MUZAFFARPUR: मुजफ्फरपुर के मुशहरी अंचल के अंचलाधिकारी (CO) महेन्द्र कुमार शुक्ला को गंभीर आरोपों के चलते तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। समाहर्ता-सह-जिलाधिकारी, मुजफ्फरपुर की ओर से भेजे गए आरोप पत्र के आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार ने यह कार्रवाई की है।
महेन्द्र कुमार शुक्ला पर दाखिल-खारिज समेत अंचल से जुड़े कई सरकारी कार्यों में लापरवाही, संदिग्ध भूमिका और पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने के आरोप लगाए गए हैं।
दाखिल-खारिज मामले में गंभीर आरोप
आरोप पत्र के अनुसार, एक नामांतरण आवेदन को करीब 140 दिनों तक लंबित रखने के बाद निष्पादित किया गया। नामांतरण प्रक्रिया के दौरान मृत महिला मालती देवी के नाम से दर्ज आपत्ति को स्वीकार करने का भी आरोप है।
इसके अलावा दाखिल-खारिज वाद संख्या 5451/2024-2025 में संलग्न दस्तावेजों में बदलाव किए जाने की शिकायत को प्रथम दृष्टया सही पाया गया है। उक्त मामले के निष्पादन के दौरान संदिग्ध भूमिका और पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया गया है। आरोप पत्र में यह भी कहा गया है कि स्वत्व वाद संख्या 41/2025 के Admission स्तर पर ही विचाराधीन रहने के बावजूद दाखिल-खारिज आवेदन को अस्वीकृत कर दिया गया।
RTI और विभागीय कार्यों में लापरवाही का आरोप
सीओ पर सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत निर्धारित समय-सीमा में आवेदक को सूचना उपलब्ध नहीं कराने का आरोप भी लगाया गया है। इसके अलावा जांच में सहयोग नहीं करने और समय पर स्पष्टीकरण का जवाब नहीं देने की बात भी आरोप पत्र में दर्ज है। अंचल से संबंधित दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस, ऑनलाइन भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र (LPC), अभियान बसेरा-2 और आधार सीडिंग जैसे कार्यों के निष्पादन में लापरवाही और उदासीनता बरतने का भी आरोप लगाया गया है।
फर्जी दस्तावेज और भू-माफियाओं से सांठगांठ का आरोप
आदेश में पुलिस महानिदेशक, विशेष शाखा, बिहार, पटना से प्राप्त पत्र का भी उल्लेख किया गया है। इसमें महेन्द्र कुमार शुक्ला पर कथित तौर पर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर दाखिल-खारिज करने और भू-माफियाओं के साथ सांठगांठ कर व्यापक अनियमितता करने जैसे गंभीर आरोप प्रतिवेदित किए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अनुशासनिक प्राधिकार ने उन्हें निलंबित करने का निर्णय लिया है।
सारण प्रमंडल कार्यालय छपरा रहेगा मुख्यालय
बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1) के तहत महेन्द्र कुमार शुक्ला को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय, सारण प्रमंडल, छपरा निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें नियमावली के नियम-10 के तहत नियमानुसार जीवन-निर्वाह भत्ता देय होगा। यह आदेश बिहार के राज्यपाल के आदेश से सरकार के संयुक्त सचिव संजय कुमार सिंह की ओर से जारी किया गया है।
बता दें कि केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के मुजफ्फरपुर जिले के बेलसंड से लोजपा-आर विधायक अमित रानू पर करोड़ों रुपये की जमीनें हड़पने और रंगदारी मांगने के आरोप लगा था। बेलसंड विधायक रानू पर अलग-अलग थानों में 8-9 केस दर्ज हैं। अगस्त 2026 में मुजफ्फरपुर जिले के बैरिया स्थित आवास पर छापेमारी की थी। उस समय पुलिस और विधायक के समर्थकों के बीच भिड़ंत हुई थी, जिसके बाद कोर्ट ने रानू पर 1.20 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। मुजफ्फरपुर के मुशहरी अंचल के अंचल अधिकारी (CO) महेन्द्र कुमार शुक्ला को लोजपा विधायक अमित रानू व भू-माफियाओं से सांठगांठ रखने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। डीजी स्पेशल ब्रांच की रिपोर्ट के बाद यह कार्रवाई की गयी है।






