी पूजा कुमारी ने कहा, "हमें शुरू से ही न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। मेरे पति को झूठे मामले में फंसाया गया था, आज सच्चाई की जीत हुई है।"


पुलिस के सामने अब भी चुनौतियां

इस हत्याकांड के कुछ अन्य आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं। मुख्य आरोपियों के बरी होने के बाद अब पुलिस के लिए यह गुत्थी और उलझ गई है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि ये तीनों निर्दोष थे, तो राजीव कुमार का असली कातिल कौन है? क्या पुलिस की लचर पैरवी और कमजोर जांच के कारण असली अपराधी अब भी कानून की गिरफ्त से बाहर हैं? इस फैसले ने मुजफ्फरपुर पुलिस की कार्यक्षमता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

MANOJ KUMAR

FirstBihar संवाददाता