मुजफ्फरपुर: बिहार में शराबबंदी के बीच शराब के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची सरकारी टीम को ही अगर भीड़ घेर ले और हिरासत में लिए गए कथित शराब तस्कर को छुड़ा ले, तो सवाल उठना लाजिमी है—आखिर कानून का डर किसे नहीं है? और क्या शराब माफिया के सामने सरकारी कार्रवाई इतनी बेबस हो गई है?
मुजफ्फरपुर के सकरा थाना क्षेत्र के रूपनपट्टी चौक से सामने आई घटना ने पुलिस और उत्पाद विभाग की कार्रवाई पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शराब बिक्री और होम डिलीवरी की सूचना पर छापेमारी करने पहुंची उत्पाद विभाग की टीम पर स्थानीय लोगों ने कथित तौर पर हमला कर दिया। टीम को घेरकर धक्का-मुक्की की गई और इसी अफरातफरी के बीच हिरासत में लिए गए एक कथित शराब तस्कर को छुड़ा लिया गया।
घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें मौके पर लोगों की भीड़ और अफरातफरी का दृश्य दिखाई देने की बात सामने आई है। मामले में उत्पाद विभाग के एएसआई उपेंद्र मंडल के आवेदन पर सकरा थाने में पांच नामजद और तीन-चार अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
शराब की होम डिलीवरी की सूचना, पहुंच गई उत्पाद टीम
जानकारी के अनुसार, उत्पाद विभाग की टीम को सूचना मिली थी कि सकरा थाना क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध शराब की बिक्री की जा रही है। इतना ही नहीं, बाइक के जरिए शराब की होम डिलीवरी किए जाने की भी सूचना टीम को मिली थी।
सूचना की पुष्टि के बाद उत्पाद विभाग की टीम एएसआई उपेंद्र मंडल के नेतृत्व में कार्रवाई के लिए पहुंची। टीम ने कार्रवाई के दौरान विशनपुर बघनगरी निवासी पंकज कुमार ठाकुर को हिरासत में लिया। उस पर बाइक के जरिए शराब की सप्लाई करने का आरोप है। लेकिन जैसे ही टीम ने आरोपी को पकड़ा, मौके का माहौल अचानक बदल गया।
आरोपी पकड़ा गया तो जुट गई भीड़
बताया जा रहा है कि जिस मार्केट में कार्रवाई चल रही थी, वह सकरा के रूपनपट्टी निवासी अरविंद मिश्रा का बताया जा रहा है। अरविंद मिश्रा वर्तमान में दरभंगा जिले में डायल 112 की गाड़ी में ड्राइवर के पद पर कार्यरत बताया गया है।आरोप है कि अरविंद मिश्रा भी मौके पर मौजूद था और उसके कथित उकसावे के बाद देखते ही देखते करीब 15 से 20 स्थानीय लोग वहां जुट गए।
अब सवाल यह है कि आखिर कुछ ही मिनटों में इतनी भीड़ कैसे जुट गई? क्या पहले से किसी को कार्रवाई की भनक थी? या फिर शराब के कथित नेटवर्क में स्थानीय स्तर पर इतना मजबूत तालमेल है कि कार्रवाई होते ही लोग आरोपी के बचाव में उतर आए? इन सवालों का जवाब पुलिस जांच के बाद ही साफ हो सकेगा।
सरकारी टीम को घेरा, आरोपी को छुड़ाकर ले गई भीड़
आरोप है कि भीड़ ने उत्पाद विभाग की टीम को चारों तरफ से घेर लिया। इस दौरान टीम के साथ धक्का-मुक्की की गई और सरकारी वाहन को भी क्षतिग्रस्त करने की कोशिश की गई। स्थिति अचानक बिगड़ने से उत्पाद विभाग की टीम के सामने मुश्किल खड़ी हो गई। इसी अफरातफरी का फायदा उठाकर हिरासत में लिए गए पंकज कुमार ठाकुर को कथित तौर पर लोगों ने टीम के कब्जे से छुड़ा लिया। यानी जिस व्यक्ति को उत्पाद विभाग शराब तस्करी के आरोप में पकड़कर ले जाने की तैयारी में था, वह भीड़ के बीच से निकल गया। तो सवाल सीधा है—अगर सरकारी टीम मौके पर किसी आरोपी को पकड़ती है और भीड़ उसे छुड़ा ले जाती है, तो फिर कानून का इकबाल आखिर कहां बचता है?
CCTV फुटेज से सामने आएगा पूरा सच?
घटना के बाद सामने आए CCTV फुटेज को जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फुटेज के जरिए पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि मौके पर कौन-कौन लोग मौजूद थे, किसने भीड़ को इकट्ठा किया और किस तरह हिरासत में लिए गए आरोपी को छुड़ाया गया। CCTV फुटेज इस मामले में पुलिस के लिए अहम सबूत साबित हो सकता है। खासकर उन लोगों की पहचान में मदद मिल सकती है, जिन पर सरकारी टीम के काम में बाधा डालने और आरोपी को छुड़ाने का आरोप है। हालांकि, फुटेज के आधार पर किसी व्यक्ति की भूमिका को अंतिम रूप से तय करने से पहले पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।
पुलिस पहुंची, तब तक फरार हो चुके थे आरोपी
घटना की जानकारी मिलने के बाद सकरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। लेकिन तब तक कथित हमलावर और आरोपी वहां से फरार हो चुके थे। पुलिस ने आरोपियों के संभावित ठिकानों पर छापेमारी भी की, लेकिन तत्काल किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। मामले की पुष्टि करते हुए डीएसपी पूर्वी-2 मनोज कुमार सिंह ने बताया कि उत्पाद विभाग की टीम चिकनौटा चेक पोस्ट के पास शराब बिक्री की सूचना पर गई थी। पंकज ठाकुर को रोकने के बाद भीड़ इकट्ठा हुई और धक्का-मुक्की कर उसे छुड़ा लिया गया। एएसआई उपेंद्र मंडल के आवेदन पर पांच नामजद और तीन-चार अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
शराबबंदी के बीच सबसे बड़ा सवाल—किसके दम पर?
बिहार में शराबबंदी लागू है और अवैध शराब के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जाती है। लेकिन इस घटना ने जमीनी स्तर पर शराब के कथित नेटवर्क और सरकारी कार्रवाई के बीच टकराव की तस्वीर सामने ला दी है। अगर शराब की बिक्री और होम डिलीवरी की सूचना सही थी, तो सवाल यह है कि कौन लोग इस धंधे को संरक्षण दे रहे हैं? और अगर उत्पाद विभाग की टीम कार्रवाई करने पहुंची थी, तो उसके काम में बाधा डालने की हिम्मत भीड़ को कहां से मिली?
दूसरा बड़ा सवाल यह भी है कि अगर डायल 112 में कार्यरत एक ड्राइवर की मौके पर मौजूदगी और कथित भूमिका जांच में सामने आती है, तो पुलिस विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेगा? फिलहाल पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और नामजद आरोपियों की भूमिका की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के पीछे असल कहानी क्या थी।
लेकिन एक बात तय है—शराब तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करने गई टीम से आरोपी का छुड़ा लिया जाना महज एक घटना नहीं, बल्कि कानून के सामने खड़ी बड़ी चुनौती है। अब देखना होगा कि पुलिस इस चुनौती का जवाब आरोपियों की गिरफ्तारी से देती है या मामला भीड़ और अफरातफरी की फाइलों में दबकर रह जाता है।





