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प्रसाद हॉस्पिटल हादसे में बड़ा खुलासा, कमजोर वायरिंग बनी मौत की वजह? आज डीएम को सौंपी जाएगी जांच रिपोर्ट

Bihar News: जफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड मामले में जांच के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। प्रारंभिक जांच में आईसीयू की वायरिंग, एसी लोड और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। अस्पताल प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण...

प्रसाद हॉस्पिटल हादसे में बड़ा खुलासा, कमजोर वायरिंग बनी मौत की वजह? आज डीएम को सौंपी जाएगी जांच रिपोर्ट
Ramakant kumar
3 मिनट

Bihar News: मुजफ्फरपुर के चर्चित प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड मामले में जांच तेजी से आगे बढ़ रही है. जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन द्वारा गठित पांच सदस्यीय जांच समिति मंगलवार यानी आजो अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है. प्रारंभिक जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिनसे अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.


सूत्रों के अनुसार जांच में पता चला है कि अस्पताल के आईसीयू में केवल दो एसी की क्षमता के अनुसार वायरिंग की गई थी, लेकिन वहां एक साथ छह एसी संचालित किए जा रहे थे. लगातार अधिक लोड पड़ने की वजह से वायरिंग गर्म हुई और शॉर्ट सर्किट हो गया. बताया जा रहा है कि आग सबसे पहले इलेक्ट्रिकल सिस्टम से शुरू हुई और फिर वेंटिलेटर समेत आईसीयू के अन्य हिस्सों में फैल गई. देखते ही देखते पूरा आईसीयू धुएं और आग की चपेट में आ गया.


जांच समिति ने यह भी पाया है कि आईसीयू की वायरिंग सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं थी. कई जगहों पर तकनीकी खामियां मिली हैं. इसके अलावा अस्पताल में फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं. जांच टीम ने अस्पताल प्रबंधन से अग्निशमन उपकरणों, फायर हाइड्रेंट सिस्टम और कर्मचारियों के प्रशिक्षण से जुड़ी जानकारी मांगी थी, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाया.


मामले को और गंभीर तब माना गया जब अस्पताल प्रबंधन भवन का स्वीकृत नक्शा तक उपलब्ध नहीं करा सका. नगर निगम की टीम ने चार दिनों तक इंतजार करने के बाद अपनी रिपोर्ट सौंप दी, जिसमें साफ उल्लेख किया गया है कि अस्पताल प्रशासन ने भवन का नक्शा उपलब्ध नहीं कराया. इससे जांच एजेंसियों का संदेह और बढ़ गया है.


जानकारी के मुताबिक वर्ष 2014 में अस्पताल का उद्घाटन हुआ था. जांच टीम को आशंका है कि बाद में भवन में कुछ हिस्सों का निर्माण बिना आवश्यक स्वीकृति के किया गया था. यही कारण हो सकता है कि अस्पताल प्रबंधन नक्शा देने से बचता रहा. संभावना है कि इस बिंदु को भी जांच रिपोर्ट में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा.


सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार ने भी स्वीकार किया है कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा मांगी गई कई महत्वपूर्ण जानकारियां और दस्तावेज अब तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं. ऐसे में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है और अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही तय होने की संभावना भी बढ़ गई है.


गौरतलब है कि 5 जून की अहले सुबह करीब 3 बजे प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू में भीषण आग लग गई थी. इस दर्दनाक हादसे में अब तक सात मरीजों की जान जा चुकी है. घटना के बाद जिला प्रशासन ने अस्पताल को सील कर दिया था और कई विभागों की टीमें अलग-अलग स्तर पर जांच में जुट गई थीं.