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वाह रे सिस्टम! 65 हजार लेकर दिव्यांग को बना दिया गार्ड, नगर निगम में खुलेआम चलता रहा खेल

Bihar News: नौकरी का सपना हर किसी की जिंदगी बदल सकता है… लेकिन क्या हो जब यही सपना किसी के लिए जाल बन जाए? मुजफ्फरपुर नगर निगम से जुड़ा यह मामला सिर्फ भ्रष्टाचार की कहानी नहीं, बल्कि मजबूरी और शोषण की दर्दनाक तस्वीर है। बेरोजगारी से जूझ रहे युवाओं को

वाह रे सिस्टम! 65 हजार लेकर दिव्यांग को बना दिया गार्ड, नगर निगम में खुलेआम चलता रहा खेल
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

Bihar News: बिहार के मुजफ्फरपुर नगर निगम से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां आउटसोर्सिंग के नाम पर बड़ा खेल किया गया। आरोप है कि मानव बल आपूर्ति का ठेका मिलने के बाद निजी एजेंसी ने नौकरी दिलाने के नाम पर जमकर अवैध वसूली की और नियमों को ताक पर रख दिया। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले में अधिकारी भी मूकदर्शक बने रहे।


जानकारी के अनुसार, मेसर्स गोस्वामी सिक्यूरिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड नामक एजेंसी को नगर निगम में गार्ड और सफाईकर्मियों की आपूर्ति का जिम्मा दिया गया था। एग्रीमेंट की शर्तों के अनुसार, एजेंसी किसी भी कर्मचारी से नौकरी दिलाने के बदले कोई पैसा नहीं ले सकती थी। इसके बावजूद एजेंसी ने बेरोजगार युवाओं से मोटी रकम वसूलनी शुरू कर दी।


सबसे गंभीर मामला एक दिव्यांग व्यक्ति का सामने आया है, जिससे गार्ड की नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 65 हजार रुपये वसूले गए। हैरानी की बात यह है कि उस व्यक्ति को चलने-फिरने में भी परेशानी है, फिर भी उसे गार्ड की ड्यूटी पर लगा दिया गया। वर्तमान में वह नगर निगम के एक अंचल कार्यालय में कार्यरत है।


आरोप है कि एजेंसी ने सिर्फ भर्ती के नाम पर ही नहीं, बल्कि अन्य मदों में भी कर्मचारियों से अवैध वसूली की। हर गार्ड से वर्दी के नाम पर 5600 रुपये लिए गए, जबकि बाजार में इसकी कीमत अधिकतम दो से ढाई हजार रुपये ही होती है। इसके अलावा वेतन, ईपीएफ और अन्य लाभों की भी सही जानकारी कर्मचारियों को नहीं दी गई।


कर्मचारियों का कहना है कि जब उन्होंने इस अवैध वसूली का विरोध किया, तो उन्हें डराया-धमकाया गया और चुप रहने के लिए मजबूर किया गया। कई लोगों को नौकरी से निकालने की धमकी भी दी गई, जिससे वे खुलकर सामने नहीं आ सके।


इस पूरे मामले में सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि नगर निगम के अधिकारियों को इन अनियमितताओं की जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लंबे समय तक यह खेल चलता रहा और कोई रोकने वाला नहीं था। अब मामला सामने आने के बाद जांच और कार्रवाई की बात कही जा रही है।


यह भी सामने आया है कि यह पहली बार नहीं है जब इस एजेंसी पर आरोप लगे हैं। करीब नौ साल पहले भी निगम में ईपीएफ और ईएसआईसी घोटाले में इसी एजेंसी का नाम सामने आया था। उस समय भी कर्मचारियों की राशि जमा नहीं कराई गई थी।


इतना ही नहीं, वर्ष 2014 में सारण जिले के दरियापुर थाना में भी इस एजेंसी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। हालांकि, इन सबके बावजूद एजेंसी ने जानकारी छिपाकर लाइसेंस हासिल कर लिया था, जिसे बाद में नवंबर 2025 में गृह विभाग ने रद्द कर दिया।


अब इस मामले में दो आउटसोर्सिंग एजेंसियों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। वित्तीय गड़बड़ी और वेतन भुगतान में देरी को लेकर उनसे जवाब मांगा गया है। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


बिहार लोकल बॉडीज इम्प्लाइज फेडरेशन के प्रदेश महामंत्री अशोक कुमार सिंह ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि एजेंसियों द्वारा कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है और उन्हें डराकर चुप कराया जा रहा है। नगर आयुक्त ने भी एजेंसियों से जवाब-तलब किया है।