1st Bihar Published by: MANOJ KUMAR Updated Sat, 17 Jan 2026 10:15:06 PM IST
वर्दी के गम में उठा लिया बड़ा कदम - फ़ोटो REPORTER
MUZAFFARPUR: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक ऐसी हृदयविदारक खबर सामने आई है, जिसने न केवल एक परिवार के चिराग को बुझा दिया, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं को भी झकझोर कर रख दिया है। शनिवार की देर शाम सदर थाना क्षेत्र के खबरा गुमटी नंबर 6 के पास ट्रेन की चपेट में आने से एक युवती की दर्दनाक मौत हो गई। मृतका की पहचान गोविंदपुरी बेला निवासी सीखा कुमारी के रूप में हुई है।
ग्राउंड से लौटते समय हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, सीखा कुमारी खाकी वर्दी पहनने का जुनून रखती थी। वह कच्ची-पक्की इलाके में एक किराए के मकान में रहकर बिहार पुलिस और एसएससी जीडी (SSC GD) जैसी परीक्षाओं के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रही थी। शनिवार की शाम वह रोज की तरह शारीरिक अभ्यास (Physical Practice) कर लौट रही थी। इसी दौरान खबरा गुमटी नंबर 6 के समीप वह ट्रेन की चपेट में आ गई। हादसा इतना भीषण था कि युवती की मौके पर ही मौत हो गई।
लिखित परीक्षा में सफलता, पर PET की विफलता का था बोझ
सीखा की कहानी संघर्ष और सपनों के बीच झूलती एक दास्तां है। बताया जा रहा है कि उसने हाल ही में बिहार पुलिस की लिखित परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी, जिससे उसके परिवार की उम्मीदें काफी बढ़ गई थीं। हालांकि, हाल ही में आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) में उसे सफलता नहीं मिल सकी। स्थानीय सूत्रों और परिचितों के अनुसार, इस असफलता के बाद से वह गहरे मानसिक तनाव में थी। इसके बावजूद उसने हार नहीं मानी थी और दोबारा खुद को साबित करने के लिए नियमित रूप से अभ्यास कर रही थी।
पुलिस कार्रवाई और परिजनों का विलाप
घटना के बाद मौके पर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलते ही सदर थाने की पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शव को कब्जे में लिया। पहचान होने के बाद जब पुलिस ने परिजनों को सूचना दी, तो घर में कोहराम मच गया। रोते-बिलखते परिजन पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। पुलिस ने शव को अंत्यपरीक्षण के लिए श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SKMCH) भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामला प्रथम दृष्टया हादसा प्रतीत हो रहा है, लेकिन तनाव और अन्य सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर गहन छानबीन की जा रही है।
एक बड़ा सवाल: युवाओं पर बढ़ता दबाव
सीखा कुमारी की यह असमय मौत समाज और व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करती है। प्रतियोगी परीक्षाओं का कठिन दौर और एक अदद नौकरी पाने की जद्दोजहद युवाओं को इस कदर मानसिक तनाव में डाल रही है कि वे हादसों का शिकार हो रहे हैं। मनोचिकित्सकों का मानना है कि विफलता के समय युवाओं को परिवार और समाज के संबल की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।