1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 20, 2026, 12:26:37 PM
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BIHAR POLICE : मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट थाना क्षेत्र के चोरनिया गांव में हुई पुलिस-पब्लिक झड़प और फायरिंग की घटना के बाद थानाध्यक्ष राजा सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस घटना में पुलिस की गोली से एक अधेड़ व्यक्ति की मौत हो गई, जिसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। अब पुलिस महकमे से लेकर आम लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि संबंधित थानेदार का फायरिंग करने का पुराना रिकॉर्ड रहा है और यह कोई पहली घटना नहीं है।
दरअसल, सामने आई जानकारी के मुताबिक राजा सिंह इससे पहले भी दो अलग-अलग मामलों में सरकारी पिस्टल से फायरिंग कर चुके हैं। इस तरह देखा जाए तो गायघाट की घटना को मिलाकर यह तीसरी बार है जब उनके द्वारा फायरिंग किए जाने की बात सामने आई है। खास बात यह है कि एक मामले में उन्होंने खुद अपने बयान के आधार पर सनहा दर्ज करवाते हुए फायरिंग की बात स्वीकार भी की थी।
राजा सिंह के करियर पर नजर डालें तो वे बिहार पुलिस में पहले कांस्टेबल के पद पर बहाल हुए थे। इसके बाद उन्होंने 2019 की बिहार पुलिस दारोगा भर्ती परीक्षा पास की और वर्ष 2020 में उनकी पोस्टिंग मुजफ्फरपुर जिले में हुई। कुछ वर्षों के भीतर ही उनके कार्यशैली को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं, खासकर कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में उनके द्वारा अपनाए गए सख्त रवैये को लेकर।
पहली घटना मुजफ्फरपुर के पानापुर इलाके के करियात थाना क्षेत्र से जुड़ी बताई जाती है। सूत्रों की मानें तो उस समय राजा सिंह इलाके में शराबबंदी कानून के उल्लंघन की सूचना पर कार्रवाई करने पहुंचे थे। बताया जाता है कि मौके पर हालात ऐसे बने कि उन्होंने अपनी सरकारी पिस्टल से फायरिंग कर दी। हालांकि इस घटना में किसी के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन यह उनके फायरिंग रिकॉर्ड की शुरुआत मानी जा रही है।
दूसरी घटना औराई थाना क्षेत्र की है, जहां 20 मई 2025 को एक सड़क दुर्घटना के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। इस मामले में खुद थानाध्यक्ष राजा सिंह द्वारा सनहा दर्ज कराया गया था। उन्होंने अपने बयान में कहा कि सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत के बाद जब पुलिस शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जा रही थी, तब कुछ लोगों ने विरोध शुरू कर दिया और माहौल बिगड़ गया। आरोप है कि इसी दौरान एक युवक ने उन पर डंडे से हमला कर दिया, जिससे उनकी जान को खतरा उत्पन्न हो गया। इस परिस्थिति में उन्होंने आत्मरक्षा के लिए एक राउंड फायरिंग की। उनके अनुसार, यह कदम भीड़ को नियंत्रित करने और अपनी सुरक्षा के लिए उठाया गया था।
तीसरी और सबसे ताजा घटना गायघाट थाना क्षेत्र के चोरनिया गांव की है, जिसने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। 17 मार्च की देर रात पुलिस टीम पोक्सो एक्ट और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए गांव में छापेमारी करने पहुंची थी। टीम का नेतृत्व थानाध्यक्ष राजा सिंह कर रहे थे। पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने एक घर में शरण ले ली थी, इसी दौरान ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठा हो गई और पुलिस टीम पर पथराव शुरू कर दिया गया।
पुलिस के अनुसार स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी और भीड़ ने पुलिसकर्मियों को घेर लिया। इसी दौरान ‘डकैत’ और ‘बच्चा चोर’ जैसे नारे भी लगाए गए। पुलिस का कहना है कि आत्मरक्षा में फायरिंग की गई और गोली हवा में चलाई गई थी, लेकिन इस दौरान जगतवीर राय नामक व्यक्ति को सीने में गोली लग गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना में थानाध्यक्ष समेत चार पुलिसकर्मी घायल भी बताए जा रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या हर बार फायरिंग ही एकमात्र विकल्प था या हालात को संभालने के अन्य तरीके भी अपनाए जा सकते थे। पुलिस विभाग के अंदर भी इस बात को लेकर मंथन शुरू हो गया है। वहीं, स्थानीय लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है और निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।
गायघाट की घटना ने न सिर्फ एक व्यक्ति की जान ली, बल्कि पुलिस की कार्यशैली और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच में क्या निष्कर्ष निकलता है और क्या इस मामले में किसी प्रकार की कार्रवाई होती है या नहीं।